बौराहा व परसामाधो पंचायत कटाव की जद में, ग्रामीण परेशान

Author : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 Jun 2016 5:54 AM

विज्ञापन

दो दर्जन से अधिक गांव तटबंध के भीतर हैं. जिन्हें हर वर्ष बाढ़ की िवभिषिका झेलनी पड़ती है. बाढ़ की वजह से इन गांवों में खेतों में लगे फसल डूब चुके हैं जिससे परेशान हैं लोग नाव की नहीं है समुचित व्यवस्था बाढ़ से सिहरे लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन का मन बना चुके […]

विज्ञापन

दो दर्जन से अधिक गांव तटबंध के भीतर हैं. जिन्हें हर वर्ष बाढ़ की िवभिषिका झेलनी पड़ती है.

बाढ़ की वजह से इन गांवों में खेतों में लगे फसल डूब चुके हैं जिससे परेशान हैं लोग
नाव की नहीं है समुचित व्यवस्था
बाढ़ से सिहरे लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन का मन बना चुके हैं. लेकिन प्रभावित क्षेत्र के गांवों में नाव की पर्याप्त संख्या में उपलब्धता नहीं रहने के कारण बाढ़ पीड़ितों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि इन गांवों में अब तक सरकारी नाव की व्यवस्था नहीं की गयी है. जिसके कारण पीड़ितों को निजी नाव चालकों की मनमानी का शिकार होना पड़ रहा है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन का ध्यान समस्या के बाबत आकर्षित करते हुए तत्काल बाढ़ पीड़ितों की सहायता एवं प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में नाव की बहाली करने की मांग की है.
कुनौली : मा सुरक्षा बांध कुनौली भंसार के पास कब्रिस्तान के समीप लगातार वर्षा होने से पड़ोसी देश नेपाल से भारतीय प्रभाग में प्रवेश करने वाली जीता धार के तेज प्रवाह से जगह-जगह कटाव की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है. कटाव की सूचना पर बीडीओ परशुराम सिंह ने स्थल का निरीक्षण किया. निरीक्षण के उपरांत बीडीओ ने स्थानीय मुखिया सत्य नारायण रजक और पंचायत समिति सदस्य वासिद् अहमद को मनरेगा के तहत कार्य कराये जाने का निर्देश दिया.
साथ ही इसके बेहतर उपाय के लिए जिलाधिकारी को प्रतिवेदन भेजे जाने की बात कही. निर्देशानुसार पंचायत प्रतिनिधि द्वारा को कटाव को रोकने के लिए क्रेटिंग भरा बोरा, लकड़ी का टुकड़ा सहित अन्य सामग्री इकठ्ठा किया जा रहा है. स्थानीय ग्रामीण ने बताया कि पूर्व में भी इसी जगह नदी के तेज प्रवाह के कारण कटाव लगा था.
स्थानीय लोगों ने बताया कि अगर इस कटाव को ससमय नहीं रोका गया तो एक बार फिर यहां के किसान का खेतों में बालू ही बालू होगा. साथ ही इस समस्या से करीब पांच सौ एकड़ भूमि प्रभावित होगी. गौरतलब हो कि जीता धार नेपाल प्रभाग से प्रभावित होकर भारतीय प्रभाग में बना सीमा सुरक्षा बांध के समीप नो मैंस लैंड में बहती थी. पर नदी में धीरे धीरे बालू भर जाने के कारण यह नदी सीधा इस गाइड बांध की ओर कई वर्षों से इस सुरक्षा बांध पर दबाव बना रही है.
साथ ही इस धार का मुहाना भारतीय प्रभाग की ओर अपनी मुख्य धारा प्रवाहित हो रही है. जिसके पीड़ित भारतीय प्रभाग के लोग भी होते रहे है. एक जगह मुहाने बनाने के बाद अब लगभग एक किलो मीटर हट कर शांति वन के पास इस नदी की तेज धारा का टकराव सीधा कब्रिस्तान के पास सुरक्षा बांध पर है. शांति वन से एक किलो मीटर पूरव अपना मुहाना इसी बांध में बना कर बह रही है. पर अब एक किलोमीटर पश्चिम हट कर अब कब्रिस्तान के पास काट रही है. इस कब्रिस्तान के समीप का हालात ऐसा है कि सीमा सुरक्षा बांध और नेपाल से बह कर आने वाली जीता धार बराबर की स्थिति में है. हालांकि पूर्व में मनरेगा के तहत इसी सुरक्षा बांध पर मिट्टी करण का कार्य लाखों की लागत से शुरू करवाया गया था.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन