30 घंटे बाद भी नहीं मिला लापता डॉक्टर का सुराग

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30 घंटे बाद भी नहीं मिला लापता डॉक्टर का सुराग फोटो -11 से 15कैप्सन- डॉक्टर के आवास पर लटका ताला, क्लिनिक पर पहुंचे प्रभारी डीएम हरिहर प्रसाद, मीडिया से बातचीत करते डीआइजी एनपी सिंह एवं डॉक्टर का सर्टिफिकेट व प्रिस्किप्सन प्रतिनिधि, सुपौलजिला मुख्यालय में पानी टंकी के समीप आयुष चाइल्ड केयर क्लिनिक चलाने वाले डॉ […]

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30 घंटे बाद भी नहीं मिला लापता डॉक्टर का सुराग फोटो -11 से 15कैप्सन- डॉक्टर के आवास पर लटका ताला, क्लिनिक पर पहुंचे प्रभारी डीएम हरिहर प्रसाद, मीडिया से बातचीत करते डीआइजी एनपी सिंह एवं डॉक्टर का सर्टिफिकेट व प्रिस्किप्सन प्रतिनिधि, सुपौलजिला मुख्यालय में पानी टंकी के समीप आयुष चाइल्ड केयर क्लिनिक चलाने वाले डॉ एम कुमार के सोमवार को रहस्यमय तरीके से लापता होने का मामला अब गहराता जा रहा है. चिकित्सक के लापता होने के 30 घंटे बाद भी उनके बारे में किसी प्रकार की जानकारी पुलिस को नहीं मिल पायी है. हालांकि पुलिस इस मामले के शीघ्र उद्भेदन का दावा कर रही है. वहीं उक्त चिकित्सक के संबंध में शहर में तरह-तरह की चर्चाएं की जा रही हैं. बहरहाल पुलिस सबसे पहले चिकित्सक की सकुशल बरामदगी पर फोकस कर रही है. पुलिस के आलाधिकारी स्वयं इस मामले पर नजर रख रहे हैं. सोमवार की शाम से डीआइजी एनपी सिंह सुपौल में ही कैंप कर रहे हैं. उन्होंने डॉक्टर के क्लिनिक एवं आवास पर जा कर स्वयं पूछताछ की. मंगलवार को प्रभारी डीएम सह डीडीसी हरिहर प्रसाद ने भी क्लिनिक एवं आवास का मुआयना किया. डीआइजी श्री सिंह ने बताया कि इस मामले के उद्भेदन के लिए पांच टीमें गठित की गयी हैं. शीघ्र ही इस मामले का उद्भेदन कर लिया जायेगा.क्या है मामला पानी टंकी के समीप निजी क्लिनिक खोल कर प्रैक्टिस करने वाले डाॅ एम कुमार सोमवार को अचानक लापता हो गये. बताया जाता है कि सुबह में कुछ मरीजों को देखने के बाद वे अपने नया नगर स्थित किराये के आवास पर चले गये थे. दोपहर में अन्य मरीजों के आने पर जब कंपाउंडर उन्हें लाने गया, तो उनके आवास पर ताला लटका था. उसके बाद से उनका कोई पता नहीं चल पा रहा है. वहीं उनका मोबाइल भी लगातार स्वीच ऑफ आ रहा है. पुलिस ने उनके क्लिनिक पर दवा दुकान चलाने वाले अभिनव कुमार के आवेदन पर मामला दर्ज कर लिया है तथा डॉक्टर की सकुशल बरामदगी का प्रयास कर रही है.