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दिल्ली जल बोर्ड हिंसा मामले में उपाध्यक्ष राघव चड्ढा ने की जांच की मांग, मजिस्ट्रेट कोर्ट का खटखटाया दरवाजा

दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष राघव चड्ढा ने दिल्ली जल बोर्ड हिंसा मामले में जांच की निगरानी के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है. न्यायलय में भाजपा दिल्ली अध्यक्ष आदेश गुप्ता, योगेंद्र चंदौलिया, विकास तंवर सहित अन्य भाजपा के नेताओं के खिलाफ धारा एस 156(3) के तहत याचिका दायर की गई है.

दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष राघव चड्ढा ने दिल्ली जल बोर्ड हिंसा मामले में जांच की निगरानी के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है. न्यायलय में भाजपा दिल्ली अध्यक्ष आदेश गुप्ता, योगेंद्र चंदौलिया, विकास तंवर सहित अन्य भाजपा के नेताओं के खिलाफ धारा एस 156(3) के तहत याचिका दायर की गई है. याचिका में मामले की एफआईआर महामारी संबंधी अधिनियम के तहत दर्ज करने और प्रभावी जांच के लिए निगरानी करने का आग्रह किया.

अदालत ने आज पहली सुनवाई करते हुए देशबंधु गुप्ता रोड के एसएचओ को इस मामले की वर्तमान स्थिति और कार्रवाई की रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है. हिंसा मामले के कोर्ट में जाने से पहले दिल्ली पुलिस के अधिकारियों की मौजूदगी में वरुणालय, झंडेवाला स्थित दिल्ली जल बोर्ड मुख्यालय में हिंसा की घटना को अंजाम दिया गया.

मामले की आश्चर्यजनक रूप से ठीक जांच नहीं होने पर राघव चड्ढा ने वकील प्रशांत मनचंदा के जरिए कोर्ट में धारा 156 (3) के तहत आवेदन कर पुलिस अधिकारियों की ओर से की जा रही जांच में हस्तक्षेप और निगरानी करने का आग्रह किया है.

न्यायालय में जांच की निगरानी के लिए दाखिल की गई याचिका में कहा गया है कि दिल्ली जल बोर्ड मुख्यालय में दिन में भयानक तरीके से दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता, योगेंद्र चंडालिया, भाजपा करोल बाग उपाध्यक्ष रवि तंवर, विकास तंवर सहित करीब 250 बीजेपी कार्यकर्ताओं की ओर से कई बार हिंसा की गई.

याचिका में आगे कहा गया है कि दिल्ली पुलिस की निष्क्रियता के कारण हिंसा की घटना बढ़ गई थी. दिल्ली पुलिस मूक दर्शक की तरह खड़ी रही जबकि दंगाई भीड़ तबाही मचाती रही और दिल्ली जल बोर्ड मुख्यालय को नुकसान पहुंचाती रही.

दिल्ली जल बोर्ड की सार्वजनिक संपत्ति को बुरी तरह से नुकसान पहुंचाया गया, जो कि राज्य की संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और अधिकारियों के कर्तव्यों के निर्वहन में पूरी बाधा डालना है. इसके अलावा पुलिस अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण आज तक अपराधियों को पहचान करने के लिए नहीं बुलाया गया है.

इस प्रकार से धारा एस 156 (3) के तहत आवेदन कर भविष्य में निष्पक्ष जांच के लिए अदालत के जरिए निगरानी की मांग की गई है. एसएचओ को अदालत ने 15 फरवरी 2021 तक रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं.

Posted by: Pritish Sahay

Prabhat Khabar Digital Desk
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