सरकार ने दी उद्योग लगाने के लिए जमीन, बना लिया मकान
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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बोकारो : जियाडा के औद्योगिक क्षेत्र में कई आैद्योगिक ईकाईयों के लिए सस्ते दर पर आवंटित भूमि पर मकान बना दिया गया है. कई ईकाई में फैक्टरी छोटी और आवास बड़ा बनाया गया है. जबकि फैक्टरी लगाने के लिए आवंटित भूमि पर आवास बनाने का नियम नहीं है. फैक्टरी में सिर्फ गार्ड आदि के लिए […]
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बोकारो : जियाडा के औद्योगिक क्षेत्र में कई आैद्योगिक ईकाईयों के लिए सस्ते दर पर आवंटित भूमि पर मकान बना दिया गया है. कई ईकाई में फैक्टरी छोटी और आवास बड़ा बनाया गया है. जबकि फैक्टरी लगाने के लिए आवंटित भूमि पर आवास बनाने का नियम नहीं है. फैक्टरी में सिर्फ गार्ड आदि के लिए एक-दो कमरा का निर्माण किया जा सकता है.
जियाडा के रीजनल डायरेक्टर सह डीसी मृत्युंजय कुमार वरणवाल ने मामले पर संज्ञान लेते हुए इस प्रकार की गड़बड़ी करने वालों को चिह्नित करने के लिए कहा है. किस ईकाई को कितनी भूमि आवंटित की गयी है, कितनी भूमि में फैक्टरी और कितनी भूमि में आवास का निर्माण किया गया है, इसकी विस्तृत रिपोर्ट तलब की गयी है.
ऐसे सामने आया मामला : ओरिएंटल इंटरप्राइजेज के मालिक आमोद कुमार सिंह ने कुछ समय पहले जियाडा के रीजनल डायरेक्टर को अपनी ईकाई के लिए आवंटित भूमि पर आवास निर्माण करने की अनुमति मांगी थी. इसके बाद रीजनल डायरेक्टर ने इस मामले में संज्ञान लिया. आवास बनाने की अनुमति के लिए दिये गये आवेदन में उल्लेख किया गया है कि उनके आस-पास के कई ईकाईयों में आवास का निर्माण किया गया है. इसमें आठ कंपनियों के नाम भी लिखा है, जिसमें राय इंजीनियरिंग, गोपाल एंड ब्रदर्स, मिथिलेश इंजीनियरिंग वर्क्स, एचके इंजीनियरिंग वर्क्स, श्री श्री गायत्री स्टील इंडस्ट्रीज, विशाल मैन्युफैक्चरर, संतोष मशिनरी शामिल हैं.
दर्जनों ईकाइयों में बना है आवास
जानकारी के अनुसार प्रक्रम एक और दो की लगभग 75 प्रतिशत ईकाईयों में आवास का निर्माण किया गया है. इसमें ईकाई के संचालक या प्रोपराइटर आदि रहते हैं. आवास निर्माण आदि पर बियाडा के संबंधित पदाधिकारियों ने कोई रोक नहीं नहीं लगायी थी. इसके कारण ईकाई की भूमि पर आवास बन गये.
सस्ते दर पर दी जाती है भूमि
सरकार द्वारा औद्याेगिक ईकाई लगाने और उद्योग को विकसित करने के लिए निर्धारित सरकारी दर से भी कम दर पर जियाडा द्वारा भूमि उपलब्ध करायी जाती है. उद्योग के लिए आवंटित की जाने वाली भूमि का अधिकतम मूल्य 25 से 28 हजार रुपये प्रति डिसमिल है. उद्योग के लिए भूमि आवंटन के साथ-साथ आधारभूत संरचनाओं को भी जियाडा द्वारा विकसित किया जाता है. जैसे रोड, नाली, बिजली व पानी की सुविधाएं आदि.
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