नियमों में नहीं हुआ बदलाव, फिर भी आश्रितों की बहाली पर रोक

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 06 Jul 2018 7:00 AM

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बेरमो : वेज बोर्ड-दो के समय से कोलकर्मियों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर मिलने वाले नियोजन पर कोल इंडिया चेयरमैन के आदेश के बावजूद विभिन्न कंपनियों के प्रबंधन ने रोक लगा दी है. सीसीएल में तीन जून के बाद से इस पर पूरी तरह रोक लगा दी गयी है. हालांकि सीसीएल के निदेशक […]

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बेरमो : वेज बोर्ड-दो के समय से कोलकर्मियों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर मिलने वाले नियोजन पर कोल इंडिया चेयरमैन के आदेश के बावजूद विभिन्न कंपनियों के प्रबंधन ने रोक लगा दी है. सीसीएल में तीन जून के बाद से इस पर पूरी तरह रोक लगा दी गयी है. हालांकि सीसीएल के निदेशक कार्मिक आरएस महापात्रा का कहना है कि अभी तक इस संबंध में कोल इंडिया से कोई लिखित आदेश नहीं मिला है.
जबकि हाल ही में कोल इंडिया चेयरमैन अनिल कुमार झा ने स्पष्ट किया था कि कोयला कर्मियों के आश्रितों के नियोजन को फिलहाल बंद नहीं किया गया है. 10वें वेतन समझौते के तहत आश्रितों के लिए और क्या बेहतर किया जा सकता है, इसके लिए कमेटी गठित की गयी है. जब तक कमेटी की रिपोर्ट नहीं आ जाती है, तब तक किसी तरह का बदलाव नहीं किया जायेगा.
गौरतलब है कि 10वें वेतन समझौता के वार्ता के दौरान प्रबंधन की ओर से कहा गया था कि सिर्फ खान दुर्घटना में मौत होने पर ही आश्रित को नियोजन मिलेगा. अन्य किसी कारण से मौत या मेडिकल अनफिट की स्थिति में आश्रित को नौकरी नहीं मिलेगी. श्रमिक संगठनों ने इसका विरोध किया था. इस पर प्रबंधन व श्रमिक संगठन की एक कमेटी गठित भी की गयी है.
प्रबंधन की ओर से कहा गया था कि जब तक कमेटी इसको लेकर कोई पारदर्शी स्कीम नहीं बना लेती है, तब तक नियोजन की प्रक्रिया जारी रहेगी. कमेटी की कई बैठकें भी हुई, जिसमें ड्राफ्टिंग कमेटी का गठन करने का निर्णय हुआ. ड्राफ्टिंग कमेटी की अभी तक तीन बार बैठक की तिथि तय की गयी, लेकिन एक ही बार बैठक हो सकी.
बोर्ड व डीपी से अनुमोदन मिलने के बाद सैकड़ों मामले पड़े हैं लंबित
चार मार्च 2018 को दिल्ली में हुई एपेक्स जेसीसी की बैठक में मजदूर संगठनों ने प्रबंधन से कहा था कि पूर्व से चली आ रही इस स्कीम में कोई फेरबदल नहीं किया जाये. प्रबंधन ने अप्रैल व मई माह तक का समय देते हुए यूनियन नेताओं से दो माह के अंदर स्कीम बनाने को कहा. इस बीच तीन जून को कोलकाता में स्कीम बनाने के लिए गठित कमेटी की बैठक होनी थी, लेकिन यह बैठक स्थगित हो गयी.
इसके बाद तीन जून से कोल इंडिया प्रबंधन ने अनुकंपा के आधार पर आश्रित को मिलने वाली नौकरी पर रोक लगा दी. तीन जून के बाद जिन आश्रितों को नियोजन का पत्र दिया गया था, उसे हेल्डअप कर दिया था. बाद में उच्च प्रबंधन के टेलिफोनिंग मैसेज के बाद कुछ मामलों में आश्रितों को नियोजन पत्र दे दिया गया. लेकिन अब डेथ केस में आश्रित के नियोजन संबंधी सभी फाइल को पेंडिंग में डाल दिया गया है.
30 जून को सीसीएल स्तरीय संयुक्त सलाहकार संचालन समिति (जेसीएसी) की बैठक में सदस्यों ने भी इस मामले को प्रबंधन के समक्ष रखा. कहा कि तीन जून के पहले के भी सैकड़ों मामले पेंडिंग में है, जबकि सीसीएल बोर्ड व डीपी से अनुमोदन मिल चुका है. ऐसे मामलों का जल्द से जल्द निष्पादन कर आश्रितों को नियोजन पत्र दे देना चाहिए.
क्या है प्रबंधन की मंशा
कोल इंडिया डेथ केस के मामले में दिये जाने वाले नियोजन को पूरी तरह से बंद कर देना चाहता है. 15 जुलाई 2017 की बैठक में डेथ केस और मेडिकल अनफिट में कर्मियों के आश्रितों के नियोजन के संबंध में कोल इंडिया प्रबंधन ने सुप्रीम कोर्ट समेत अन्य कोर्ट का हवाला देते हुए प्रस्ताव दिया था कि फैटल एक्सीडेंट (ड्यूटी में मौत) के तहत ही आश्रित को नियोजन दिया जायेगा. अगर कोई कर्मी जहर खाकर या फांसी लगा कर आत्महत्या कर लेता है या फिर कोई कर्मी अापराधिक मामले में फंसता है तो ऐसे मामले में आश्रित के कर्मियों को नौकरी नहीं दे सकते. यानी नेचुरल डेथ केस में नियोजन नहीं मिलेगा. अगर कुछ मामले में नियोजन देने की नौबत भी आयी तो वैकेंसी के आधार पर ही दी जायेगी. प्रबंधन का कहना है कि ऐसा कई कंपनियों में प्रावधान है. इस प्रस्ताव को एक यूनियन नेताओं ने खारिज करते हुए अन्य कंपनियों के प्रावधान को उपलब्ध कराने को कहा. कहा कि सुप्रीम कोर्ट का हवाला देकर प्रबंधन नियोजन बंद नहीं कर किया जा सकता है. दूसरी ओर प्रबंधन ने यह भी ऑफर दिया कि आश्रित नियोजन के एवज में तीन किस्त में (पहला व दूसरा किसत में 30-30 फीसदी तथा तीसरे किस्त में 40 फीसदी) राशि देने को वह तैयार है.
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