अब नहीं चलेगी प्रधानों की मनमानी चलाना होगा मानक अनुरूप एमडीएम

Updated at :24 Jan 2017 4:24 AM
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अब नहीं चलेगी प्रधानों की मनमानी चलाना होगा मानक अनुरूप एमडीएम

सुपौल : जिले भर के विद्यालयों में संचालित एमडीएम योजना शुरुआती दिनों से ही विवादों में रही है. दरअसल एमडीएम योजना के माध्यम से सरकार द्वारा जहां विद्यालय में नामांकित बच्चों को पठन-पाठन के साथ समुचित तरीके से गुणवत्ता युक्त भोजन परोसे जाने की व्यवस्था सुनिश्चित की गयी. इसका एक उद्देश्य सरकारी विद्यालयों में बच्चों […]

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सुपौल : जिले भर के विद्यालयों में संचालित एमडीएम योजना शुरुआती दिनों से ही विवादों में रही है. दरअसल एमडीएम योजना के माध्यम से सरकार द्वारा जहां विद्यालय में नामांकित बच्चों को पठन-पाठन के साथ समुचित तरीके से गुणवत्ता युक्त भोजन परोसे जाने की व्यवस्था सुनिश्चित की गयी. इसका एक उद्देश्य सरकारी विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति को बढ़ाना भी था. लेकिन जिले के कई विद्यालयों में इस योजना का समुचित तरीके से अनुपालन नहीं हो रहा है.

सरकार द्वारा शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 को लागू किये जाने बाद करोड़ों-अरबों की राशि खर्च विद्यालयों को सुसज्जित कराने का कार्य किया गया है. साथ ही प्रखंड से लेकर जिला स्तर पर अलग से एमडीएम कार्यालय का संचालन कराया गया. बच्चों को सप्ताह भर परोसे जाने वाले मिड डे मिल की तालिका भी विद्यालय प्रबंधन को उपलब्ध करायी गयी. ताकि नामांकित बच्चों को मानक अनुरूप एमडीएम योजना का लाभ मिल सके. लेकिन जिले में कई ऐसे विद्यालयों में समुचित तरीके से एमडीएम का संचालन नहीं हो पा रहा है. इसे विभागीय उदासीनता कहें या फिर कुछ और, लेकिन खामियाजा बच्चों को ही भुगतना पड़ रहा है. लेकिन विभागीय अधिकारियों की मानें तो योजना में सुधार के लिए नये सिरे से पहल आरंभ हुई है. जिससे योजना क्रियान्वयन को लेकर प्रधानों की मनमानी पर भी विराम लगेगा.

इंफ्रास्ट्रक्चर व शिक्षक की है कमी : विभागीय आंकड़े के मुताबिक जिले भर के विद्यालयों में शिक्षा पाने की गरज से कुल 04 लाख 62 हजार 60 छात्र-छात्रा नामांकित हैं. जहां विभाग द्वारा छात्र व शिक्षक का अनुपात भी तैयार किया गया. ताकि बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा मुहैया करायी जा सके. वही मानक के अनुरूप शिक्षा प्रदान कराने हेतु जिले भर में लगभग 15 हजार शिक्षकों की दरकार है. लेकिन आलम यह है कि जिले भर में कार्यरत शिक्षकों का आंकड़ा 10 हजार से भी नीचे है. जिसके कारण अधिकांश प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा वार भी शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं. वहीं कई मध्य विद्यालय विषयवार शिक्षकों के अभाव से जूझ रहे हैं. यहां नामांकित बच्चे भूमि व भवन के अभाव में खुले आसमान के नीचे, बांस बाड़ी या फिर किसी निजी दरवाजे पर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. जो सरकार की स्वच्छता अभियान की पोल खोलती नजर आ रही है. जबकि स्वच्छता अभियान के तहत विद्यालयों में शौचालय व स्वच्छ पेयजल के नाम पर करोड़ों की राशि खर्च की गयी है.
एमडीएम योजना संचालन कराने हेतु प्रतिदिन स्थानीय शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों सहित कई आलाधिकारियों द्वारा विद्यालयों का निरीक्षण किया जा रहा है. वही विभाग द्वारा भी दैनिकी दूरभाष सहित अन्य संसाधन के जरिये जानकारी हासिल की जा रही है. साथ ही गड़बड़ी पाये जाने पर संबंधित विद्यालय प्रधान के विरुद्ध कार्रवाई भी की जा रही है. बावजूद एमडीएम संचालन में कई विद्यालय प्रबंधनों की उदासीनता बरकरार है. गौरतलब है कि कुछ दिनों पूर्व प्रभारी जिला कार्यक्रम पदाधिकारी मध्याह्न भोजन योजना राघवेंद्र प्रताप सिंह द्वारा भी जिले के बसंतपुर प्रखंड अंतर्गत विभिन्न विद्यालयों का निरीक्षण किया गया. जहां कुछ विद्यालयों में उन्होंने एमडीएम का संचालन बंद पाया. वहीं 17 जनवरी को जिला शिक्षा पदाधिकारी मो हारुण ने सदर प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय अमहा उत्तर के निरीक्षण के दौरान वे विद्यालय में अपराह्न 01 बजे तक एमडीएम नहीं बनाया गया था. इसी प्रकार योजना में गड़बड़ी के अन्य कई मामलों में भी कार्रवाई हो चुकी है.
जिले के कुछ विद्यालयों में कतिपय कारणों से एमडीएम योजना बाधित होने की जानकारी मिली है. एक सप्ताह पूर्व हमने प्रभार ग्रहण किया है. मिड डे मिल योजना से प्रभावित विद्यालयों में शीघ्र ही संचालन कराया जायेगा. साथ ही नियमानुकूल एमडीएम का संचालन नहीं किये जाने पर संबंधितों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जायेगी.
राघवेंद्र प्रताप सिंह, प्रभारी जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, एमडीएम
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