51 वर्षों से दुर्गा मंदिर में प्रतिमा स्थापित कर होती है माता की पूजा
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Oct 2019 8:36 AM
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इंद्रभूषण, कटैया-निर्मली : सुपौल- पिपरा मुख्य मार्ग 327ई पर निर्मली बाजार स्थित दुर्गा मंदिर प्रखंड समेत आसपास के लोगों का आस्था एवं श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है. करीब पांच दशक पूर्व इस मंदिर की स्थापना ग्रामीणों द्वारा की गई थी. निर्मली और आसपास के क्षेत्रों से ही नहीं बल्कि दूरदराज से भी माता के […]
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इंद्रभूषण, कटैया-निर्मली : सुपौल- पिपरा मुख्य मार्ग 327ई पर निर्मली बाजार स्थित दुर्गा मंदिर प्रखंड समेत आसपास के लोगों का आस्था एवं श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है. करीब पांच दशक पूर्व इस मंदिर की स्थापना ग्रामीणों द्वारा की गई थी. निर्मली और आसपास के क्षेत्रों से ही नहीं बल्कि दूरदराज से भी माता के दर्शन और उनके दरबार में माथा टेकने के लिए यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है.
ऐसी मान्यता है कि मां के दरबार में यदि कोई भी भक्त सच्चे मन से उनकी पूजा अर्चना करते हैं तो मां उसकी मनोकामना अवश्य पूरी करती है. इसी को लेकर यहां सुबह से लेकर शाम तक पूजा-अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं की इतनी भीड़ हो जाती है. ग्रामीणों की मानें तो यहां बहुत पूर्व एक पीपल का पेड़ था. वह पेड़ आज भी मौजूद है. लेकिन माता दुर्गा का मंदिर वहां से कुछ दूर बन गया है.
सन 1968 ई में फूस के घर में प्रतिमा स्थापित कर शुरू की गई थी माता की पूजा अर्चना : ग्रामीण नोखे लाल मंडल एवं महावीर चौधरी ने बताया कि इस पीपल के पेड़ के समीप शाम होते ही आसपास सुगंधित हो जाता था. परंतु लोग इस ओर ध्यान नहीं देते थे.
उन्होंने बताया कि गांव के ही बच्चा साह को स्वप्न आया कि तुम पीपल के नीचे पूजा करो. परंतु उसने स्वप्न समझ कर इस बात को अपने अंदर ही रखा और जब दुर्गापूजा का समय नजदीक आया शाम ढलते ही इस पीपल के नीचे अजीब तरह की आवाज सुनाई पड़ रही थी. उन्होंने बताया कि जब गांव के लोग वहां पहुंचे तो वहां कुछ दिखाई नहीं दिया. सिर्फ एक अलग प्रकार की सुगंध आसपास को सुगंधित कर रहा था.
यह घटना दो-चार दिन तक चलती रही. बाद में ग्रामीणों की सहयोग से पीपल वृक्ष के समीप 1968 ई में एक फुस का घर में माता दुर्गा का प्रतिमा बच्चा साह के द्वारा बना कर पूजा-अर्चना शुरू कर दिया गया. बच्चा सा की मृत्यु हो चुकी है. अब स्वर्गीय बच्चा शाह के पुत्र रामदेव साह द्वारा अभी भी मां दुर्गा की पूजा अर्चना की जाती है.
बच्चा साह द्वारा सबसे पहले प्रतिमा की गई थी स्थापित : जानकारी देते रामदेव साह ने बताया कि उनके पिताजी को स्वप्न आया था. पिताजी के द्वारा ही यहां सबसे पहले प्रतिमा का निर्माण कराया गया था. उस समय उनकी उम्र मात्र 05 वर्ष की थी. जब किसी भक्तों द्वारा मूर्ति निर्माण नहीं कराया जाता है तो स्वयं प्रतिमा निर्माण का खर्च वहन करते हैं.
दो दिनों तक होगा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन
पूर्व जिला परिषद सह दुर्गा पूजा मेला सचिव हरिनंदन मंडल ने बताया कि वर्षों से यहां मेला बहुत धूमधाम लगाया जाता है. इस बार भी मनाया जा रहा है. नवमी एवं दशमी 02 दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया है.
मेला कोषाध्यक्ष मणिलाल चोधरी और मेला संरक्षक टेकनारायण मंडल, बिक्रम बहादुर मेहता, नखेलाल मंडल, पूर्व शिक्षक भागवत प्रसाद मंडल एवं मेला सदस्य बंदेलाल बिहंगम, ब्रजभूषण मंडल, शिव नारायण मंडल, जय प्रकाश सरदार, शिव शंकर मंडल, लड्डु लाल मंडल, चंदन कुमार मंडल, डॉ उमाशंकर मंडल, ब्रजेंद्र कुमार मंडल, राजेश कुमार मंडल, गुनेश्वर सादा सहित समस्त ग्रामीण माता की पूजा एवं मेला की सफलता में जुटे हैं.
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