– 49 दिनों में दो स्कॉर्पियो की चोरी – चारपहिया वाहन से दिन भर चोर शहर में करते हैं रेकी सुपौल. शहर में अब सिर्फ बाइक नहीं, लग्जरी वाहनों की चोरी का नेटवर्क भी तेजी से फैल रहा है. चिंता की बात यह है कि पुलिस इस बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर अंकुश लगाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है. चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, और पुलिस की कार्रवाई महज एफआईआर दर्ज करने तक सीमित रह गई है. शातिर तरीके से करते हैं चोरी चोर अब पहले की तरह परंपरागत तरीके से नहीं, बल्कि पूरी प्लानिंग के साथ चोरी की वारदात को अंजाम दे रहे हैं. ये चोर दिन में चारपहिया वाहन से गश्त कर संभावित जगहों की रेकी करते हैं और रात में उसी वाहन से आकर लग्जरी गाड़ियां चुरा लेते हैं. आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने के बावजूद पुलिस इन घटनाओं पर अंकुश नहीं लगा पा रही है. एक ही जगह से बार-बार हो रही चोरी, पुलिस के लिए बनी चुनौती शहर के कुछ स्थान ऐसे हैं जहां बार-बार वाहन चोरी की घटनाएं हो रही हैं. इन इलाकों में हाई-रेजोल्यूशन वाले सीसीटीवी लगे हैं, बावजूद इसके पुलिस अब तक किसी भी गिरोह तक नहीं पहुंच सकी है. इससे पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. 11 मार्च की रात चोरी हुई स्कॉर्पियो का अब तक कोई सुराग नहीं 11 मार्च को जिला मुख्यालय से एक स्कॉर्पियो चोरी हो गई थी. सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, यह गाड़ी रात 2:32 बजे आसनपुर टोल प्लाजा से गुजरी थी. उसके साथ एक सफेद स्विफ्ट डिजायर कार भी वीआईपी लेन से निकली थी, जिससे किसी संगठित गिरोह की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है. जीपीएस ट्रैकिंग के अनुसार स्कॉर्पियो को आखिरी बार समस्तीपुर के कल्याणपुर में देखा गया था, उसके बाद से उसका कोई पता नहीं चल पाया है. 49 दिन बीतने के बाद भी पुलिस अब तक खाली हाथ है. 28 अप्रैल को दो स्कॉर्पियो चोरी की कोशिश 28 अप्रैल की रात वार्ड संख्या 09, लोहिया चौक से चोरों ने एक स्कॉर्पियो चोरी कर ली. चोरों ने सुपौल उच्च माध्यमिक विद्यालय की ओर जाने वाली सड़क का इस्तेमाल किया. इसी रात नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड नंबर 03 में सुकमारपुर निवासी रामानंद यादव की स्कॉर्पियो चोरी करने की कोशिश भी की गई थी, लेकिन वाहन स्टार्ट नहीं होने के कारण चोर उसे क्षतिग्रस्त कर फरार हो गए. जनता में बढ़ रही है असुरक्षा की भावना लगातार हो रही लग्जरी वाहनों की चोरी और पुलिस की निष्क्रियता ने आम लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ा दी है. स्थानीय लोग प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि जब बड़े वाहन भी सुरक्षित नहीं हैं तो आम जनता की सुरक्षा की क्या गारंटी है.
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