वैशाली में शराब पार्टी के बाद बिगड़ी युवक की तबीयत, पिता ने लगाया डॉक्टरों पर ये आरोप

वैशाली जिले में शराबबंदी के बावजूद लोगों की आदत है कि बदल नहीं रही है. इस जानलेवा आदत के कारण एक युवक जिंदगी का जंग लड़ रहा है. बुधवार की रात शराब पार्टी में शामिल युवक की तबीयत गुरुवार की सुबह अचानक बिगड़ गयी. परिजनों ने तत्काल उसे ईलाज के लिए वैशाली के प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती कराया है.
हाजीपुर. वैशाली जिले में शराबबंदी के बावजूद लोगों की आदत है कि बदल नहीं रही है. इस जानलेवा आदत के कारण एक युवक जिंदगी का जंग लड़ रहा है. बुधवार की रात शराब पार्टी में शामिल युवक की तबीयत गुरुवार की सुबह अचानक बिगड़ गयी. परिजनों ने तत्काल उसे ईलाज के लिए वैशाली के प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती कराया है. बीमार युवक का नाम रजनीश कुमार है और वो मुजफ्फरपुर में रहकर पढ़ाई करता है. स्कूल और कोचिंग बंद होने के कारण वो अपने घर वैशाली आया हुआ था. परिजनों का कहना है कि यहां दोस्तों के साथ मिलकर उसने शराब पार्टी की थी. इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी.
रजनीश कुमार की तबीयत बिगड़ता देख परिजन पहले उसे महुआ अनुमंडलीय अस्पताल ले गये, जहां डॉक्टर ने उसकी गंभीर हालत बता हाजीपुर सदर अस्पताल रेफर कर दिया. डॉक्टर ने सरकारी पुर्जे पर अल्कोहल प्वाइजनिंग सस्पेक्टेड लिखा है. इसके बाद आनन-फानन में रजनीश के पिता डॉ. महेश दास उसे लेकर हाजीपुर सदर अस्पताल पहुंचे. वहां पुरजे पर अल्कोहल सस्पेक्टेड पॉइजनिंग लिखा देख डॉक्टरों ने सीधा पटना रेफर कर दिया. इधर, रजनीश की हालत लगतार गंभीर होती जा रही थी. परिजनों ने उसे वैशाली के एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया है, जहां उसका ईलाज चल रहा है. अस्पताल में भर्ती होते वक्त भी रजनीश नशे की हालत में था. इस दौरान उसने अपने हाथ को भी कई जगह ब्लेड से काटने का प्रयास किया. अस्पताल की बेड में रजनीश के हाथ-पैर को बांध कर रखा गया है, ताकि वो खुद को नुकसान ना पहुंचाये.

रजनीश के पिता डॉक्टर महेश दास ने बताया कि वो गौरौल थाना क्षेत्र के रहनेवाले हैं. उनका कहना है कि बेटे ने शराब पी रखी थी. अत्यधिक शराब पीने के कारण उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गयी और वह बेहोश हो गया. आनन-फानन में एम्बुलेंस के माध्यम से उसे महुआ अनुमंडलीय अस्पताल ले गये. महेश दास का आरोप है कि महुआ अनुमंडलीय अस्पताल के डॉक्टरों ने उनके बेटे का इलाज नहीं किया. उसे हाजीपुर सदर अस्पताल रेफर कर दिया. जब वे उसे लेकर हाजीपुर सदर अस्पताल गये, तो वहां भी किसी ने नहीं छुआ. थक हारकर उन्होंने वैशाली के एक निजी अस्पताल में बेटे को भर्ती कराया. जहां उसका इलाज जारी है. जब उनसे पूछा गया कि शराबबंदी के बावजूद उनके बेटे ने शराब पीने का काम क्यों किया तो वो बिना कुछ कहे चले गये.
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