अकील ने अपशब्द कहे मैंने कहा- बाहर जाइए: सजल चक्रवर्ती

Updated at : 25 Jun 2014 8:02 AM (IST)
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अकील ने अपशब्द कहे मैंने कहा- बाहर जाइए: सजल चक्रवर्ती

रांची :प्रोजेक्ट भवन स्थित झारखंड सचिवालय में 15 सूत्री कार्यक्रम के क्रियान्वयन पर बुलायी गयी बैठक में देरी को लेकर प्रभारी मुख्य सचिव सजल चक्रवर्ती और पाकुड़ के विधायक अकील अख्तर के बीच विवाद हो गया. दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि विधायक अकील अख्तर और पौलूस सुरीन सचिवालय के बाहर धरने पर […]

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रांची :प्रोजेक्ट भवन स्थित झारखंड सचिवालय में 15 सूत्री कार्यक्रम के क्रियान्वयन पर बुलायी गयी बैठक में देरी को लेकर प्रभारी मुख्य सचिव सजल चक्रवर्ती और पाकुड़ के विधायक अकील अख्तर के बीच विवाद हो गया. दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि विधायक अकील अख्तर और पौलूस सुरीन सचिवालय के बाहर धरने पर बैठ गये. दोनों मुख्यमंत्री से मिल कर बात करने की मांग कर रहे थे.

मुख्य सचिव ने आरोप लगाया है कि वह किसी दूसरी बैठक में व्यस्त थे. सभी सदस्यों के नहीं आने से भी 15 सूत्री कार्यक्रम की बैठक में देर हो रही थी. इस कारण विधायक अकील अख्तर उत्तेजित हो गये. उन्होंने उनके साथ र्दुव्‍यवहार किया, अपशब्द कहें. इस कारण उन्होंने विधायक को बाहर जाने के लिए कह दिया. विधायक अकील अख्तर ने कहा है कि बैठक में देरी होने की बात कहने पर मुख्य सचिव गुस्सा हो गये. अभद्र व्यवहार किया और गेट आउट कह कर हमें बाहर निकाल दिया.

मुख्य सचिव ने की प्रेस कांफ्रेंस : इस पूरी घटना के बाद मुख्य सचिव ने प्रेस कांफ्रेंस कर पत्रकारों को बताया : अल्पसंख्यकों के लिए केंद्र सरकार के सहयोग से चलाये जानेवाले 15 सूत्री कार्यक्रम के क्रियान्वयन को लेकर मंगलवार दिन के तीन बजे बैठक बुलायी गयी थी. बैठक में विधायक अकील अख्तर समेत कई सदस्यों को भी शामिल होना था. इस बीच हाइकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश की तरफ से फोन आया. मुख्य न्यायाधीश ने अदालत से संबंधित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर शाम को बैठक बुला ली. इस बैठक की तैयारी को लेकर विधि सचिव और महाधिवक्ता आरएस मजूमदार को मुख्य सचिव के कांफ्रेंस कक्ष में बुलाया गया. उनके साथ महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा चल रही थी. मुङो बार-बार सूचित किया जा रहा था कि 15 सूत्री कार्यक्रम की बैठक के लिए कौन-कौन आया. बैठक तीन बजे से तय थी, पर विधायक अकील अख्तर 3.16 या 3.17 बजे पहुंचे. उन्हें सम्मान के साथ बैठा कर पानी, चाय और शरबत पिलायी गयी. सभी सदस्यों के नहीं आने से 15 सूत्री कार्यक्रम की बैठक में देर हो रही थी. इधर, कांफ्रेंस हॉल में अदालत से संबंधित मुद्दों पर गंभीर वार्ता चल रही थी. ओएसडी पूजा सिंह के अलावा कई अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे. अचानक मुङो खबर की गयी कि बाहर विधायक अकील अख्तर शोर मचा रहे हैं. इसके बाद मैंने उन्हें कांफ्रेंस हॉल में बुलाया. विधायक अकील अख्तर के साथ विधायक पौलूस सुरीन, जमशेदपुर के इंदरजीत सिंह कालरा और अन्य कई लोग थे.

अपशब्दों का भी इस्तेमाल किया : मुख्य सचिव ने पत्रकारों को बताया : कांफ्रेंस हॉल में विधायक अकील अख्तर और इंदरजीत सिंह कालरा तेज आवाज में बोलने लगे. अपशब्दों का भी इस्तेमाल किया, इस कारण मैंने उन्हें बैठने को नहीं कहा. पर कांफ्रेंस हॉल में मौजूद अन्य अफसर उनसे बैठने के लिए लगातार कह रहे थे. उनसे जितना आग्रह किया जा रहा था, उतना ही वह शोर मचा रहे थे. वह लगातार अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे थे, इससे मेरी सहनशक्ति भी जवाब दे गयी. मैंने उनसे कमरे से बाहर जाने को कहा. मैंने कहा कि चिल्लाना बैठक का एजेंडा नहीं है. बैठक करनी हो, तो करिए, वरना आप लोग जा सकते हैं. वैसे भी, 15 सूत्री कार्यक्रम की बैठक में केंद्र सरकार के प्रतिनिधि का होना अनिवार्य होता है. दुर्भाग्य से बैठक में शामिल होने के लिए केंद्र सरकार के प्रतिनिधि भी नहीं पहुंचे थे. ऐसे में बैठक स्थगित होनी ही थी.

