बाल विवाह प्रकरण : लीपापोती में जुटा प्रशासन
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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सुपौल: जिला मुख्यालय से सटे बाबा तिलहेश्वर मंदिर में शुक्रवार की रात बाल विवाह की रस्म पूरी कर परिजन वापस चले गये और उसके बाद पुलिस और जिला बाल अधिकार संरक्षण पदाधिकारी लकीर पीटते रहे. वहीं इस मामले में प्रशासन लीपापोती के प्रयास में जुट गया है. डीएम एलपी चौहान के हस्तक्षेप के बाद बाल […]
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सुपौल: जिला मुख्यालय से सटे बाबा तिलहेश्वर मंदिर में शुक्रवार की रात बाल विवाह की रस्म पूरी कर परिजन वापस चले गये और उसके बाद पुलिस और जिला बाल अधिकार संरक्षण पदाधिकारी लकीर पीटते रहे. वहीं इस मामले में प्रशासन लीपापोती के प्रयास में जुट गया है. डीएम एलपी चौहान के हस्तक्षेप के बाद बाल अधिकार संरक्षण पदाधिकारी गोपाल कुमार ने पुलिस के साथ रात करीब 02:00 बजे मंदिर का दौरा किया तथा निरीक्षण के नाम पर रस्म अदायगी पूरी की. इसके बाद मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने बाल संरक्षण आयोग की सदस्य ललिता जायसवाल को फोन कर उन पर ही गलत शिकायत लेने का आरोप मढ़ दिया. वही सदर एसडीएम राजीव सिन्हा ने फोन नहीं रिसीव करने की बात से साफ इनकार किया है.
डीएम के हस्तक्षेप के बाद पहुंची पुलिस
बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य ललिता जायसवाल ने बताया कि लगातार कई बार सरकारी नंबर पर कॉल करने के बावजूद सदर एसडीएम राजीव रंजन सिन्हा ने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा. इसके बाद डीएम एलपी चौहान को मामले से अवगत कराया गया. डीएम के हस्तक्षेप के बाद जिला बाल अधिकार संरक्षण पदाधिकारी गोपाल कुमार ने पुलिस के साथ बाबा तिलहेश्वर मंदिर का दौरा किया. उस वक्त वहां तीन शादियां हो रही थीं. अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान शादी कर रहे तीनों जोड़े बालिग थे.
पांच घंटे के बाद पहुंचने का क्या मतलब
पुलिस को बाल विवाह की सूचना रात करीब 08:30 बजे दी गयी और डीएम के हस्तक्षेप के बाद पुलिस करीब 02:00 बजे बाल अधिकार संरक्षण पदाधिकारी के साथ मंदिर पहुंची. निरीक्षण के बाद करीब 02:30 बजे बाल संरक्षण आयोग की सदस्य श्रीमती जायसवाल को फोन कर गलत शिकायत लेने का आरोप लगा दिया गया. मालूम हो कि शुक्रवार को हिंदू विवाह के लिए अंतिम लगA था. वैसे ही मंदिरों में विवाह ‘चट मंगनी -पट ब्याह’ की तर्ज पर होता है. इस पर से विवाह के लिए इस लगA की आखिरी तिथि होने पर विवाह कराने में कितना समय लगा होगा, सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है. ऐसे में सवाल है कि आखिर सूचना के पांच घंटे बाद मंदिर पहुंचने का क्या मतलब है.
एसडीएम को नहीं है प्रावधानों की जानकारी
बाल संरक्षण आयोग की सदस्य ललिता जायसवाल द्वारा सरकारी नंबर पर संपर्क साधने पर जवाब नहीं देने के मामले में एसडीएम राजीव रंजन सिन्हा ने कहा है कि उनका नंबर हमेशा खुला रहता है. ऐसे में कॉल का जवाब नहीं देने का सवाल ही नहीं उठता है. वहीं बाल विवाह की सूचना पर बिना मजिस्ट्रेट आदेश के कार्रवाई नहीं करने के बाबत उन्होंने कहा कि मुङो प्रावधानों की पूर्ण जानकारी नहीं है. पर, नैतिक तौर पर ऐसा नहीं हो सकता है. अगर कोई पुलिस अधिकारी क्राइम होता देखे तो स्वत: संज्ञान से भी कार्रवाई कर सकता है. ऐसे में सूचना मिलने पर पुलिस को तत्परता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए थी. मजिस्ट्रेट पुलिसिया कार्रवाई के उपरांत मामला सही पाये जाने पर दोषी के विरुद्ध कार्रवाई कर सकता है.
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