सामाजिक समरसता में जहर घोल रहा शराब

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छातापुर : प्रखंड अंतर्गत विभिन्न थाना क्षेत्रों में संचालित अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाने में पुलिस सक्षम नहीं हो पा रही है. स्थानीय पुलिस व उत्पाद विभाग की उदासीनता का नतीजा है कि क्षेत्र में दर्जनों की संख्या में अवैध शराब की भट्ठियां चलायी जा रही हैं. सैकड़ों लीटर देसी शराब का निर्माण […]

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छातापुर : प्रखंड अंतर्गत विभिन्न थाना क्षेत्रों में संचालित अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाने में पुलिस सक्षम नहीं हो पा रही है. स्थानीय पुलिस व उत्पाद विभाग की उदासीनता का नतीजा है कि क्षेत्र में दर्जनों की संख्या में अवैध शराब की भट्ठियां चलायी जा रही हैं. सैकड़ों लीटर देसी शराब का निर्माण कर आसान मूल्यों पर लोगों को उपलब्ध कराया जा रहा है.

नतीजतन किशोर वर्ग से लेकर युवा व प्रौढ़ नशे की चपेट में आ कर सामाजिक समरसता में जहर घोलने का काम कर रहे हैं. ऐसा नहीं है कि व्यापक पैमाने पर संचालित अवैध शराब भट्ठियों की जानकारी स्थानीय पुलिस को नहीं है.इसके बावजूद पुलिस इन भट्ठियों को बंद कराने की दिशा में ठोस पहल नहीं कर पा रही है.

कारण जो भी हो, हैरत कि बात है कि सिर्फ भीमपुर थाना क्षेत्र के जीवछपुर व भीमपुर पंचायत की ही बात करें तो इन दोनों पंचायतों में ही चार दर्जन से अधिक शराब भट्ठी संचालित है. इसके अलावे छातापुर थाना क्षेत्र के सोहटा एवं माधोपुर पंचायत में भी कई शराब की भट्ठी अवैध रूप से संचालित हैं.हालांकि शिकायत के आलोक में वरीय पदाधिकारी के निर्देश पर स्थानीय पुलिस द्वारा कुछ जगहों पर छापेमारी भी की गयी, जिसमें पुलिस को कोई खास सफलता हासिल नहीं हुआ.

लोग बताते हैं कि यह छापेमारी सिर्फ खानापूर्ति के लिए की जाती है. जबकि पुलिस की मानें तो अधिकतर शराब भट्ठियों का संचालन महिलाओं के हाथ में रहता है . जहां महिला पुलिस के बिना छापे मारी की कार्रवाई अधूरी रह जाती है. सामाजिक समरसता हो रही प्रभावितलोगों कि मानें तो सहज व सरल तरीके से अवैध देसी शराब की उपलब्धता के कारण किशोर वर्ग में भी नशे की लत बढ़ती जा रही है, जो सभ्य समाज व परिवार के लिए चिंता का विषय है.

जीवन के इस महत्वपूर्ण पड़ाव में भटक रहे किशोर व युवाओं में नशेड़ी बनने कि प्रवृत्ति उसके भविष्य के लिए खतरनाक तो है ही, समाज के लिए भी किसी त्रासदी से कम नहीं है. चूंकि नशे का सेवन करने के बाद शोर शराबा व हंगामा करना उसका उदेश्य हो जाता है. आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने से भी वे नहीं चूकते. नतीजतन पुलिस के समकक्ष विधि व्यवस्था की समस्या भी मुंह बाये खड़ी रहती है. नशे के प्रचलन के कारण खासकर महिला हिंसा में इजाफा हुआ है.

नशे की लत में पड़ चुके अपने ही लोगों से घरेलू महिलाएं आतंकित रहा करती है. गुणवत्ता का अभाव है जानलेवाजानकारों कि मानें, तो अवैध शराब भट्ठी में निर्मित देशी शराब पीयक्कड़ों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है. यहां निर्माण के दौरान मानक व मात्रा की अनुभवहीनता रहती है और शराब जहरीला भी हो सकता है. जहरीली शराब सेवन करने से मौत की कई घटनाएं घटित होने का मामला देखा जा रहा है. पर, नशे का आदि हो चुके ऐसे लोग खासकर गरीबों द्वारा इस देशी शराब के सेवन पर रोक नहीं लगाया गया, तो आने वाला कल और भी भयानक हो सकता है.

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