2030 तक 100% EV पार्ट्स बनाने लगेगा भारत, चुंबक और चिप के लिए चीन-ताइवान का ही सहारा

Edited by Mithilesh Jha
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चिप बनाने वाली फैक्ट्री.

EV Localisation Report: भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मैन्युफैक्चरिंग पर IEEFA और JMK Research की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है. वर्ष 2030 तक बैटरी के अलावा अन्य ईवी कंपोनेंट्स में 90-100 प्रतिशत लोकलाइजेशन तो हासिल हो जायेगा, लेकिन चिप और मैग्नेट के लिए चीन-ताइवान पर निर्भरता भारत का खेल बिगाड़ सकती है. पढ़ें पूरी विशेष रिपोर्ट.

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EV Localisation Report: भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है. वित्तीय वर्ष 2020 के बाद से देश में सालाना ईवी बिक्री में लगभग 14 गुना वृद्धि हुई है. इसी बीच इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस (IEEFA) और जेएमके रिसर्च एंड एनालिटिक्स (JMK Research) की एक रिपोर्ट ‘बियॉन्ड बैटरी पैक्स : लोकलाइजेशन इन मैन्युफैक्चरिंग ईवी कंपोनेंट्स’ आयी है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत वर्ष 2030 तक बैटरी को छोड़कर ईवी के अन्य कई हाई-वैल्यू कंपोनेंट कैटेगरीज में 90 से 100 प्रतिशत तक घरेलू उत्पादन (लोकलाइजेशन) हासिल कर सकता है. यानी आत्मनिर्भर हो सकता है. लेकिन इस बड़ी कामयाबी के बाद भी एक बड़ी चिंता है.

  • विश्व का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाईल मार्केट है भारत
  • 2.56 करोड़ वाहन बिके भारत में वित्त वर्ष 2025 में
  • 6.73 लाख करोड़ रुपए का ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री बना भारत

चीन और ताइवान पर बनी रहेगी निर्भरता

रिपोर्ट के मुख्य लेखक और जेएमके रिसर्च के कंसल्टेंट राहुल माईती के अनुसार, भारत में केवल पार्ट्स को असेंबल कर देना वास्तव में आत्मनिर्भरता नहीं है. अगर कोई कंपोनेंट भारत में असेंबल हो रहा है, तो उसमें लगने वाली जरूरी चीजें जैसे सेमीकंडक्टर (चिप्स), रेयर-अर्थ मैग्नेट्स (दुर्लभ पृथ्वी चुंबक) और एडवांस्ड मटेरियल्स के लिए भारत आज भी पूरी तरह से आयात पर निर्भर है.

इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल के मुख्य कंपोनेंट्स

  1. ट्रैक्शन मोटर
  2. मोटर कंट्रोल
  3. इन्वर्टर
  4. ऑन-बोर्ड चार्जर
  5. डीसी-डीसी कन्वर्टर
  6. वीसीयू
  7. वायरिंग हार्नेस
  8. टीएमएस
  9. चेसिस और ढांचा निर्माण
  10. टेलीमैटिक्स
  11. ऑफ-बोर्ड चार्जर

इन कंपोनेंट्स के निर्माण में पीछे है भारत

  • ट्रैक्शन मोटर
  • मोटर कंट्रोल
  • इन्वर्टर
  • ऑन-बोर्ड चार्जर
  • डीसी-डीसी कन्वर्टर
  • वीसीयू
  • टेलीमैटिक्स
  • ऑफ-बोर्ड चार्जर

इन कंपोनेंट्स के निर्माण में आत्मनिर्भर

  • वायरिंग हार्नेस
  • टीएमएस
  • चेसिस और ढांचा निर्माण

चीन और ताइवान ही बनाते हैं मैग्नेट्स और चिप्स

चौंकाने वाली बात यह है कि ईवी मोटर्स, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और व्हीकल कंट्रोल सिस्टम के लिए बेहद जरूरी इन मैग्नेट्स और चिप्स का वैश्विक उत्पादन मुख्य रूप से चीन और ताइवान में होता है, जो भारत के लिए चिंता का विषय है.

EV Localisation Report: पीएलआई ऑटो स्कीम पर बड़ा खुलासा

रिपोर्ट में भारत सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI Auto) पर एक डेटा साझा किया गया है, जो चिंता को बढ़ाने वाला है. आंकड़ों के मुताबिक, हाल के दिनों में कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को लेकर जितने भी बड़े बिजनेस की घोषणा हुई है, उनमें से करीब 60 प्रतिशत उन कंपनियों द्वारा किये गये हैं, जिन्हें पीएलआई ऑटो स्कीम के तहत मंजूरी मिली हुई है.

25938 करोड़ का 10 फीसदी ही कंपनियों को मिला

इसके बावजूद, वर्ष 2026 की शुरुआत तक इस योजना के तहत उपलब्ध कुल 25,938 करोड़ रुपए (2.98 अरब डॉलर) के फंड में से 10 प्रतिशत से भी कम राशि कंपनियों को दिया गया है. फंड जारी होने में यह सुस्ती घरेलू विनिर्माण की रफ्तार को धीमा कर सकती है.

कहां भारत की पकड़ मजबूत, कहां फोकस की जरूरत?

IEEFA के एनर्जी स्पेशलिस्ट चारित कोंडा और जेएमके के सीनियर कंसल्टेंट प्रभाकर शर्मा कहते हैं कि भारत ने अपने पुराने ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग अनुभव के दम पर स्ट्रक्चरल कंपोनेंट्स, वायरिंग हार्नेस, सस्पेंशन और ब्रेकिंग सिस्टम में नियर-कंप्लीट लोकलाइजेशन हासिल कर लिया है.

ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के लिए जरूरी हैं ये कदम

अगर भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनना है, तो उसे अपनी खुद की स्वदेशी रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) बढ़ानी होगी, कंपोनेंट स्टैंडर्डाइजेशन पर जोर देना होगा और ईवी स्टार्टअप्स को लोकलाइजेशन प्रोग्राम से जोड़ना होगा, ताकि चीन के दबदबे और एकाधिकार को खत्म किया जा सके.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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