आधुनिकता के दौर में गुम हो रहा रेडियो

Updated at :11 Jan 2017 2:39 AM
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आधुनिकता के दौर में गुम हो रहा रेडियो

टेक्नोलॉजी Â मोबाइल व एफएम का युवाओं में बढ़ रहा क्रेज, इंटरनेट के हो रहे दीवाने सुपौल : विज्ञान के विकास के साथ ही लोगों की जिंदगी भी रफ्तार पकड़ रही है. नये-नये वैज्ञानिक उपकरण बन रहे हैं, लेकिन विज्ञान के इस विकास के बीच कुछ आवश्यक चीज़ें भी पीछे छूटती जा रही है. इन्हीं […]

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टेक्नोलॉजी Â मोबाइल व एफएम का युवाओं में बढ़ रहा क्रेज, इंटरनेट के हो रहे दीवाने

सुपौल : विज्ञान के विकास के साथ ही लोगों की जिंदगी भी रफ्तार पकड़ रही है. नये-नये वैज्ञानिक उपकरण बन रहे हैं, लेकिन विज्ञान के इस विकास के बीच कुछ आवश्यक चीज़ें भी पीछे छूटती जा रही है. इन्हीं में से एक रेडियो की सुरीली आवाज भी है.
एक समय था जब रेडियो पर समाचार सुनने के लिए लोग शहर से लेकर ग्रामाणी क्षेत्र में एक जगह इकट्ठा होकर दर्जनों की संख्या में बैठ कर समाचार सुनते थे. ऑल इंडिया रेडियो, विविध भारती हो या पटना का प्रादेशिक समाचार, मनोरंजन से लेकर ज्ञानवर्द्धक बातें बड़े ही गौर से सुना करते थे, लेकिन अब समय के साथ-साथ लोगों के जीवन शैली में भी बदलाव आ गया है. इसके कारण लोग अब हाइटेक युग में जीना पसंद करते हैं. समय के इस बदलते दौर में लोगों की ख्वाहिश भी बदल गयी और लोग अब सोशल मीडिया में व्यस्त रहने लगे हैं. आलम ये है कि जहां पहले हर घर में रेडियो मिलता था, वहां लोग टीवी, मोबाइल व इंटरनेट से जुड़े रहते हैं. इन सब के बीच रेडियो का वजूद खत्म होता दिख रहा है.
क्यों गुम हुई सुरीली आवाज: कहा जाता है कि लोगों की आवश्यकताओं में आने वाली वस्तु का कभी अंत नहीं होता है. सामर्थ्य और हैसियत के हिसाब से लोगों की आवश्यकता बढ़ती रहती है. कुछ ऐसी ही बात रेडियो के साथ भी हुई. लोग पहले रेडियो पर सिर्फ आवाज सुना करते थे. फिर तस्वीर की चाहत जगी, तो लोगों ने आमदनी के हिसाब से ब्लैक एंड व्हाइट टीवी खरीदी. इसमें लोगों को आवाज के साथ-साथ तस्वीर भी देखने का आनंद मिला. लिहाजा लोग टीवी खरीदने लगे और देखते-देखते अधिकांश घरों में टीवी पहुंच गया. अब इस हाईटेक युग में कमोबेश सभी के घरों में रंगीन टीवी दिखाई देने लगा है. वहीं जब इसके दूसरे पहलू को देखें तो लोग रेडियो से नाता तोड़ने लगे हैं और धीरे-धीरे सभी लोगों के घरों में रेडियो बेकार की वस्तु बन कर रह गयी है.
सोशल मीडिया की मची है धूम: मोबाइल हैंड सेट का एंड्रायड वर्जन अधिकांश हाथों में पहुंच जाने के कारण इसका बोलबाला है. बात करनी हो, पिक्चर देखनी हो या देश दुनिया की हर गतिविधि की जानकारी लेनी हो, तो इंटरनेट के माध्यम से पल भर में ही यह उपलब्ध हो जाता है. बहरहाल आधुनिकता के इस दौर में परंपरागत रेडियो सेट अपनी पहचान खोता जा रहा है. वह समय दूर नहीं जब आने वाली पीढ़ी के लिए रेडियो सेट महज किस्से कहानियों की बात रह जायेगा.
रेडियो से क्या था फायदा
रेडियो के दौर और वर्तमान समय के उपकरणों में देखा जाय तो काफी कुछ अंतर दिख रहा है. भले ही लोग आज आमदनी के अनुसार कई प्रकार के मनोरंजन के साधन का उपयोग करते हैं. लेकिन उस दौर में रेडियो की जो महत्ता थी उसे नकारा नहीं जा सकता है. रेडियो में लागत कम लगती थी और सेवा अधिक समय तक मिलती थी. अभी इस हाइटेक युग में जो संसाधन है उसमें खर्च ही खर्च है. अभी के संसाधन तो सबसे पहले अधिक कीमत में खरीदना पड़ता है और ऊपर से हर माह का खर्च अलग से लगता है. यह दीगर बात है कि इससे मनोरंजन भी कई गुणा अधिक मिलता है. इसके चलते लोग अधिकांश समय इन आधुनिक संसाधनों से जुड़े रहते हैं. हालांकि रेडियो के दौर में ऐसा नहीं होता था और गिने चुने वयस्क ही रेडियो पर समाचार सुनते थे. ये अलग बात है कि अभी भी देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी मन की बात रेडियो पर ही करते हैं. शायद रेडियो की लोकप्रियता बरकरार रखने की यह एक बेहतर कोशिश है.
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