कोनहारा घाट का शवदाह गृह अनुपयोगी

Updated at : 21 Aug 2017 9:34 AM (IST)
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कोनहारा घाट का शवदाह गृह अनुपयोगी

हाजीपुर : नगर के कोनहारा घाट स्थित विद्युत शवदाह गृह के बंद होने के कारण जिलावासियों को दाह संस्कार की दुश्वारियां झेलनी पर रही है. शोभा की वस्तु बने शवदाह गृह को चालू कराने को लेकर न नगर पर्षद गंभीर है और न जिला प्रशासन इस पर ध्यान दे रहा है. वर्ष 1993 में चालू […]

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हाजीपुर : नगर के कोनहारा घाट स्थित विद्युत शवदाह गृह के बंद होने के कारण जिलावासियों को दाह संस्कार की दुश्वारियां झेलनी पर रही है. शोभा की वस्तु बने शवदाह गृह को चालू कराने को लेकर न नगर पर्षद गंभीर है और न जिला प्रशासन इस पर ध्यान दे रहा है. वर्ष 1993 में चालू होने के बाद लगभग डेढ़ दशक तक बंद रहे विद्युत शवदाह गृह को बड़ी मशक्कत के बाद चालू कराया गया था. फरवरी 2015 में यह दुबारा चालू तो हुआ, लेकिन आठ महीने के अंदर ही फिर बंद हो गया था.
मालूम हो कि पिछली बार शवदाह गृह अक्टूबर 2015 में बंद हुआ था, जब बिजली बिल का बकाया जमा नहीं होने के कारण विद्युत विभाग ने इसकी लाइन काट दी थी. लगभग 15 महीने बाद इसी साल के जनवरी माह में इसे चालू किया गया था, लेकिन चार महीने चलने के बाद बीते 15 मई को शवदाह गृह फिर बंद कर दिया गया. बताया गया है कि चिमनी खराब हो जाने के कारण इसे बंद किया गया है.
शवदाह गृह बंद होने से बढ़ रहा है नदी का प्रदूषण : कोनहारा घाट स्थित मुक्ति धाम पर विद्युत शवदाह गृह के चालू होने का सबसे बड़ा लाभ यह था कि इससे नदी और घाट का प्रदूषण काफी कम होने लगा था.
दूसरी ओर दाह संस्कार में लोगों के समय और पैसे की भी बचत होती थी. विद्युत शवदाह गृह में जहां पांच सौ रुपये के खर्च पर 30 से 40 मिनट में दाह संस्कार संपन्न हो रहा था, वहीं लकड़ी की चिता पर लाश जलाने में पांच से छह हजार रुपये खर्च होता है और तीन से चार घंटे का समय लगता है. नदी के बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए विद्युत शवदाह गृह को दाह संस्कार का सबसे बेहतर साधन माना जाता है. शवदाह गृह के बंद हो जाने से खासकर निम्न आय वर्ग के लोगों को दाह संस्कार में परेशानी उठानी पड़ रही है.तो दूसरी ओर अधजली और लावारिस लाशें नदी में बहाये जाने के कारण नदी का प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है.
जीर्णोद्धार तो हुआ, लेकिन चल नहीं पाया शवदाह गृह
विद्युत शवदाह गृह भले बंद हो गया हो, लेकिन इसके ऑपरेटर तथा अन्य स्टाफ आज भी अपनी ड्यूटी बजा रहे हैं. इन कर्मियों को सबसे बड़ा डर इस बात का है कि शवदाह गृह के लाखों के सामान कहीं फिर से चोरी न चली जाये. नगर के जागरूक लोगों का कहना है कि नगर पर्षद को विद्युत शवदाह गृह चालू करने की दिशा में अविलंब ठोस कदम उठाना चाहिए, ताकि इसके कर्मचारियों की रोजी रोटी बहाल हो सके और आम जन को इसका लाभ मिल सके.
मालूम हो की उच्च न्यायालय के आदेश पर राज्य सरकार ने वर्ष 2014 में विद्युत शवदाह गृह का जीर्णोद्धार कराया था. सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग ने इसके लिये लगभग एक करोड़ रुपये दिये थे. बिहार राज्य जल पर्षद ने शवदाह गृह का जीर्णोद्धार कर इसे चलाने के लिये नगर पर्षद को सौंप दिया था. जीर्णोद्धार के बाद शवदाह गृह चालू तो हो गया, लेकिन यह नियमित रूप से चल नहीं पाया.
क्या कहते हैं अधिकारी
विद्युत शवदाह गृह में तकनीकी खराबी आ जाने के कारण इसे बंद कर दिया गया है. शवदाह गृह की चिमनी जाम हो जाने के कारण यह ठीक से काम नहीं कर रहा. इसे बनाने के लिए संबंधित कार्य एजेंसी से संपर्क किया गया है और काम शुरू होने वाला है. जल्दी ही शवदाह गृह को दुरुस्त कर इसे चालू कर दिया जायेगा.
सिद्धार्थ हर्ष र्वद्धन, नगर कार्यपालक पदाधिकारी
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