व्यवहार निंदनीय था : मुख्य सचिव ने बताया : विधायक अकील अख्तर और इंदरजीत सिंह कालरा की ओर से कहे गये अपशब्दों के कारण मुङो गुस्सा आ गया. इसके बावजूद मैं अपनी ओर से कहे हर बात की जिम्मेदारी लेता हूं. मैं समझता हूं कि विधायक का व्यवहार निंदनीय था. घटना के तुरंत बाद मैंने झारखंड विधानसभा के स्पीकर को इसकी जानकारी दी. उन्हें बताया कि दो विधायकों ने मेरे साथ गाली- गलौज किया है. इस वजह से मैंने उनको बाहर जाने को कहा.

गिर रहा है अफसरों का मनोबल : मुख्य सचिव ने कहा : राज्य में इस तरह की घटनाएं बार-बार हो रही हैं. इससे अफसरों का मनोबल लगातार गिर रहा है. अफसर जनप्रतिनिधियों के साथ पूरे सम्मान से पेश आयें. पर जब बार-बार जनप्रतिनिधि अभद्र व्यवहार करें, तो अफसर भी पीछे नहीं हटें. यह पूछे जाने पर कि आपने इस घटना को लेकर प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं करायी, उन्होंने कहा : मैं समझता हूं कि पुलिस के पास इससे ज्यादा जरूरी कई काम हैं. मैं पुलिस पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालना चाहता हूं. हां, मामले की शिकायत संविधान के दायरे में रह कर करूंगा. राज्यपाल, स्पीकर और मुख्यमंत्री को घटना की पूरी जानकारी देकर उनसे न्याय मांगूंगा.

हमारा मान-सम्मान बरकरार रखना सरकार का काम : उन्होंने कहा : आइएएस अधिकारी सिविल अफसर होते हैं. हमें बंदूक नहीं दी जाती है. हमारा मान-सम्मान बरकरार रखना सरकार का काम है. बतौर मुख्य सचिव नहीं, बल्कि एक आइएएस अफसर के तौर पर मैं घटना की पूरी जानकारी सरकार को दूंगा. एक जनप्रतिनिधि को किसी के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने का कोई अधिकार नहीं है. मैं उम्मीद करता हूं कि मामले में संवैधानिक शक्तियां संज्ञान लेकर उचित कदम उठायेंगी. यह पूछे जाने पर कि अगर विधायक उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत करें, तो वह क्या करेंगे, मुख्य सचिव ने कहा : जांच में पुलिस को पूरी तरह सहयोग करेंगे.

सीएम पहुंचे, दो दिन में कार्रवाई का आश्वासन

रात 10.30 बजे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विधायक अकील अख्तर और पौलूस सुरीन को मनाने प्रोजेक्ट भवन गये. अपने कार्यालय में दोनों से करीब 45 मिनट तक बात की. रात 11.15 बजे सीएम के साथ विधायक प्रोजेक्ट भवन से बाहर निकले. सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने विधायकों को आश्वासन दिया है कि दो दिनों के अंदर मामले की जांच करा कर कार्रवाई करेंगे. सीएम ने विधायकों को आश्वस्त किया है कि विधायिका कभी कमजोर नहीं होती. वह सीसीटीवी फुटेज भी देखेंगे.

इसके बाद विधायक मान गये. इसके पूर्व शाम 7.30 बजे सीएम के दूत बन कर मंत्री हाजी हुसैन अंसारी व मुख्यमंत्री के सलाहकार हिमांशु शेखर चौधरी भी प्रोजेक्ट भवन गये थे.

गेट आउट बोले सीएस : अकील अख्तर

रांची : पाकुड़ के विधायक अकील अख्तर ने कहा : झारखंड में 15 सूत्री कार्यक्रम में कोई काम नहीं हो रहा है. पिछले पांच साल में सिर्फ दो बैठकें हुई हैं. मंगलवार को तीसरी बैठक बुलायी गयी थी. मैं बैठक के लिए निर्धारित समय तीन बजे से पहले ही आ गया था. हमें काफी देर बाहर बैठाये रखा गया. इसके बाद कार्यक्रम के सदस्य इंद्रजीत सिंह कालरा हमलोगों को बुला कर अंदर ले गये. उन्होंने मुख्य सचिव को कहा कि हम लोग बाहर से बैठक में शामिल होने आये हैं. सभी को जरूरी काम है. बैठक जल्दी कर ली जाये. मैंने भी बैठक में देर होने पर नाराजगी जतायी. देर करनेवाली बात ही तीन से चार बार हुई होगी. इतनी सी बात पर मुख्य सचिव गुस्सा हो गये. बिना बात हमारे साथ अभद्र व्यवहार किया. गेट आउट कह कर हमें बाहर निकाल दिया. इसके बाद हम बाहर आ गये.

विधायक अकील अख्तर ने कहा कि सीसीटीवी से जांच होनी चाहिए कि किसने गलती की है. यदि उनकी गलती है और सीएम कहेंगे तो वह सीएस से पैर पकड़ कर माफी मांग सकते हैं.

विधायक अकील अख्तर ने कहा कि इसके पहले भी दो बार बैठक बुला कर स्थगित की जा चुकी थी. पहली बार 13 जून को बैठक होनी थी, लेकिन सीएस की तबीयत खराब होने के कारण स्थगित कर दी गयी. फिर 23 जून को बैठक रखी गयी. इस बार रांची में मेयर चुनाव के कारण स्थगित कर दी गयी. तीसरी बार 24 जून को बैठक रखी गयी. मैं तीनों दिन बैठक में शामिल होने आ गया.

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