सुपौल: जाम की समस्या से कराहता शहर, प्रशासन उदासीन
सुपौल: जाम की समस्या से कराहता शहर, प्रशासन उदासीन फोटो – 17,18कैप्सन – रेलवे क्रासिंग पर लगा जाम, शहर की सड़कों पर पसरा अतिक्रमणसुपौल जिला मुख्यालय स्थित सदर बाजार इन दिनों जाम की समस्या से बूरी तरह जूझ रहा है. बाजार में व्याप्त अतिक्रमण व वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण चौक चौराहों पर अक्सर […]
सुपौल: जाम की समस्या से कराहता शहर, प्रशासन उदासीन फोटो – 17,18कैप्सन – रेलवे क्रासिंग पर लगा जाम, शहर की सड़कों पर पसरा अतिक्रमणसुपौल जिला मुख्यालय स्थित सदर बाजार इन दिनों जाम की समस्या से बूरी तरह जूझ रहा है. बाजार में व्याप्त अतिक्रमण व वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण चौक चौराहों पर अक्सर जाम की स्थिति उत्पन्न होती है. जाम की समस्या से आम शहरी हलकान हैं. इन सबके बीच पुलिस व प्रशासन का रवैया बिल्कुल उदासीन दिख रहा है. जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण है कि जिला बनने के 24 साल बीत जाने के बावजूद भी इस शहर में ट्रेफिक पुलिस की तैनाती नहीं की गयी है और ना ही सड़कों पर अमर बेल की तरह फैलते अतिक्रमण से अंकुश लगाने हेतु कोई कारगर कदम उठाये जा रहे हैं. जिससे समस्या दिन व दिन परवान चढ़ती जा रही है. यही कारण है कि लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है. बेरोक टोक लगती है फुट कर दुकानें शहर के तकरीबन सभी चौक चौराहों व प्रमुख सड़कों पर हर दिन अतिक्रमण कारियों द्वारा हजारों की संख्या में फुट कर दुकाने लगायी जाती है. इसके अलावा सड़क पर यत्र तत्र फल – सब्जी के रेहड़ी की भी भरमार होती है. स्थायी दुकानदार भी अपनी सीमा के बाहर दुकान बढ़ाने से गुरेज नहीं करते. ऐसे लोगों के मनमाने रवैये के कारण जहां महावीर चौक, लोहिया नगर, स्टेशन चौक जैसे प्रमुख चौराहों की स्थित दूभर होती जा रही है. वहीं प्रमुख सड़कों पर फल- सब्जी व अन्य चीजों की दुकान पसरे होने की वजह से यह सड़के दिन व दिन सिकुड़ती जा रही है. रेलवे क्रासिंग पर लगता है घंटो जाम शहर के प्रमुख चौक लोहिया नगर स्थित रेलवे क्रासिंग पर दिन भर में कई बार जाम की समस्या उत्पन्न होती है. गौरतलब है कि यह क्रासिंग शहर के लिए काफी महत्वपूर्ण है. चूंकि इस रेल क्रासिंग के एक ओर जहां मुख्य बाजार अवस्थित है. वहीं दूसरी ओर समाहरणालय, प्रखंड कार्यरलय, बस पड़ाव, पुलिस लाईन जैसे दर्जनों सरकारी कार्यालय के अलावा प्रमुख कॉलेज व स्कूल संचालित हैं. एस एच 76 व फोर लेन एन एच 57 का संपर्क पथ होने की वजह से इस रेलवे क्रासिंग से दिन भर में हजारों वाहन गुजरते हैं. मालूम हो कि सुपौल से राघोपुर की ओर जाने व आने वाली छह जो्रडि़यां ट्रेन की वजह से तकरीबन हर दो तीन घंटे बाद इस रेल फाटक को बंद किया जाता है. फाटक बंद होते ही वाहनों की यहां लंबी कतार लग जाती है और जाम की स्थिति भी उत्पन्न होती है. प्रशासन द्वारा इसे नियंत्रित करने हेतु स्थायी तौर पर पुलिस की व्यवस्था नहीं की गयी है. जिसका खामियाजा जाम में फंसे वाहन चालकों को उठाना पड़ता है. स्थानीय नागरिकों द्वारा उक्त रेलवे क्रासिंग पर फ्लाई ओवर निर्माण की मांग वर्षों से की जा रही है. पूर्ववर्ती जिलाधिकारी कुमार आनंद द्वारा इस बाबत रेल विभाग को पत्र भी लिखा गया था. बावजूद प्रशासन व रेल मंत्रालय द्वारा इस दिशा मंे किसी प्रकार का पहल नहीं किया गया. प्रशासनिक लापरवाही से लोगों में है खीझ जिला बनने के बाद बढ़ती आबादी व जाम की समस्या के मद्देनजर आम शहरियों द्वारा उच्चाधिकारियों से कई बार ट्रेफि क पुलिस के तैनाती की मांग की जाती रही है. लेकिन कभी सुरक्षा बल की कमी तो कभी प्रशिक्षित ट्रेफि क पुलिस की अनुपलब्धता के बहाने उच्चाधिकारी अपना पल्ला झाड़ते रहे हैं. जबकि इस रेल क्रासिंग पर अक्सर लगने वाल े जाम का शिकार खुद अधिकारी व मरीजों को ले जाया जा रहा एंबुलेंस भी होता है. बावजूद प्रशासन उदासीन व संवेदनहीन बना हुआ है. जिससे आम लोगों की खीझ बढ़ती जा रही है.
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