रांची : बैंक अफसरों ने सरावगी बंधुओं के कारनामे छुपाये

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 Jan 2019 1:48 AM

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शकील अख्तर, रांची : सरावगी बंधुओं द्वारा अलग-अलग कंपनियों के नाम पर कर्ज लेने के लिए की गयी जालसाजी पर बैंक अधिकारियों ने एक साल से अधिक समय तक पर्दा डाल रखा था. वर्ष 2017 में ही बैंक के वरीय अधिकारी आरके सिंह द्वारा की गयी जांच के दौरान ही सरावगी बंधुओं के कारनामे का […]

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शकील अख्तर, रांची : सरावगी बंधुओं द्वारा अलग-अलग कंपनियों के नाम पर कर्ज लेने के लिए की गयी जालसाजी पर बैंक अधिकारियों ने एक साल से अधिक समय तक पर्दा डाल रखा था. वर्ष 2017 में ही बैंक के वरीय अधिकारी आरके सिंह द्वारा की गयी जांच के दौरान ही सरावगी बंधुओं के कारनामे का खुलासा हो चुका था.
कई बैंक अधिकारियों ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने के बदले पूरे मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की. हालांकि सीबीआइ ने अपने स्रोतों से सबूत जुटाने के बाद प्राथमिकी दर्ज की.
सरावगी बंधुओं द्वारा बैंक ऑफ इंडिया की विभिन्न शाखाओं से कर्ज लेने के लिए की गयी गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर वर्ष 2017 में इसकी जांच करायी गयी थी. इसमें पाया गया था कि सरावगी बंधुओं ने अपने कर्मचारियों को कर्ज लेने के लिए गारंटर बना दिया था. 6000-7000 रुपये वेतन वाले कर्मचारियों रमेश शर्मा व अन्य को करोड़ रुपये के कर्ज के लिए गारंटर बनाया गया था.
गारंटर बनाने के लिए बैंक अधिकारियों ने साजिश रच कर इन कर्मचारियों की हैसियत करोड़ों में आंकी थी. गारंटर बनाने के लिए सरावगी बंधुओं ने पावर ऑफ एटर्नी के सहारे अपने कर्मचारियों केे पास फ्लैट का मालिकाना हक दिखाया.
कैश मार्जिन के रूप में कर्ज के रूप में स्वीकृत रकम में से ही काट कर फिक्स डिपोजिट किया गया, जो सरासर गलत था. सिर्फ इतना ही नहीं पश्चिम बंगाल के वैसे लोगों को भी गारंटर बनाया गया, जिनके साथ उनका न तो कोई व्यापारिक संबंध था और न ही पारिवारिक.
एक ही फ्लैट को कई कंपनियों के नाम पर गिरवी रखा : बैंक अधिकारी आरके सिंह द्वारा की गयी जांच रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख किया गया था कि बैंक अधिकारियों के साथ मिल कर एक ही फ्लैट को कई कंपनियों के नाम पर कर्ज लेने के लिए गिरवी रखा गया था.
बैंक ऑफ इंडिया की लालपुर शाखा से बद्री केदार उद्योग के नाम पर 15 करोड़ रुपये कर्ज देने से पहले हुई जांच पड़ताल में कई गड़बड़ियां सामने आयीं थीं. इसके बावजूद बैंक के तत्कालीन अधिकारियों ने इस कंपनी को कर्ज दिया.
बैंक से कर्ज लेने के लिए सरावगी बंधुओं द्वारा की गयी जालसाजी का पता चलने के बाद भी बैंक अधिकारियों द्वारा खुद ही इन मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराने का प्रावधान है. पर सरावगी बंधुओं के साथ साजिश में शामिल बैंक अधिकारी प्राथमिकी दर्ज कराने के बदले आरके सिंह की रिपोर्ट पर पर्दा डालने की कोशिश में जुटे रहे.
6000-7000 रुपये पगारवाले कर्मचारियों रमेश शर्मा व अन्य को करोड़ रुपये के कर्ज के लिए गारंटर बनाया गया था
गारंटर बनाने के लिए बैंक अधिकारियों ने साजिश रच कर इन कर्मचारियों की हैसियत करोड़ों में आंकी थी
गारंटर बनाने के लिए सरावगी बंधुओं ने पावर ऑफ एटर्नी के सहारे कर्मचारियों केे पास फ्लैट का मालिकाना हक दिखाया
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