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Gujarat Election: गुजरात में फिर खिलेगा कमल या AAP करेगी कमाल, इस समुदाय पर टिकी है सबकी निगाहें

Updated at : 10 Oct 2022 8:59 AM (IST)
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Gujarat Election: गुजरात में फिर खिलेगा कमल या AAP करेगी कमाल, इस समुदाय पर टिकी है सबकी निगाहें

Gujarat Election: बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृहराज्य में अपनी 27 सालों से जारी सत्ता बरकरार रखना चाहती है. वहीं, कांग्रेस राज्य में पिछले करीब 3 दशक से सत्ता से बाहर है. इस बार वो जीत की उम्मीद लगाये बैठी है. इधर आम आदमी पार्टी भी गुजरात में जीत का सपना देख रही है.

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Gujarat Election: गुजरात चुनाव की घड़ियां जैसे-जैसे नजदीक आती जा रही हैं, राजनीतिक दल सियासी बिसात पर मोहरे सेट करने में जुटने लगे हैं. बीजेपी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी गुजरात जीतने में जी जान से लगे हैं. हर दल ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपनी ओर रिझाने में लगा है. दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल लगातार गुजरात का दौरा कर रहे है. भारी सौगातों के साथ पीएम मोदी भी गुजरात दौरे पर हैं.

गुजरात की जनता ने मेरी जाति देखे बिना मुझे आशीर्वाद दिया- पीएम मोदी:  
 पीएम मोदी फिलहाल गुजरात दौरे पर हैं. यहां पीएम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि गुजरात की जनता उनकी जाति और राजनीतिक पृष्ठभूमि को देखे बिना उन्हें पिछले दो दशक से आशीर्वाद देती आ रही है और उन पर भरोसा जताया है.  पीएम मोदी ने कहा कि राज्य के लोगों के आशीर्वाद ने उन्हें, उनके लिए काम करने की प्रेरणा और शक्ति दी और यह लगातार आगे बढ़ रहा है. अपने गुजरात दौरे के दौरान प्रधानमंत्री 14,600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन कर रहे हैं.

काफी अहम है गुजरात चुनाव: गौरतलब है कि इस बार गुजरात चुनाव राजनीतिक दलों के लिए काफी अहम है. बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृहराज्य में अपनी 27 सालों से जारी सत्ता बरकरार रखना चाहती है. वहीं, कांग्रेस राज्य में पिछले करीब 3 दशक से सत्ता से बाहर है. इस बार वो जीत की उम्मीद लगाये बैठी है. इधर आम आदमी पार्टी भी गुजरात में जीत का सपना देख रही है. दिल्ली के सीएम और आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल लगातार दौरा कर रहे हैं. ऐसे में इस बार गुजरात में त्रिकोणीय मुकाबला होने के पूरे आसार है.

आदिवासी वोटरों पर टिकी है सबकी नजर: गुजरात चुनाव में हर राजनीतिक दल की नजर आदिवासी वोटों पर टिकी है. दरअसल, गुजरात में इनकी संख्या करीब 15 फीसदी है. जो चुनाव में गेम चेंजर साबित हो सकते हैं.  हालांकि, ये आदिवासी समुदाय के लोग कांग्रेस पार्टी के पारंपरिक वोटर्स रहे हैं. लेकिन अब इनके वोटों में बीजेपी की सेंधमारी भी दिखने लगी है. वहीं, आम आदमी पार्टी भी इन्हें रिझाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही.

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Pritish Sahay

लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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