मुजफ्फरपुर निवासी हैं डाॅ एम कुमारडॉ एम कुमार (डॉ मंजय कुमार) मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत अलीनौरा गांव निवासी हैं. सात सितंबर से वह पानी टंकी के समीप आयुष चाइल्ड केयर क्लिनिक खोल कर यहां प्रैक्टिस कर रहे थे. पुलिस की जांच के प्रारंभिक चरण में कई चौंकाने वाली बातें सामने आयी हैं. पुलिस के अनुसार तथाकथित चिकित्सक एम कुमार सीतामढ़ी में सदर अस्पताल के समीप पूर्व में क्लिनिक खोल कर प्रैक्टिस करते थे. वहां के सिविल सर्जन ने उनसे सर्टिफिकेट की जब मांग की, तो वे वहां से भाग खड़े हुए. सीएस, डीआइ, दंडाधिकारी एवं पुलिस बल ने 22 अप्रैल को उनकी क्लिनिक पर छापेमारी की. इसके बाद वे सुपौल आ गये और 07 सितंबर को पानी टंकी के समीप अपना दूसरा ठिकाना ढूंढ़ लिया. यह भी बताया जा रहा है कि सीतामढ़ी से पूर्व जहां वे प्रैक्टिस करते थे, वहां एक नर्स के साथ झगड़ा हो जाने के बाद उन्हें क्लिनिक बंद करना पड़ा.चिकित्सक ने कर रखी हैं दो शादियां पुलिस के अनुसंधान में यह बातें सामने आयी है कि आशिक मिजाज डाॅ मंजय की दो पत्नियां हैं. उनकी पहली शादी घर वालों की मरजी से हुई थी, जो उनके गांव अलीनौरा में रहती है. वहीं उन्होंने नीतू से दूसरी शादी रचायी, जो सीतामढ़ी में रह रही है. बताया जाता है कि पहली पत्नी से चिकित्सक के संबंध ठीक नहीं हैं. उनके क्लिनिक के कर्मियों से मिली जानकारी के मुताबिक, जब से उन्होंने यहां क्लिनिक खोला है, उसके बाद से केवल उनकी दूसरी पत्नी नीतू ही यहां एक बार उनसे मिलने आयी थीं. इसके अलावा किसी को भी उनके परिवार के अन्य सदस्य के संबंध में किसी प्रकार की जानकारी नहीं है.ठिकाना बदलने में माहिर हैं एम कुमार जांच के दौरान पुलिस को पता चला है कि डाॅ मंजय इससे पूर्व कई अन्य जगहों पर निजी क्लिनिक खोल कर प्रैक्टिस कर चुके हैं. सीतामढ़ी में जिला प्रशासन द्वारा छापेमारी से पूर्व भी डॉ मंजय को दो बार अपना ठिकाना बदलना पड़ा. बताया जाता है कि पूर्व में जहां वे प्रैक्टिस करते थे, वहां एक नर्स से झगड़ा होने के बाद उन्हें क्लिनिक बंद करना पड़ा. इससे पूर्व भी उपचार के दौरान एक शिशु की मौत को लेकर हुए हंगामे के कारण उन्हें क्लिनिक बंद कर भागना पड़ा था. सीतामढ़ी के बाद उन्होंने अपना नया ठिकाना सुपौल को बनाया और यहां आ कर रहने लगे.पुलिसिया जांच के दौरान इस बात का भी पता चला है कि डाॅ एम कुमार द्वारा अपने गांव के लोगों तथा दोस्तों को रांची में प्रैक्टिस करने की बात बतायी गयी थी. सुपौल में क्लिनिक खोले जाने की खबर से उनके यार-दोस्त भी हैरान हैं.दवा कंपनी की ले रखी थी फ्रेंचाइजी पुलिस के अनुसार, डा एम कुमार ने एक ग्रुप तैयार कर माइकफोर्ड ऑर्गेनिक लिमिटेड की फ्रेंचाइजी ले रखी थी. सात सदस्यीय ग्रुप में उनकी दूसरी पत्नी नीतू के अलावा उनका साला कुणाल राज, संजय कुमार, संजय सिंह, श्याम कुमार कर्ण एवं शशि भूषण शामिल थे. इस फ्रेंचाइजी में करीब 22 लाख रुपये की हेराफेरी को लेकर सीतामढ़ी स्थित कोमल होटल में 30 नवंबर को ग्रुप के सदस्यों की डाॅ एम कुमार के साथ बैठक हुई थी, जहां डॉक्टर से बांड भरवाया गया था. डाॅ एम कुमार ने छह माह के भीतर कई किस्तों में राशि लौटाने का वादा किया था. 