आपराधिक मामलों में कमी
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :27 Dec 2016 4:55 AM
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समीक्षा. पूर्ण शराबबंदी के बाद अपराधियों का नशा काफूर बिहार में पूर्ण शराब बंदी के बाद हत्या और महिला उत्पीड़न के मामले में भारी गिरावट दर्ज हुई है. वहीं चोरी, साधारण अपहरण आदि मामलों में भी कमी आयी है. सुपौल : जिले में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद अप्रत्याशित रूप से आपराधिक घटनाओं में […]
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समीक्षा. पूर्ण शराबबंदी के बाद अपराधियों का नशा काफूर
बिहार में पूर्ण शराब बंदी के बाद हत्या और महिला उत्पीड़न के मामले में भारी गिरावट दर्ज हुई है. वहीं चोरी, साधारण अपहरण आदि मामलों में भी कमी आयी है.
सुपौल : जिले में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद अप्रत्याशित रूप से आपराधिक घटनाओं में कमी आयी है. खासकर हत्या और महिला उत्पीड़न के मामले में भारी गिरावट दर्ज हुई है. वहीं चोरी, साधारण अपहरण आदि मामलों में भी कमी आयी है. लेकिन अप्रत्याशित रूप से लूट और सड़क दुर्घटना में वृद्धि दर्ज हुई है. पुलिस ने पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद अब तक 119 लीटर देशी शराब और 4427 लीटर विदेश शराब को जब्त किया है. ऐसे मामलों में 148 कांड दर्ज हो चुके हैं.
जिसमें 194 लोगों की गिरफ्तारी सुनिश्चित हुई है. जाहिर है पूर्ण शराबबंदी के बाद अपराधियों का नशा अब काफूर होने लगा है. गौर करने के बात यह है कि सबसे अधिक विदेश शराब की जब्ती सदर थाना क्षेत्र में और सबसे कम जब्ती जदिया थाना क्षेत्र में हुई है. जबकि देशी शराब सबसे अधिक त्रिवेणीगंज थाना क्षेत्र और सबसे कम पिपरा थाना क्षेत्र में हुई है. वहीं वीरपुर थाना क्षेत्र में नशे के विकल्प के रूप में सबसे प्रचलित कफ सीरप की बरामदगी हुई है.
लूट, दुष्कर्म और सड़क दुर्घटना मामले में हुई वृद्धि : चिंता की बात यह है कि पूर्ण शराबबंदी के बावजूद दुष्कर्म के मामले में इजाफा हुआ है. गत वर्ष 10 मामले दर्ज हुए. जबकि इस वर्ष 15 मामले दर्ज हो चुके हैं. जाहिर है यह कानून व्यवस्था से जुड़ा मामला है और साथ ही समाज में पनप रही विकृत मानसिकता का भी ज्वलंत उदाहरण है. आश्चर्य जनक रूप से लूट की घटनाओं में भी वृद्धि हुई है. यह आंकड़ा काफी गंभीर है. गत वर्ष 19 लूट की घटना हुई थी. जबकि इस वर्ष यह आंकड़ा 31 को पार कर चुका है. दरअसल इसकी एक बड़ी वजह यह है कि सुपौल
अंतरजिला अपराधियों का चारागाह बना रहा है और दूसरे जिला के अपराधी यहां आकर खासकर लूट की घटना को अंजाम देते हैं. वहीं सड़क दुर्घटना और उसमें हुई मौत भी आश्चर्यजनक है. गत वर्ष 69 सड़क दुर्घटनाओं में 50 लोगों की मौत हुई थी. जबकि इस वर्ष 90 सड़क दुर्घटना में 64 लोगों की मौत हुई है. इसकी बड़ी वजह यह है कि पहले जहां शराब पीकर वाहन चलाने से दुर्घटनाएं होती थी. वहीं अब चिकनी सड़कों पर तेज रफ्तार और असावधानी लोगों की जान ले रहा है.
अवैध रूप से अर्जित संपत्ति की होगी जब्ती : पूर्व में शराब के अवैध कारोबार से जुड़े रहे लोगों पर पुलिस की पैनी नजर है. जिले में कई ऐसे सफेदपोश हैं जिन्होंने जिले में शराब के अवैध कारोबार से अकूत संपत्ति अर्जित कर रखी है. कल तक के ऐसे सफेदपोश में से अब कई राजनेता भी बन चुके हैं. लेकिन जिले की पुलिस द्वारा चार ऐसे लोगों को चिन्हित किया गया है. जिन्होंने शराब और गांजा के कारोबार से अवैध रूप से संपत्ति अर्जित किया है. उनकी संपत्ति का सत्यापन का कार्य पूरा किया जा चुका है. शीघ्र ही पीएमएलए के तहत उनकी संपत्ति को जब्त किया जायेगा. राज्य मुख्यालय को इस प्रकार का प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है.
हत्या, उत्पीड़न और चोरी में आयी कमी
01 अप्रैल 2015 से लेकर 31 नवंबर 2015 और 01 अप्रैल 2016 से 31 नवंबर 2016 के बीच घटित आपराधिक घटनाओं पर नजर डाले तो स्पष्ट है कि पूर्ण शराबबंदी के बाद हत्या की घटना में कमी आयी है. वर्ष 2015 में 28 हत्याएं हुई, जबकि 2016 में कुल 22 हत्याएं हुई. सबसे बड़ी बात यह है कि महिला उत्पीड़न के मामले में काफी कमी आयी. शराबबंदी का सबसे बड़ा प्रभाव इसी क्षेत्र में देखा जा सकता है. गत वर्ष महिला उत्पीड़न के 47 मामले दर्ज हुए थे और इस वर्ष 36 मामले दर्ज हुए. इसी प्रकार चोरी की घटना में भी कमी आयी है.
शराबबंदी के तहत 148 मामले दर्ज, 194 की हुई गिरफ्तारी
पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद जिले की पुलिस ने शराब के कारोबारियों और पीने वालों के खिलाफ जम कर अभियान चलाया. कुल 5787 छापेमारी जिले में की गयी. जिसके तहत 148 मामले दर्ज हुए. वहीं कुल 194 आरोपी की गिरफ्तारी हुई. मिली जानकारी अनुसार जिले में अब तक 119 लीटर देशी शराब और 4427 विदेशी शराब की जब्ती हुई है. खास बात यह है कि 124 मामले में न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल है. आरोप पत्रित कांडों में त्वरित विचारण की कार्रवाई की जा रही है. बहरहाल शराब से जुड़े केवल 24 मामले लंबित हैं.
शराबबंदी के बाद कुल मिला कर अपराध में कमी आयी है. दो माह के अंदर लूट की एक भी घटना घटित नहीं हुई है. लूट में शामिल अधिकांश अपराधी दूसरे जिले के थे जो अब सलाखों के पीछे हैं. कुछ अपराध की घटनाएं सामाजिक विषमता और समस्याओं से जुड़ी हुई है. शराब के अवैध कारोबार से अब संपत्ति अर्जित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई प्रक्रियाधीन है.
डॉ कुमार एकले, एसपी, सुपौल
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