को-ऑपरेटिव बैंक को बदनाम करने की साजिश

Updated at : 21 Mar 2016 4:40 AM (IST)
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को-ऑपरेटिव बैंक को बदनाम करने की साजिश

हाजीपुर : जिश के तहत बैंक को दिवालिया बता बदनाम करने की कोशिश की जा रही है. वर्ष 2003 से अब तक के वित्तीय लेन-देन की सीबीआइ से जांच हो जाये, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा. बैंक को गर्त में मिलानेवाले लोगों को खुद के गिरेबां में झांकना चाहिए. दी […]

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हाजीपुर : जिश के तहत बैंक को दिवालिया बता बदनाम करने की कोशिश की जा रही है. वर्ष 2003 से अब तक के वित्तीय लेन-देन की सीबीआइ से जांच हो जाये, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा. बैंक को गर्त में मिलानेवाले लोगों को खुद के गिरेबां में झांकना चाहिए. दी वैशाली सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष विशुनदेव राय ने उक्त बातें कहीं. उन्होंने कहा कि पूर्व अध्यक्ष शिवनारायण मिश्र ने बैंक को गर्त में मिला दिया था. बड़ी मुश्किल से उन्होंने बैंक को घाटे से उबारा है.

आज बैंक मुनाफे के साथ न सिर्फ बेहतर काम कर रहा है, बल्कि ग्राहकों के विश्वास पर भी खरा उतरा है. बैंक को दिवालिया बता बदनाम करने का आरोप लगानेवाले उपाध्यक्ष रघुवंश नारायण सिंह समेत चार डायरेक्टरों को बोर्ड से बरखास्त कर दिया गया है. विशुनदेव राय ने पूर्व अध्यक्ष शिवनारायण मिश्र व वर्तमान उपाध्यक्ष रघुवंश नारायण सिंह के आरोपों को एक सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बैंक अच्छे तरीके से काम कर रहा है.

आरोपों को मनगढ़त बताते हुए पूर्व अध्यक्ष पर ही भारी अनियमितता का आरोप लगाया. शुक्रवार को दी वैशाली सेंट्रल कोआपरेटिव बैंक के अध्यक्ष श्री राय ने बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के साथ लंबी बैठक की. बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में अध्यक्ष ने जानकारी दी कि दो दिन पहले बैंक के पूर्व अध्यक्ष शिवनारायण मिश्रा, उपाध्यक्ष रघुवंश नारायण सिंह, निदेशक शैलेंद्र कुमार पांडेय, कृष्णदेव सिंह, जगलाल पासवान ने जो आरोप लगाया है, वह सब बेबुनियाद है.

लाभ में चल रहा है बैंक : उन्होंने कहा कि बैंक में सभी निवेशकों के पैसे सुरक्षित है तथा बैंक 59 लाख 58 हजार रुपये के लाभ में है. कहा कि बैंक का सारा पैसा इंश्योर्ड है. उन्होंने बैंक के पूर्व अध्यक्ष शिवनारायण मिश्र के पुत्र सुधि रंजन पांडेय, जो बैंक के निदेशक मंडल के सदस्य है पर कई आरोप लगाये.
अध्यक्ष श्री राय ने बैंक के विरुद्ध आचरण करने के आरोप में सभी को बैंक के निदेशक मंडल से निष्कासित करने की बात कही. साथ ही सभी के विरुद्ध भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराने की बात कही. उन्होंने कहा कि इस संबंध में सहकारिता मंत्री बिहार, प्रधान सचिव, सहकारिता विभाग, निबंधक सहयोग समितियां बिहार, जिलाधिकारी आदि से पूरे मामले की जांच के लिए पत्र भी लिखा है. उन्होंने वर्ष 2003 से अब तक बैंक में हुए वित्तीय लेनदेन की जांच सीबीआइ से कराने की मांग की.
नियमानुसार हो रहा भवन का निर्माण : बैंक के नये भवन के निर्माण के सवाल पर उन्होंने कहा कि बैंक के नये भवन का निर्माण पूरी तरह से नियमानुसार किया जा रहा है. इसमें कहीं से नियमों की अनदेखी नहीं की गयी है.
कहा कि बैंक के नये भवन के निर्माण के लिए पांच वर्ष पूर्व ही आइसीडीपी ने 50 लाख रुपये दिये थे, इसमें से 25 लाख रुपये बैंक को अनुदान के रूप में दिये गये हैं. इस मौके पर निदेशक मंडल के रीना राय, अराधना देवी, सुनील पासवान, मुसाफिर सहनी, रामकिशोर सिंह, सियाराम राय, डॉ प्रेम सिंह आदि उपस्थित थे.
क्या कहते हैं उपाध्यक्ष
वित्तीय स्थिति की जांच करा ली जाये, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा. अध्यक्ष को किसी निदेशक को हटाने का अधिकार नहीं है. निदेशक का चुनाव पैक्स अध्यक्ष करते हैं न कि बैंक के अध्यक्ष.
रघुवंश प्रसाद सिंह, उपाध्यक्ष को-ऑपरेटिव बैंक
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