मनमानी. अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों में सेविका या फिर सहायिका रहती हैं अनुपस्थित

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 11 Mar 2016 5:20 AM

विज्ञापन

बदहाली का दंश झेल रहा आंगनबाड़ी केंद्र थाना क्षेत्र में बाल विकास परियोजना के तहत संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति बदहाल बना है. आलम यह है कि अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों से या तो सेविका गायब रहती है या फिर सहायिका. यदि सेविका व सहायिका दोनों किसी केंद्र पर मिल भी जाय तो वहां बच्चों की […]

विज्ञापन

बदहाली का दंश झेल रहा आंगनबाड़ी केंद्र

थाना क्षेत्र में बाल विकास परियोजना के तहत संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति बदहाल बना है. आलम यह है कि अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों से या तो सेविका गायब रहती है या फिर सहायिका. यदि सेविका व सहायिका दोनों किसी केंद्र पर मिल भी जाय तो वहां बच्चों की उपस्थिति बिल्कुल ही नगण्य रहती है.
जदिया : थाना क्षेत्र में संचालित अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविका सहायिकाओ को न तो कोई डर और न ही विभागीय कार्रवाई का भय. उक्त मामले पर यदि कोई कार्रवाई हो भी गई तो सिर्फ स्पष्टीकरण व आर्थिक दंड तक ही सिमट कर रह जाती है. जिस कारण संबंधितों को लूट की खुली छूट मिल जाती है. जिस कारण प्रत्येक माह लाभुकों को मिलने वाले टेक होम राशन का सुचारू रूप से बटवारा नहीं हो पा रहा है.
साथ ही विभाग को फर्जी अभिश्रव सूची परियोजना को भेज दिया जाता है. साथ ही किसी केंद्रों पर टेक होम राशन वितरण किया भी जाता है तो लाभुकों को निर्धारित मात्रा से काफी कम उपलब्ध कराया जाता है. विभागीय अनुसार प्रति केंद्र पर 28 कुपोषित ,12अतिकुपोषित ,8 गर्भवती या 8धातृ महिलाओ को सुखा राशन निर्धारित तिथि को दिया जाना है. इसके तहत 28 कुपोषित बच्चे को ढाई किलो चावल तथा सवा किलो दाल व अतिकुपोषित बच्चों को प्रतिमाह चार किलो चावल तथा दो किलो दाल दिया जाना है.इसी तरह गर्भवती व धातृ महिला को तीन किलो चावल व ढेड़ किलो दाल देना है
सेविका व सहायिका के दरवाजे पर संचालित है केंद्र
जदिया थाना क्षेत्र के अधिकांश केंद्र सेविका या सहायिका के दरवाजे पर संचालित है. साथ ही सेविका व सहायिका अपने- अपने घर पर केंद्र का संचालन कर प्रति माह किराया भी फर्जी अभिश्रव बना कर वसूल कर रहे है. स्कूल पूर्व शिक्षा से जोड़ने व खास कर गरीब तबके के बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए प्रारंभ किया गया आंगनबाड़ी केंद्र अब विभागीय मिली भगत से आनन्द बाड़ी में तब्दील हो गया है. यहां यह बता दें कि सेविका व सहायिका सीमित मानदेय के लिए नौकरी नहीं करते बल्कि इसके पीछे प्रतिमाह होने वाले हजारो रूपये की बचत के लिए मारा मारी तक करते है.
संचालित आंगन बाड़ी केंद्रों में नीचे से लेकर ऊपर तक सिस्टम मैनेज है. मामले के बाबत कई सेविका का कहना है कि अधिकांश केंद्रों पर सरकारी भवन नहीं रहने के कारण सामग्री के भंडारण में दिक्कतें होती है. जिस कारण विभागीय मीनू का अनुपालन नहीं हो पा रहा है. समस्या के बाबत सीडीपीओ कुमारी अरुणा से जब दूरभाष पर संपर्क किया गया तो उन्होंने इस समस्या के बाबत कुछ कहना मुनासिब नहीं समझा और संपर्क भंग कर दिया.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन