पैडल की रफ्तार पर जीवंत हो उठता है ईटहरी

Updated at :10 Jan 2017 6:07 AM
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पैडल की रफ्तार पर जीवंत हो उठता है ईटहरी

सुपौल : जिले की हरदी पश्चिम पंचायत के सुदूर देहात इटहरी गांव में सुबह – सुबह जब पगडंडी पर स्कूल ड्रेस में सजी धजी दर्जनों बेटियां पीठ पर बस्ता लादे गुलाबी साइकिल पर सवार होकर हरदी हाई स्कूल के तरफ निकलती है तो मानों पूरे गांव में घंटियों की आवाज मधुर संगीत की तरह बिखर […]

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सुपौल : जिले की हरदी पश्चिम पंचायत के सुदूर देहात इटहरी गांव में सुबह – सुबह जब पगडंडी पर स्कूल ड्रेस में सजी धजी दर्जनों बेटियां पीठ पर बस्ता लादे गुलाबी साइकिल पर सवार होकर हरदी हाई स्कूल के तरफ निकलती है तो मानों पूरे गांव में घंटियों की आवाज मधुर संगीत की तरह बिखर जाती है. सुदूर देहात में शुमार इटहरी को अपने सुखद भविष्य के सपने जीवंत होते दिखाई देने लगते हैं. पैदल की एक समान रफ्तार शिक्षा के अनुशासन का एक झलक होता है. महज एक दशक पहले तक इटहरी के तीन सौ घरों में बसे किसी भी अभिभावक को गौरव पूर्ण भविष्य की कोई खबर नहीं थी. गांव की हजारों बेटियां के आंखों में कोई सपना नहीं था.

लेकिन आज गांव की गोपाल पासवान की पंद्रह वर्षीया बेटी काजल के आंखों में इंजीनियर बनने का सपना तैर रहा है. यह सब मुमकिन हुआ है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ऐतिहासिक पहल बालिका साइकिल योजना के लागू होने से साइकिल पर सवार होकर विद्यालय जाने और फिर मुकाम हासिल करने की ललक आज गांव के हर बेटी के आंखों में तैर रहा है. अब तक इटहरी गांव की 80 फीसदी छात्राएं का नामांकन उच्च विद्यालय में हो चुका है. साइकिल रहने का फायदा है कि बेटियां नियत समय पर एकजुट होकर विद्यालय के लिए निकल जाती हैं.

वर्तमान वित्तीय वर्ष में भी इस गांव की दर्जनों बेटियों को इस महत्वाकांक्षी योजनाओं का समुचित लाभ दिया जा रहा है. जिले में चल रहे मुख्यमंत्री साइकिल योजना खासकर बेटियों की शिक्षा दीक्षा के लिए जादू की छड़ी साबित हुई. इस योजना का असर है कि जिले की 85 प्रतिशत छात्राएं उच्च विद्यालय में नामांकित होकर रोज स्कूल जा रही है. वर्ष 2015-16 में स्थानीय शिक्षा विभाग द्वारा 19 हजार 317 बालिकाओं को साइकिल उपलब्ध कराये जाने का लक्ष्य रखा गया था. जहां विभाग को उक्त लक्ष्य के विरुद्ध 18 हजार 693 बालिकाओं को साइकिल उपलब्ध कराये जाने हेतु स्वीकृति की गयी है. बालिका साइकिल मद में कुल 46 हजार 73 हजार 250 रुपये की राशि उपलब्ध कराये जाने की बात कही जा रही है. कार्यालय से प्राप्त जानकारी अनुसार उक्त योजना के तहत प्रति बालिका 25 सौ रुपये की राशि प्रदान की जायेगी.
साइकिल पर बैठ कर जगा रही अलख
सदर प्रखंड के हरदी पश्चिम पंचायत के ईटहरी गांव निवासी महादलित समुदाय के बहादुर राम की बेटी गौरी कुमारी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा लागू शिक्षा के क्षेत्र के क्रांति लाने वाले महत्वाकांक्षी योजना मुख्यमंत्री साइकिल योजना की नजीर है. गौरी ने साइकिल योजना को देखकर खुद पढ़ना शुरू किया तो उसके पिता ने बेटी के जिद को अपना मिशन बना लिया. नतीजा गौरी की छोटी बहन पार्वती कुमारी आज इंटर की छात्रा है. तो छोटी बहन मनिका वर्ग नौ की छात्रा है. छोटा भाई भूषण और सोनू भी वर्ग सात और चार में पढ़ रहा है. गौरी की पढ़ाई में मुख्यमंत्री योजना के तहत मिले साइकिल का बहुत बड़ा योगदान है. गौरी ने बताती है कि मुख्यमंत्री साइकिल योजना के तहत मिलने वाली साइकिल की ललक लेकर वह हाई स्कूल में दाखिला लिया था. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह योजना लागू नहीं किया होता तो मैं अपनी बुआ और पास-पड़ोस की कई लड़कियों की तरह घर से तीन किलोमीटर पर स्थित हरदी हाई स्कूल जाकर नियमित रूप से पढ़ने का कभी सोच भी सकती. लेकिन मुख्यमंत्री साइकिल योजना ने मुझ जैसे मजदूर, दलित की बेटी को आगे पढ़ने के लिये प्रेरित किया. गौरी की देखा-देखी आज गांव की दर्जनों लड़कियां हैं, स्कूल जा रही है. गौरी स्नातक कर रही है. साथ-साथ जीविका मिशन से जुड़कर बैंक मित्र के तौर पर समाज में नारी शिक्षा के लिये जागरूकता भी फैला रही है.
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