खरना के साथ चैती छठ का अनुष्ठान शुरू, 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखेंगी व्रती

Updated at : 23 Mar 2026 7:13 PM (IST)
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खरना के साथ चैती छठ का अनुष्ठान शुरू, 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखेंगी व्रती

प्रसाद की खास बात यह है कि इसे मिट्टी के बनाए गए नए चूल्हे में आम की लकड़ी को जलाकर प्रसाद बनाया जाता है.

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सुपौल जिले में चार दिवसीय चैती छठ महापर्व प्रारंभ हो गया है. रविवार को नहाय खाय के साथ छठ पूजा का प्रारंभ हुआ. सोमवार को खरना पूजा का आयोजन किया गया. खरना के दिन व्रतियों द्वारा शाम में पूजा अर्चना के बाद गुड़ की खीर आदि प्रसाद का ग्रहण किया. इसके साथ ही व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास प्रारंभ हो गया. महापर्व के तीसरे दिन मंगलवार की संध्या अस्ताचलगामी एवं चौथे दिन बुधवार की सुबह उदीयमान सूर्य देव को अर्घ्य देकर पर्व व उपवास की समाप्ति होगी. मालूम हो कि हिंदू पंचांग के अनुसार साल में दो बार छठ का पर्व मनाया जाता है. पहला चैत्र मास में और दूसरा कार्तिक मास में मनाया जाता है. इस पर्व में सूर्य की उपासना के साथ उनकी बहन छठी माता की पूजा करने का विधान है. खरना का महत्व चैती छठ के दूसरे दिन खरना होता है. इस दिन व्रती सुबह स्नान आदि करके पूरे दिन व्रत रखकर भगवान सूर्य की पूजा करती हैं. इसके बाद शाम को पूजा के लिए गुड़ की खीर के साथ रोटी बनाई जाती है. इस प्रसाद की खास बात यह है कि इसे मिट्टी के बनाए गए नए चूल्हे में आम की लकड़ी को जलाकर प्रसाद बनाया जाता है. इसके साथ ही इसे मिट्टी या फिर पीतल के बर्तन में पकाया जाता है. भगवान सूर्य को भोग लगाने के लिए इस प्रसाद को केले के पत्ते में रखा जाता है.

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RAJEEV KUMAR JHA

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