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15 को मनेगी मकर संक्रांति

14 जनवरी को रात्रि आठ बजे से आयेगा मकर राशि का सूर्य 15 जनवरी से उत्तरायण हो जायेंगे भगवान भास्कर बोकारो : मकर राशि का सूर्य 14 जनवरी को रात्रि 8 बजे के बाद से आयेगा. मकर संक्रांति के विषय में धर्म शास्त्र ने यह निर्णय कर रखा है कि सूर्यास्त के बाद किसी भी […]

14 जनवरी को रात्रि आठ बजे से आयेगा मकर राशि का सूर्य

15 जनवरी से उत्तरायण हो जायेंगे भगवान भास्कर
बोकारो : मकर राशि का सूर्य 14 जनवरी को रात्रि 8 बजे के बाद से आयेगा. मकर संक्रांति के विषय में धर्म शास्त्र ने यह निर्णय कर रखा है कि सूर्यास्त के बाद किसी भी समय मकर संक्रांति लगे तो उसका पुण्य काल दूसरे दिन मध्याह्न काल तक रहता है. इस साल मकर संक्रांति, जिसे लोक भाषा में ‘खिचड़ी’ कहते हैं, 15 जनवरी को सभी जगह अपनी-अपनी विविध परंपराओं के साथ मनेगी. यह बातें सेक्टर-1 स्थित श्रीराम मंदिर के ज्योतिषाचार्य पंडित शिव कुमार शास्त्री ने कही.
पंडित शास्त्री ने कहा : गीता में लिखा है कि जो व्यक्ति उत्तरायण में शरीर का त्याग करता है, वह श्रीकृष्ण के परम धाम में निवास करता है. पुराणों में गंगा नदी में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है. इस दिन स्नान-दान करना बड़ा पुण्यदायी होता है. इससे जीवन और आत्मा के कारक सूर्य देव प्रसन्न होते हैं. पवित्र नदी में स्नान कर तिल व गुड़ खाने व दान करने की परंपरा है. तिल का विशेष महत्व होता है. मान्यता है कि इस दिन तिल का दान करने से घर में समृद्धि आती है.
सूर्याय नम: आदित्याय नम: सप्ताचिर्ष नम:… : मकर संक्रांति के अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान कर अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए सूर्य को जल चढाते हुए इस मंत्र का 11 बार उच्चारण करें : सूर्याय नम: आदित्याय नम: सप्ताचिर्ष नम:… अर्घ्य के जल में गुड़ व चावल मिलायें. कंबल, गुड़, तिल, खिचड़ी का दान करना चाहिए. मकर संक्रांति देवताओं का प्रभातकाल है, इसलिए इस दिन स्नान, दान, जप, श्राद्ध व अनुष्ठान का अत्यधिक महत्व है. इस अवसर पर किया गया दान सौ गुना होकर प्राप्त होता है.
खुशी व समृद्धि का त्योहार मकर संक्रांति, सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है. इस वर्ष मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनायी जायेगी. मकर संक्रांति के दिन से ही सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं. धार्मिक महत्व की बात करें तो उत्तरायण के अवधि काल को देवताओं का दिन कहते हैं. मकर संक्रांति को देवताओं का प्रभात काल कहा जाता है. यह पर्व हीं स्नान-दान का है. इस दिन खिचड़ी खाने-खिलाने की धार्मिक परंपरा है.
ज्योतिषाचार्य पंडित शिव कुमार शास्त्री, श्रीराम मंदिर-सेक्टर 1
Prabhat Khabar Digital Desk
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