मिट रहा नहर का अस्तत्वि

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मिट रहा नहर का अस्तित्वबेमतलब साबित हो रही राघोपुर केनाल उप शाखानहर में जगह – जगह मिट्टी जमा हो जाने के कारण नहर का स्वरूप ही बदल चुका है फोटो – 11-12कैप्सन – नहर का दृश्य व ऊंची भूमि. प्रतिनिधि, सुपौल जिले की आबादी का अधिकांश हिस्सा कृषि पर ही आधारित रहा है. सरकार द्वारा […]

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मिट रहा नहर का अस्तित्वबेमतलब साबित हो रही राघोपुर केनाल उप शाखानहर में जगह – जगह मिट्टी जमा हो जाने के कारण नहर का स्वरूप ही बदल चुका है फोटो – 11-12कैप्सन – नहर का दृश्य व ऊंची भूमि. प्रतिनिधि, सुपौल जिले की आबादी का अधिकांश हिस्सा कृषि पर ही आधारित रहा है. सरकार द्वारा लोगों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाये जाने को लेकर कृषि क्षेत्र में कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं. इसके लिए अलग प्रखंड से लेकर जिला स्तर पर विभाग भी संचालित हैं. साथ ही पंचायत से लेकर जिला स्तर तक मॉनीटरिंग भी हो रही है, ताकि कृषक कार्य से जुड़े किसानों को विविध फसलों की पैदावार व्यापक पैमाने पर हो सके. बावजूद इसके पटवन की समस्या से कई किसान हताश व निराश हैं. ज्ञात हो कि सदर प्रखंड के हजारों एकड़ भूमि के बीच से राघोपुर केनाल उप शाखा नहर गुजर रही है, लेकिन उक्त नहर में पानी नहीं रहने के कारण किसानों को गेहूं सहित अन्य फसलों को लेकर सिंचाई के समस्या सता रही है. 1967-68 में बना था केनाल उप शाखाकिसानों को पटवन की समस्या ना हो इसे लेकर सरकार द्वारा वर्ष 1967-68 में राघोपुर केनाल उप शाखा नहर को सदर प्रखंड के लौकहा होते हुए सहरसा जिले की ओर ले जाया गया, ताकि इस उप शाखा नहर से दर्जनों गांवों के किसानों की हजारों एकड़ की भूमि सिंचित हो सके. स्थिति यह है कि पांच दशकों से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी संबंधित विभाग द्वारा इस उप शाखा नहर की न तो मानदंड अनुरूप साफ – सफाई का कार्य कराया गया और न ही विभाग द्वारा किसी प्रकार का सुधि ली गयी है. जिस कारण उप शाखा नहर अस्तित्व विहीन होता प्रतीत हो रहा है. आलम यह है कि उक्त नहर में जगह – जगह मिट्टी जमा हो जाने के कारण नहर का स्वरूप ही बदल चुका है. साथ ही विभाग द्वारा इस नहर में फसल के पटवन के समय सूखाड़ की स्थिति उत्पन्न रहती है. वहीं बाढ़ के दौरान इस नहर में पानी छोड़ा जाता है. जिस कारण किसानों को बेमौसम पानी छोड़े से काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कहते हैं किसान किसान हरिश्चंद्र झा, जटा शंकर मिश्र, प्रमोद झा, विजय सिंह आदि ने बताया कि 1970 के दशक में जब राघोपुर केनाल उप शाखा नहर का संचालन किया गया था. किसानों ने सोचा था कि यहां के किसानों को हरित क्रांति का तोहफा मिला है. लेकिन विभागीय शिथिलता के कारण लोकहा, मोहनिया, गिदराही, कठमासी, गंगा पट्टी, बरूआरी, पनिदाहा सहित दर्जनों गांव के किसानों को फसलों के पटवन की समस्या से जूझना पड़ रहा है. बताया कि पटवन को लेकर विभाग द्वारा बोरिंग की व्यवस्था ना के बराबर ही दिख रहा है. साथ ही निजी बोरिंग के माध्यम से फसलों की सिंचाई करना किसानों के लिए काफी खर्चीला साबित हो रहा है. बताया कि सरकार द्वारा किसानों को फसलों के पटवन को लेकर अनुदान दिये जाने की भी व्यवस्था की गयी है. लेकिन विभागीय निष्क्रियता के कारण इसका लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है. बताया कि सरकार द्वारा बीते कई वर्षों से फसल के तीन व चार पटवन को अनुदान दिये जाने की घोषणा की जाती है. वहीं विभाग द्वारा अब तक भूमि के अनुरूप एक बार भी अनुदान की राशि का मुहैया नहीं कराया जा सका है. यहां तक कि अनुदान को लेकर दर्जनों बार किसान कार्यालय का चक्कर लगाते हैं. बावजूद इसके उन्हें लाभ नहीं मिल पा रहा है. बताया कि इस बार के धान फसल के पटवन को लेकर एक अनुदान भी किसान को प्राप्त नहीं हुआ है.बिना पटवन के ही लिया जाता है बिल उप शाखा नहर निर्माण के साथ ही संबंधित विभाग द्वारा पानी का बिल वसूला जा रहा है. किसानों ने बताया कि ‘ नहर में नहीं है पानी का नामो निशान- खेत ऊंची परेशान है किसान ‘ बताया कि विभाग द्वारा न तो नहर की उड़ाही की जाती है और न ही पटवन के समय नहर में पानी छोड़ा जाता है. पर, विभाग के कर्मियों द्वारा ससमय पटवन का चार्ज वसूला जाता रहा है. सिंचाई की राशि वसूलने आये कर्मियों द्वारा कहा जाता है कि नहर के समीप के भू स्वामी को पटवन का लगाना चुकता करना ही पड़ेगा. साथ ही ससमय लगान चुकता नहीं करने वाले भू स्वामियों को बाद में व्याज के साथ राशि वसूली जायेगी.

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