दुर्लभ पक्षी गद्धि को देखने के लिए उमड़ी भीड़
दुर्लभ पक्षी गिद्ध को देखने के लिए उमड़ी भीड़ फोटो-04,कैप्सन-घर पर बैठा गिद्धप्रतिनिधि, त्रिवेणीगंजमुख्यालय स्थित थाना रोड में समा स्टूडियो के संचालित मो0 मोइनउद्दीन के घर पर अचानक देखा दुर्लभ पक्षी गिद्ध लोगों के कौतूहल का कारण बना रहा.गिद्ध को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी.वहीं दुर्लभ हो चुके गिद्ध को लेकर लोगों […]
दुर्लभ पक्षी गिद्ध को देखने के लिए उमड़ी भीड़ फोटो-04,कैप्सन-घर पर बैठा गिद्धप्रतिनिधि, त्रिवेणीगंजमुख्यालय स्थित थाना रोड में समा स्टूडियो के संचालित मो0 मोइनउद्दीन के घर पर अचानक देखा दुर्लभ पक्षी गिद्ध लोगों के कौतूहल का कारण बना रहा.गिद्ध को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी.वहीं दुर्लभ हो चुके गिद्ध को लेकर लोगों में चर्चा का बाजार भी काफी समय तक गर्म रहा .गौरतलब है कि पूर्व में आमतौर पर दिखने वाला मांसहारी पक्षी पर्यावरण में आ रहे बदलाव व अन्य कई कारणों से विलुप्त होता जा रहा है जिसको लेकर पक्षी वैज्ञानियों व पर्यावरणविदों द्वारा चिंता व्यक्त की गयी है.वहीं गिद्ध को संरक्षित करने की दिशा में कई उपाय भी किये जा रहे हैं.लोगों की माने तो पूर्व में मृत पशुओं को खेतों में यत्र तत्र फैंक दिया जाता था.जिससे गिद्धको आसानी से भोजन उपलब्ध हो जाता था.लेकिन समय के साथ ही मृत पशुओं को मिट्टी के नीचे दबाने की परंपरा शुरू हो गयी है जिसके वजह से गिद्ध के समक्ष भोजन की समस्या उत्पन्न हो गयी.स्थानीय पर्यावरणविद् मनोज कुमार ने बताया कि गिद्ध प्रजाति मानव के लिए सहमित्र एवं पर्यावरण का सफाई कर्मी भी माना जाता है.लकिन हाल के वर्षों में शिकारियों की कुदृष्टि व कुछ दवाओं के उपयोग की वजह से गिद्ध विलुप्त होता जा रहा है.बताया कि इसके विलुप्ति का सबसे बड़ा प्रभाव पर्यावरण पर पड़ रहा है साथ ही मानव चक्र भी दूषित हो रहा है.बताया कि भगौलिक क्षेत्र यह स्पष्ट करता है कि गिद्ध मुख्यतया मृत जीव का भक्षण कर उसके शरीर से निकलने वाले साइट्रिक एसिड को खा जाते है.जिससे वातावरण में जहरीली गैस नहीं बन पाती है.इसके आलावा गिद्ध विषेले कीटाणु का भी भक्षण करते है जिससे फसलों की भी सुरक्षा होती है.
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