बोकारो में है ''रसियन कॉलोनी'' व ''सोवियत क्लब''

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बोकारो: रसियन कॉलोनी… सोवियत क्लब… हम रूस देश के किसी कॉलोनी या किसी क्लब की बात नहीं कर रहे हैं. बात हो रही है बोकारो की. जी हां, बोकारो में रसियन कॉलोनी व सोवियत क्लब है. बोकारो स्टील प्लांट के निर्माण के समय दर्जनों रूसी विशेषज्ञ बोकारो आये थे. सेक्टर 4 डी में रसियनों का […]

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बोकारो: रसियन कॉलोनी… सोवियत क्लब… हम रूस देश के किसी कॉलोनी या किसी क्लब की बात नहीं कर रहे हैं. बात हो रही है बोकारो की. जी हां, बोकारो में रसियन कॉलोनी व सोवियत क्लब है. बोकारो स्टील प्लांट के निर्माण के समय दर्जनों रूसी विशेषज्ञ बोकारो आये थे. सेक्टर 4 डी में रसियनों का आशियाना बना ‘रसियन कॉलोनी’. उनके मनोरंजन के लिए क्लब बना ‘सोवियत क्लब’. आज भले ही रूसी विशेषज्ञों की संख्या कम हो गयी हो, लेकिन रसियन कॉलोनी व सोवियत क्लब आज भी सेक्टर 4 डी में रसियनों की याद को ताजा करता रहता है. यहां कुछ रूसी विशेषज्ञ भी हैं, जो बोकारो स्टील प्लांट के विभिन्न विभागों में अलग-अलग पदों पर कार्यरत हैं.
यहां उल्लेखनीय है कि बोकारो स्टील प्लांट की स्थापना के लिये 25 जनवरी 1965 को भारत व तत्कालीन सोवियत सरकार के बीच नयी दिल्ली में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये गये थे़ सोवियत सरकार के सहयोग से संयंत्र में इस्तेमाल के लिए अधिकतर उपकरणों व संरचनाओं का निर्माण भारत में ही किया गया़.
इसी वजह से बोकारो स्टील प्लांट को देश का पहला स्वदेशी स्टील प्लांट भी कहा जाता है. भारत-रूस अपने राजनयिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ मना रहे हैं. इसके तहत बोकारो स्टील प्लांट की ओर से तरह-तरह कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं. ऐसे में रसियन कॉलोनी व सोवियत क्लब के साथ-साथ रूसी विशेषज्ञों की चर्चा समसामयिक है.
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