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Updated at : 01 Jul 2018 4:45 AM (IST)
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डॉ सुभाष की प्रतिमा हजारीबाग में लगेगी हजारीबाग : भारत में आइवीएफ प्रणाली (टेस्ट ट्यूब बेबी) के जनक डॉ सुभाष मुखाेपाध्याय की प्रतिमा हजारीबाग सदर अस्पताल परिसर में लगायी जायेगी. यह निर्णय हजारीबाग के उपायुक्त रवि शंकर शुक्ल ने लिया है. उन्हाेंने बताया कि डॉ सुभाष मुखाेपाध्याय का जन्म हजारीबाग में हुआ था, इसलिए उनकी […]
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डॉ सुभाष की प्रतिमा हजारीबाग में लगेगी
हजारीबाग : भारत में आइवीएफ प्रणाली (टेस्ट ट्यूब बेबी) के जनक डॉ सुभाष मुखाेपाध्याय की प्रतिमा हजारीबाग सदर अस्पताल परिसर में लगायी जायेगी. यह निर्णय हजारीबाग के उपायुक्त रवि शंकर शुक्ल ने लिया है. उन्हाेंने बताया कि डॉ सुभाष मुखाेपाध्याय का जन्म हजारीबाग में हुआ था, इसलिए उनकी याद काे जिंदा रखने के लिए, उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए आैर झारखंड के युवाआें का मनाेबल बढ़ाने के लिए हजारीबाग में उनकी प्रतिमा लगायी जायेगी. इससे युवाआें काे प्रेरणा मिलती रहेगी. हजारीबाग आैर झारखंड के लाेगाें काे यह प्रतिमा याद दिलाती रहेगी कि यह महान चिकित्सक-वैज्ञानिक झारखंड की माटी का था. श्री शुक्ल ने कहा कि डॉ सुभाष पर देश आैर झारखंड काे नाज है जिन्हाेंने देश में पहली बार आइवीएफ प्रणाली से एक बेबी का जन्म कराया था.
डॉ सुभाष की प्रतिमा…
डॉ सुभाष दुनिया के दूसरे चिकित्सक थे जिन्हाेंने यह उपलब्धि हासिल की थी. डॉ सुभाष की प्रतिमा लगाने के लिए कई सामाजिक संगठनाें, हजारीबाग की जनता, यहां के चिकित्सक, व्यापारी संघ, बंगाली एसाेसिएशन, जनप्रतिनिधियाें आैर बुद्धिजीवियाें ने उपायुक्त से मांग की थी, जिसे उन्हाेंने पूरा कर दिया है.
ज्ञातव्य है कि डॉ सुभाष मुखाेपाध्याय का बचपन हजारीबाग के बॉडम बाजार में ही बीता था. एमबीबीएस करने के लिए वे काेलकाता चले गये थे आैर बाद में वहीं शाेध कार्य में जुट गये थे. उन्हाेंने 1978 में देश में पहली बार आइवीएफ प्रणाली से एक बेबी का जन्म कराया था, जिसे उस समय मान्यता नहीं मिली थी. उनके शाेध कार्य का मजाक उड़ाया गया था. उनके खिलाफ जांच कमेटी बना दी गयी. डॉ सुभाष काे इतना प्रताड़ित किया गया कि तंग आ कर उन्हाेंने 1982 में आत्महत्या कर ली थी. जिस दिन डॉ सुभाष मुखाेपाध्याय ने पहली टेस्ट ट्यूब बेबी का जन्म कराया था, उससे लगभग दाे माह पहले दुनिया की पहली टेस्ट ट्यूब बेबी का जन्म इंग्लैंड में हुआ था आैर इसके लिए वहां के चिकित्सक काे नाेबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था. डॉ सुभाष काे न्याय मिलने में काफी विलंब हुआ. निधन के लगभग 16 साल बाद देश ने स्वीकार किया कि पहले टेस्ट ट्यूब बेबी के जनक डॉ सुभाष मुखाेपाध्याय ही थे. उनके शाेध काे मान्यता दी गयी लेकिन इस महान चिकित्सक काे झारखंड आैर देश में वह स्थान नहीं मिल सका जिसके वे हकदार थे. प्रभात खबर ने यह रिपाेर्ट प्रकाशित की कि डॉ सुभाष झारखंड के थे, यहां उनका जन्म हुआ था आैर उन्हें सम्मान देने के लिए हजारीबाग में अभियान भी चलाया. हजारीबाग में लगनेवाली डॉ सुभाष की प्रतिमा देश में उनकी पहली प्रतिमा हाेगी. इसकी पहल हजारीबाग के उपायुक्त रवि शंकर शुक्ल ने की है. हाल ही में बंगाल में उनपर डाक टिकट जारी किया गया है.
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