लोगों को एक अच्छी सड़क भी नसीब नहीं

Published at :04 Jun 2017 1:06 AM (IST)
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लोगों को एक अच्छी सड़क भी नसीब नहीं

उदासीनता. लौकहा-वीणा पथ का हाल-बेहाल जिला मुख्यालय से मात्र आठ किलोमीटर दूरी पर स्थित लौकहा-वीणा पथ का हाल-बेहाल है. दर्जनों गांव के हजारों लोगों के आवागमन का एक मात्र जरिया यही पथ है. बावजूद इसके जीर्णोद्धार की दिशा में आज तक किसी की नजर नहीं पड़ी है. सुपौल : किसी भी प्रदेश की समृद्धि आंकने […]

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उदासीनता. लौकहा-वीणा पथ का हाल-बेहाल

जिला मुख्यालय से मात्र आठ किलोमीटर दूरी पर स्थित लौकहा-वीणा पथ का हाल-बेहाल है. दर्जनों गांव के हजारों लोगों के आवागमन का एक मात्र जरिया यही पथ है. बावजूद इसके जीर्णोद्धार की दिशा में आज तक किसी की नजर नहीं पड़ी है.
सुपौल : किसी भी प्रदेश की समृद्धि आंकने का आधार सड़क यातायात हुआ करता है. इस कसौटी पर यहां की स्थिति ठीक नहीं है. विकास के इस दौर में भले ही 250 की बसावटों पर सड़क बनाने की बात की जा रही हो, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि जहां पूर्व में सड़कें बनी हुई है, इसे कोई देखने-सुनने वाला नहीं है. आजादी के सात दशक बाद भी जिला मुख्यालय से मात्र 08 किलोमीटर दूरी पर स्थित लौकहा-वीणा पथ का हाल-बेहाल है. दर्जनों गांव के हजारों लोगों के आवागमन का एक मात्र जरिया यही पथ है.
बावजूद इसके जीर्णोधार की दिशा में आज तक किसी की नजर नहीं पड़ी है. हाल यह है कि इस सड़क पर वाहनों से चलना तो दूर पैदल चलने में भी लोगों को काफी दुश्वारियां उठानी पड़ती है. आस-पास के लौकहा, कजहा, झहुरा, बिसनपुर, कजरा, मोहनिया आदि गांव के लोगों की माने तो इस सड़क के जीर्णोधार के लिए कई बार जनप्रतिनिधियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगायी गयी. बावजूद इसकी सुधि लेने वाला आज तक कोई नहीं मिला.
हजारों लोगों के आवागमन का है जरिया : लौकहा-वीणा पथ आस-पास के गांव लौकहा, कजहा, बेला, झहुरा, बिसनपुर, कजरा, मोहनिया आदि गांव के हजारों लोगों के आवागमन का एक मात्र सहारा है. आस-पास के हजारों की आबादी की जरूरत को देखते हुए वर्ष 1980 में इस सड़क का निर्माण पीडब्लूडी विभाग द्वारा किया गया था.
जिसमें सड़क पर मिट्टी भराई के अलावा सोलिंग का कार्य किया गया था. लेकिन यहां के लोगों की जरूरत को देखते हुए शुरू से इस सड़क के पक्कीकरण को लेकर मांगे उठती रही है. वीणा से बेला गांव तक 04 किलोमीटर लंबी इस सड़क की हालत इतनी खराब है कि सड़क पर गड्ढ़ा है या गड‍्ढ़े में सड़क पता ही नहीं चलता है.
सबसे ज्यादा परेशानी लोगों को बरसात के मौसम में व आपातकाल की स्थिति में होती है. रात के अंधेरे में कौन कहे दिन के उजाले में भी लोगों को बड़ी मशक्कत से इस सड़क पर आवागमन करना पड़ता है.
प्राक्कलन तैयार कर विभाग को भेज दिया गया है. जल्द ही सड़क निर्माण कार्य आरंभ होने की संभावना है.
चंद्रशेखर आजाद, कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण विकास अभिकरण, सुपौल
कहते हैं लोग
स्थानीय ग्रामीणों में सत्यनारायण मंडल, दीपक कुमार, नीतीश कुमार, रौशन कुमार, हरेराम यादव, अनंत लाल यादव, बेचु यादव, राजीव कुमार यादव, प्रभाष यादव, परमानंद सादा, राजीव रंजन, देवराज कुमार, गोलकु चौधरी, नीरज कुमार यादव, सुरेश यादव आदि बताते हैं कि कई वर्ष पूर्व से इस ईंट सोलिंग की मरम्मति नहीं की गयी है.
जबकि इस सड़क की आवश्यकता को देखते हुए शुरु से पक्कीकरण की मांग हो रही है. लोगों का कहना है कि सबसे ज्यादा परेशानी बरसात के मौसम में और आपातकाल की स्थिति में होती है. जब लोगों को इस सड़क से गुजरना होता है. आस-पास के लोगों के लिए अन्य स्थानों तक जाने के लिए अन्य कोई दूसरा रास्ता नहीं होना भी सबसे बड़ी परेशानी है.
ग्रामीणों का कहना है कि इस सड़क जीर्णोधार के लिए कई बार जनप्रतिनियों से गुहार लगायी गयी. लेकिन आश्वासन के अलावा आज तक कुछ नहीं मिला. इसलिए यहां के लोगों की परेशानी अब तक यथावत बनी हुई है. ऑटो चालक रवि कुमार ने कहा कि लौकहा-वीणा पथ जाने के दौरान काफी सतर्कता बरतनी पड़ती है. ऑटो कब पलट जायेगा, कहना कठिन है.
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