हड़ताल के कारण परेशान रहे मरीज

Updated at :31 Jan 2017 4:23 AM
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हड़ताल के कारण परेशान रहे मरीज

परेशानी. रविवार को महिला की मौत पर परिजनों ने डॉक्टरों से की थी मारपीट सदर अस्पताल में रविवार को इलाज के दौरान महिला की मौत के बाद परिजनों द्वारा डॉक्टरों के साथ धक्का-मुक्की का मामला सोमवार को भी छाया रहा. आइएमए के आह्वान पर जहां चिकित्सकों ने ओपीडी सेवा बाधित रखी, वहीं आपातकालीन ड‍्यूटी के […]

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परेशानी. रविवार को महिला की मौत पर परिजनों ने डॉक्टरों से की थी मारपीट

सदर अस्पताल में रविवार को इलाज के दौरान महिला की मौत के बाद परिजनों द्वारा डॉक्टरों के साथ धक्का-मुक्की का मामला सोमवार को भी छाया रहा. आइएमए के आह्वान पर जहां चिकित्सकों ने ओपीडी सेवा बाधित रखी, वहीं आपातकालीन ड‍्यूटी के दौरान भी काला बिल्ला लगा कर विरोध जताया.
सुपौल : रविवार की देर शाम सदर अस्पताल में महिला मरीज की मौत और उसके बाद हुए हंगामे का विवाद सोमवार को दूसरे दिन भी जारी रहा. आइएमए के आह्वान पर जहां चिकित्सकों ने ओपीडी सेवा बाधित रखी. वही आपातकालीन ड‍्यूटी के दौरान भी काला बिल्ला लगा कर विरोध जताया. दिन के 12:00 बज रहे थे, लेकिन सदर अस्पताल में ओपीडी सेवा बंद थी. त्रिवेणीगंज के बेलोखरी से आयी जन्नती खातून को पथरी रोग का उपचार करवाना था, लेकिन ओपीडी बंद रहने के कारण निराशा हाथ लगी और उसे लौटना पड़ा. सदर प्रखंड के एकमा से चोट के कारण उत्पन्न सिरदर्द का इलाज करवाने आयी बबीता देवी का भी यही हाल था.
वहीं डभारी चकला से रूकैया खातून अपने दो माह के पुत्र मो एहसान का टीकाकरण कराने आयी थी. डॉक्टर द्वारा उसे सोमवार को बुलाया गया था, लेकिन सेवा बाधित रहने के कारण उसे निजी क्लिनिक जाना पड़ा, जबकि कोसी तटबंध के भीतर के इलाके में अवस्थित घीवक गांव से आयी रुकशाना खातून को अपने दो बेटों का इलाज कराना था. नूर चमन (06) व मो रियाज (05)
को बीते दो दिनों से खांसी हो रही थी. लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक नहीं रहने के कारण सदर अस्पताल ही उसका सहारा था. ओपीडी सेवा बाधित रहने के कारण चिकित्सक से तो मुलाकात नहीं हुई, किसी प्रकार उसे दवा उपलब्ध करवायी गयी. जिसके बाद वह घर लौट गयी. वही सदर प्रखंड के बकौर पंचायत स्थित सिहे निवासी शबनम खातून(24) अपने पति मो निजाम के साथ बुखार का उपचार कराने आयी थी. ओपीडी बंद रहने के कारण उसे भी निजी क्लिनिक का रूख करना पड़ा. अस्पताल पहुंचने वाले अन्य मरीजों का हाल भी कुछ इतर नहीं था.
पोस्टमार्टम को ले जारी है खींचतान
महिला की मौत और हंगामा मामले में पोस्टमार्टम को लेकर भी आइएमए व मृतका का परिवार आमने-सामने है. आइएमए मृतका रीना देवी का पोस्टमार्टम नहीं होने को पुलिस की नाकामी बता रही है और उसका कहना है कि शव बरामदगी को लेकर पुलिस ने संजीदगी नहीं दिखायी. हालांकि रीना देवी की बड़ी बेटी के पटना से लौटने तक शव उसके आंगन में ही पड़ा रहा, लेकिन आइएमए ने जब इसे मुद्दा बनाया तो मृतका के परिजन भी इस पर मुखर हुए और चिकित्सकों पर ही पोस्टमार्टम नहीं करने का आरोप लगया. मृतका के परिजनों ने बताया कि रीना की मौत के बाद उसकी बेटी पूजा बेहोश हो गयी.
जिसे बिना किसी जांच के रेफर कर दिया गया. जिसके बाद लोग आक्रोशित हुए और हंगामा किया, लेकिन इसी की प्रतिक्रिया के रूप में चिकित्सकों ने शव का पोस्टमार्टम करने से ही इनकार कर दिया. जिसके बाद परिजन शव को लेकर घर लौट आयी. इसके बाद किसी ने भी उनसे शव के पोस्टमार्टम के बाबत संपर्क नहीं किया. दिन के करीब दो बजे शव का अंतिम संस्कार किया गया.
बंद सीसीटीवी कैमरे ने बढ़ायी पुलिस की परेशानी
घायल डॉक्टर हो या मृतका के परिजन, मारपीट मामले में दोनों की अपनी दलीलें हैं. डीएस द्वारा मृतका के परिजनों के विरुद्ध मामले को लेकर कांड भी दर्ज करा दिया गया है, लेकिन समस्या यह है कि मामले में किसी को भी नामजद नहीं किया गया है, जबकि सोमवार को बयान तथा अन्य आवश्यक जानकारी के लिए सदर अस्पताल पहुंचे अनि ब्रजेश कुमार चौहान को भी चिकित्सकों की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला. ऐसे में पुलिस के लिए अभियुक्त की गिरफ्तारी मुश्किल हो रही है.
रविवार को जब पुलिस सदर अस्पताल परिसर में ही सीसीटीवी फुटेज खंगालने पहुंची, तो पता चला कि सभी कैमरे बंद पड़े हैं. इतना ही नहीं मारपीट बरामदे पर हुई या कमरे में इसको लेकर भी उहापोह की स्थिति बनी है, जबकि बाजार में लोग अब बंद पड़े कैमरे को ही मुद्दा बना कर पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं. लोगों का तर्क है कि कैमरा चालू होता तो शायद चिकित्सकों की लापरवाही भी जगजाहिर हो जाती और पूरे मामले में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता.
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