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वायरल ने बदली चाल: ठंड लगकर आ रहा बुखार, सर्दी के साथ खांसते-खांसते लोग हो रहे परेशान

Updated at : 10 Aug 2023 11:00 PM (IST)
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वायरल ने बदली चाल: ठंड लगकर आ रहा बुखार, सर्दी के साथ खांसते-खांसते लोग हो रहे परेशान

इस मौसम में वायरल संक्रमण फैल रहा है, इस बार ठंड लगकर तेज बुखार आ रहा है. इसके अलावा लगातार छींक, नाक से पानी गिरने के साथ मांसपेशियों, जोड़ो व आंखों में भी दर्द सता रहा है. सामान्य तौर पर तीन से चार दिन में ठीक होने वाला वायरल बुखार पांच से सात दिन तक चल रहा है.

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पटना. आई फ्लू के साथ-साथ इन दिनों मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ या है. डॉक्टरों के अनुसार बारिश का दौर है. कभी तेज धूप है तो कभी बूंदाबांदी. इस मौसम में वायरल संक्रमण फैल रहा है, इस बार ठंड लगकर तेज बुखार आ रहा है. इसके अलावा लगातार छींक, नाक से पानी गिरने के साथ मांसपेशियों, जोड़ो व आंखों में भी दर्द सता रहा है. सामान्य तौर पर तीन से चार दिन में ठीक होने वाला वायरल बुखार पांच से सात दिन तक चल रहा है. सर्दी, जुकाम, बुखार के मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. बीते पांच दिन के अंदर शहर के पीएमसीएच व आइजीआइएमएस में 150 से 200 तक इस तरह के मरीज बढ़े हैं.

उमस में बैक्टीरिया व वायरस के पनपने से बढ़ा खतरा

आंकड़ों के अनुसार शहर के पीएमसीएच व आइजीआइएमएस के मेडिसिन विभाग में एक सप्ताह पहले वायरल के 70 से 80 मरीज इलाज कराने पहुंचे थे. लेकिन अब पीएमसीएच में वायरस से पीड़ित 140 से 150 मरीज रोजाना पहुंच रहे हैं तो आइजीआइएमएस में भी रोजाना करीब 210 व गार्डिनर में 50 मरीज वायरल बीमारी के चिह्नित किये जा रहे हैं. इलाज कर रहे विशेषज्ञ डॉक्टरों के अनुसार इस मौसम में उमस में बैक्टीरिया व वायरस के पनपने से खतरा बढ़ जाता है. यही वजह है कि ओपीडी में मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं.

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8 से 10 दिन बाद भी ठीक नहीं हो रही है खांसी

वायरस पीड़ित लोगों को जोड़ों में दर्द के साथ पेट दर्द, उलटी व आंखों के पीछे दर्द भी सता रहा है, लेकिन यह दो दिन में ठीक हो जा रहा है. लेकिन खांसी आठ से 10 दिन बाद भी ठीक नहीं हो रही है. वहीं वायरल के लक्षण कोरोना व डेंगू जैसे होने की वजह से लोग एहतियातन एंटीजन और डेंगू जांच भी करा रहे हैं. राहत की बात ये है कि करीब 99 प्रतिशत की रिपोर्ट निगेटिव आ रही है. इसके अलावा ओपीडी में हाइग्रेड फीवर की शिकायत के साथ ओपीडी में आ रहे मरीजों की डॉक्टर ब्लड जांच कर बीमारी की पुष्टि कर रहे हैं.

क्या कहते हैं फिजिशियन

गार्डिनर रोड अस्पताल के अधीक्षक डॉ मनोज कुमार सिन्हा कि इस समय इलाज संग खानपान में सुधार की जरूरत है. विटामिन सी के श्रोत वाले फलों का सेवन करें. साफ सफाई का विशेष ध्यान दें व संक्रमण वाले व्यक्ति के संपर्क में जाने से बचे. वहीं गले में संक्रमण की वजह से खांसी जल्द ठीक नहीं हो रही है. मरीजों में लगातार बलगम बनता है. इसलिए भी खांसी अधिक दिनों तक सताती है.

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वायरल से पीड़ित लोगों को ये परेशानियां हो रहीं

  • – बुखार, नाक से पानी गिरना, दिन में कई बार छींक आना व जोड़ों में दर्द

  • – आंख लाल होना

  • – खांसी 8 से 10 दिन बाद भी ठीक नहीं हो रही है

  • – कई बार मरीजों को दिन में कई बार उलटी भी हो रही

  • – आंखों के पीछे दर्द भी सता रहा

ये सावधानी बरतें

  • – आइ फ्लू पीड़ित के संपर्क में न आएं

  • – एसी से निकल कर तुरंत धूप में जाने से तथा धूप से एसी में आने से बचें

  • – ठंडा पानी पीने से बचें

  • – ताजा हल्का व सुपाच्य भोजन खाएं

  • – गंदगी से दूर रहें खुले में बिक रही खाद्य सामग्री खाने से परहेज करें

  • – वायरस फीवर से पीड़ित मरीज से दूर रहें

भारत-नेपाल सीमा पर होगी मलेरिया की जांच

भारत-नेपाल सीमा पर आने-जाने वालों की थर्मो स्कैनर से जांच होगी. बुखार के लक्षण मिलने पर संबंधित व्यक्ति की जांच कराने के साथ उपचार कराया जाएगा. इसके लिए दोनों देश अपनी सीमा क्षेत्र में चिकित्सकीय टीम की नियुक्ति करेंगे. इसे उत्तर प्रदेश समेत उत्तराखंड और बिहार की सीमा पर भी लागू किया जाएगा. नेपाल के सीमाई क्षेत्र के जनपदों में मलेरिया की रोकथाम के लिए 29 व 30 जुलाई को नेपाल के बुटवल में दोनों देश के स्वास्थ्य विभाग के सचिव स्तरीय अधिकारियों की बैठक में इसको लेकर सहमति बनी है. तय हुआ कि सीमा से लगे भारत के पांच जिले नेपाल में मलेरिया को समाप्त करने में अहम भूमिका निभाएंगे. इसमें बिहार और उत्तराखंड के जिले भी शामिल हैं.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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