08 दिसंबर को प्रथम किस्त के रूप में 04 लाख 50 हजार रुपये चेक के माध्यम से अपने पार्टनर को लौटाना था, लेकिन इससे पूर्व ही 07 सितंबर को अचानक वह लापता हो गये. बहरहाल पुलिस सभी बिंदुओं की गहराई से जांच कर रही है. डॉक्टर की बरामदगी के बाद ही इस मामले से रहस्य का पर्दा उठ पायेगा.डॉक्टर की बरामदगी पहली प्राथमिकता : डीआइजी सोमवार को डाॅ एम कुमार के लापता होने की सूचना के बाद से इस मामले पर नजर रख रहे डीआइजी एनपी सिंह ने कहा कि पुलिस की पहली प्राथमिकता डाॅ एम कुमार की सकुशल बरामदगी है. मंगलवार को सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान डीआइजी श्री सिंह ने बताया कि उन्होंने स्वयं डॉक्टर के निजी क्लिनिक एवं आवास पर जा कर जांच की. इस दौरान उनके अपहरण की पुष्टि नहीं हुई और न ही कहीं से फिरौती मांगे जाने की सूचना प्राप्त हुई है. उन्होंने बताया कि चिकित्सक की बरामदगी के लिए पुलिस अधिकारियों के नेतृत्व में अलग-अलग पांच टीमों का गठन किया गया है. एक टीम उनके घर भेजी गयी है, जबकि दूसरी टीम को उनके साथ दवा कंपनी के फ्रेंचाइजी में काम करने वाले सदस्यों से पूछताछ के लिए भेजा गया है. तीन अन्य टीमें विभिन्न कोणों से इस मामले की जांच कर रही हैं. अभिनव कुमार द्वारा दिये गये आवेदन के आलोक में सदर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर ली गयी है. शीघ्र ही इस मामले का उद्भेदन कर लिया जायेगा. मौके पर एसपी डाॅ कुमार एकले, एएसपी शैलेश कुमार, एसडीपीओ वीणा कुमारी, सदर थानाध्यक्ष राम इकबाल यादव आदि मौजूद थे.फर्जी डिग्री धारी चिकित्सकों के लिए सुपौल बना सुरक्षित स्थान फर्जी डिग्री के आधार पर क्लिनिक खोल कर प्रैक्टिस करने वालों के लिए सुपौल सुरक्षित स्थान बनता जा रहा है.प्रशासन द्वारा इस पर नकेल कसने हेतु किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं किये जाने का नतीजा है कि प्रतिदिन शहर में निजी क्लिनिक धड़ल्ले से खोले जा रहे हैं. जानकारों की मानें तो यदि सही तरीके से शहर में संचालित निजी क्लिनिकों के चिकित्सक के डिग्री की जांच की जाये तो आधे से अधिक निजी क्लिनिक बंद हो जायेंगे. पर, फर्जी डिग्री के आधार पर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले लोगों के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा रही है.ऐसा नहीं है कि प्रशासनिक अधिकारी अथवा स्वास्थ्य विभाग के वरीय पदाधिकारियों को इस बात की जानकारी नहीं है. पर, सब कुछ जानते हुए भी अधिकारी अनजान बने हुए हैं. यही वजह है कि कल तक किसी चिकित्सक के यहां कंपाउंडर का काम करने वाले लोग अलग अपना क्लिनिक खोल कर चिकित्सक बन बैठे हैं. इस बाबत प्रभारी जिला पदाधिकारी हरिहर प्रसाद ने बताया कि शीघ्र ही ऐसे चिकित्सकों के विरुद्ध अभियान चला कर कार्रवाई की जायेगी.

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