Iran Election: ईरान में 28 जून को होंगे इलेक्शन, जानिए कैसे होता है राष्ट्रपति चुनाव, कैसे चुने जाते हैं उम्मीदवार

Published by : Pritish Sahay Updated At : 21 May 2024 4:57 PM

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Iran Election| PTI

Iran Election: ईरान में हर 4 साल में राष्ट्रपति के लिए चुनाव होता है. इससे पहले 2021 में ईरान में चुनाव हुआ था. जिसके रईसी की जीत हुई थी. ऐसे में अगला राष्ट्रपति चुनाव 2025 में प्रस्तावित था. हालांकि इब्राहिम रईसी के आकस्मिक निधन के कारण अब यह चुनाव 2024 में ही होगा.

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Iran Election: रविवार को हुए एक हेलिकॉप्टर हादसे में ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी का निधन हो गया. उनके निधन पर भारत समेत दुनिया के कई देशों ने दुख जाहिर किया है. भारत ने तो एक दिन का राजकीय शोक घोषित कर दिया. वहीं, ईरान में रईसी के निधन के बाद मोहम्मद मोखबर को कार्यवाहक राष्ट्रपति नियुक्त किया गया है. दरअसल ईरान के संविधान के मुताबिक, अगर पद पर रहते हुए किसी ईरानी राष्ट्रपति की मौत होती है तो सबसे पहले शासन चलाने के लिए उपराष्ट्रपति को कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में पद संभालना पड़ता है. ईरान में राष्ट्रपति चुनाव से पहले वह लगभग 50 दिन तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में सेवा दे सकते हैं.

28 जून को होंगे ईरान में राष्ट्रपति चुनाव
ईरान का राजनीतिक ढांचा बहुत अलग और दिलचस्प है. यहां सुप्रीम लीडर ही सर्वेसर्वा होता है. ईरान में अभी अयातुल्ला अली खामेनेई सुप्रीम लीडर हैं. इसके बाद ईरान में दूसरा सबसे ताकतवर शख्स राष्ट्रपति होता है, हालांकि राष्ट्रपति की शक्तियां बहुत सीमित होती हैं. ईरान में राजनीतिक समेत सभी अहम कामों के लिए गार्जियन काउंसिल का पूरा दखल होता है. रईसी की मौत हो जाने के बाद साफ हो गया है कि ईरान में अब चुनावी होगा. चूंकि कार्यवाहक राष्ट्रपति महज 50 दिन ही राष्ट्रपति की भूमिका निभा सकता है तो ऐसे में तय है कि 28 जून तक ईरान में राष्ट्रपति का चुनाव हो जाएगा.

ईरान में राष्ट्रपति पद का चुनाव
ईरान में हर 4 साल में राष्ट्रपति के लिए चुनाव होता है. इससे पहले 2021 में ईरान में चुनाव हुआ था. जिसके रईसी की जीत हुई थी. ऐसे में अगला राष्ट्रपति चुनाव 2025 में प्रस्तावित था. हालांकि इब्राहिम रईसी के आकस्मिक निधन के कारण अब यह चुनाव 2024 में ही होगा. ईरान में चुनाव कराने के लिए कोई चुनाव आयोग जैसी संस्था नहीं है. यहां गार्डियन काउंसिल चुनाव कराती है. पूरी चुनावी प्रक्रिया सुप्रीम लीडर की देखरेख में होता है. इसके तहत 6 इस्लामी जजों और 6 वरिष्ठ मौलवियों का एक पैनल होता है. जो चुनावी कार्यों को देखता है. इसके अलावा सुप्रीम लीडर के हस्ताक्षर के बाद ही चुनाव में जीत हासिल करने वाले नेता को राष्ट्रपति नियुक्त किया जाता है.

 
सुप्रीम लीडर के बिना पत्ता भी नहीं हिलता
ईरान का जो सुप्रीम लीडर होता है वो सर्वेसर्वा होता है. उसकी मर्जी से ही सब कुछ तय होता है. ईरान में गर देश की तरह राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति होते हैं. लेकिन वहीं का सबसे ज्यादा शक्तिशाली शख्स सुप्रीम लीडर होता है. सुप्रीम लीडर के पास ही कंट्रोलिंग पावर होती है. राष्ट्रपति पद के चुनाव में कौन उम्मीदवार होता इसका भी तय सुप्रीम लीडर के मुहर के बाद होता है. इसके लिए ईरान एक काउंसिल ऑफ गार्जियन होता है. राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार को काउंसिल ऑफ गार्डियंस ही अप्रूव करता है. 

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लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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