सिक्काें की खनक बनी परेशानी का सबब

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बोकारो : सिक्काें की खनक वर्तमान में दुकानदारों को चैन से सोने नहीं दे रही है! नोटबंदी के 19 माह बाद भी शहर में सिक्का की समस्या खत्म होती नहीं दिख रही है. नोटबंदी के दौरान नोट के बदले बैंक व डाकघर से बहुत ग्राहकों को सिक्का मिला. लोगों ने सिक्का खपत के लिए बाजार […]

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बोकारो : सिक्काें की खनक वर्तमान में दुकानदारों को चैन से सोने नहीं दे रही है! नोटबंदी के 19 माह बाद भी शहर में सिक्का की समस्या खत्म होती नहीं दिख रही है. नोटबंदी के दौरान नोट के बदले बैंक व डाकघर से बहुत ग्राहकों को सिक्का मिला. लोगों ने सिक्का खपत के लिए बाजार का रुख किया. इसके बाद बाजार में सिक्का का चलन बढ़ा. अब यही सिक्के बाजार के लिए परेशानी का कारण बन गये हैं. सिक्का ग्राहक से दुकानदार के पास जमा हो गया है. छोटा से लेकर बड़ा व्यवसायी इससे प्रभावित हो रहा है.

बैंक लेते है एक हजार, दुकान में आते हैं कई हजार : बैंक ने ग्राहकों को नोटबंदी के समय सिक्का दिया था. जब ग्राहक सिक्का जमा करने के लिए बैंक की ओर रुख करते हैं, तो कई शाखा में परेशानी का सामना करना पड़ा. बैंकों ने इसके लिए कई कारण बताये. परेशानी को देखते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को सिक्का के संबंध में गाइडलाइंस जारी करना पड़ा. आरबीआइ के अनुसार हर ग्राहक प्रति दिन एक हजार रुपये का सिक्का बैंक में जमा कर सकेगा. लेकिन, समस्या का समाधान इससे भी नहीं हुआ. क्योंकि दुकानदारों के पास एक दिन में कई हजार के सिक्के जमा होते थे. इस कारण धीरे-धीरे सिक्काें का संग्रह दुकानदारों के पास बढ़ता ही गया.
आरबीआइ की ओर से नहीं आ रहा है सिक्का : बाजार में सिक्का की प्रचुरता का असर भी हुआ. सिक्का की अधिकता के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से बोकारो के विभिन्न बैंक को सिक्का देना बंद हो गया है. बावजूद इसके सिक्का की समस्या से दुकानदार त्रस्त हैं. खास कर पेट्रोल पंप व छोटे दुकानदार को सिक्का की समस्या से हर दिन परेशान होना पड़ रहा है. शहर में ऐसे कई दुकानदार हैं, जिनके पास लाखों का सिक्का जमा हो गया है.
05-10 तो ठीक है, एक का सिक्का सबसे बड़ा जंजाल : सिक्का समस्या का भी वर्गीकरण हो गया है. मतलब, सब सिक्का से बराबर परेशानी नहीं है. दुकानदार को सबसे ज्यादा परेशानी एक रुपये के छोटे सिक्के से है. एक रुपया का छोटा सिक्का ग्राहक लेने से साफ इंकार कर रहे हैं. इसी से ज्यादा परेशानी हो रही है. दुकानदारों की माने तो थोड़ी बात करने के बाद 05-10 रुपया का सिक्का ग्राहक स्वीकार कर लेते हैं. लेकिन, एक रुपये का सिक्का लेने के लिए किसी हाल में तैयार नहीं होते हैं.
बैंक का दावा : नियम मुताबिक सिक्का लिया जा रहा है
एसबीआइ की सभी शाखा में आरबीआइ के गाइड लाइंस के अनुसार सिक्का जमा किया जा रहा है. ग्राहकों को सुविधा दी जा रही है. लोगों को भी सिक्का स्वीकार करना चाहिए. ग्राहकों को जागरूक करने के संबंध में बैंक लगातार कोशिश कर रहा है.
रंजीता शरण सिंह, रिजनल मैनेजर, आरबीओ- एसबीआई, बोकारो
सिक्का को लेकर शाखा को खास निर्देश दिया गया है. हर ग्राहक को सुविधा दी जा रही है. नियम के अनुसार सिक्का जमा हो रहा है. अभी तक सिक्का के संबंध में किसी ग्राहक ने शिकायत नहीं की है. बावजूद इसके अगर कोई शिकायत आती है, तो निवारण किया जायेगा.
पवन सिंह, सर्किल हेड, पीएनबी- बोकारो सर्किल
केस स्टडी 01 : सेक्टर 05 स्थित एचपी का पेट्रोल पंप : पंप में पेट्रोल भरवाने के लिए एक बाइक सवार आया. 60 रुपया का तेल भरवा कर 100 रुपया का नोट फ्यूल मैन को दिया. इसके बाद जब फ्यूल मैन ने 10 रुपया का 04 सिक्का वापस किया, तो बाइक सवार ने लेने से इन्कार कर दिया. फ्यूल मैन की माने तो ऐसी समस्या हर दिन आती है. ग्राहक सिक्का लेने से इन्कार कर देते हैं, जबकि हमें ग्राहकों से सिक्का स्वीकार करना पड़ता है. संचालक प्रशांत पुष्कर की माने तो बैंक को सिक्का के लिए अतिरिक्त काउंटर शुरू करना चाहिए. 04-05 लाख रुपया का सिक्का जमा हो गया है. इससे व्यवसाय प्रभावित हो रहा है.
केस स्टडी 02 : महावीर चौक, चास स्थित चास जेनरल स्टोर. संचालक अक्षय मिश्रा की माने तो सिक्का संग्रह के कारण व्यवसाय की स्थिति चरमरा गयी है. बैंक भी सिक्का जमा करने को लेकर बहानाबाजी करते हैं. साहूकार भी भारी मात्रा में सिक्का लेने से बचते हैं. इस कारण पैसा रहने के बाद भी व्यवसाय को गति नहीं मिल पा रही है. प्रशासन समय-समय पर सिक्का को लेकर कार्रवाई करता है, लेकिन इस कार्य को ज्यादा तेजी लाने की जरूरत है. एक रुपया का छोटा सिक्का तो ग्राहक लेने के लिए किसी भी हाल में तैयार नहीं होते हैं.
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