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विधि विधान से मां दुर्गा के पंचम स्वरूप स्कंदमाता की पूजा-अर्चना

Updated at : 04 Oct 2019 8:35 AM (IST)
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विधि विधान से मां दुर्गा के पंचम स्वरूप स्कंदमाता की पूजा-अर्चना

सुपौल : नवरात्रा के मौके पर गुरुवार को मां दुर्गा के पंचम स्वरूप स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की गयी. मौके पर मंदिरों के साथ ही घरों में भी विधि-विधान के साथ मां भगवती की आराधना की गयी. जिला मुख्यालय स्थित बड़ी दुर्गा मंदिर, गांधी मैदान मंदिर एवं माल गोदाम में पंडितों के द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के […]

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सुपौल : नवरात्रा के मौके पर गुरुवार को मां दुर्गा के पंचम स्वरूप स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की गयी. मौके पर मंदिरों के साथ ही घरों में भी विधि-विधान के साथ मां भगवती की आराधना की गयी. जिला मुख्यालय स्थित बड़ी दुर्गा मंदिर, गांधी मैदान मंदिर एवं माल गोदाम में पंडितों के द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा व आरती आदि का कार्यक्रम संपन्न किया गया.

लाउडस्पीकर पर गूंज रहे माता के भजन व मंत्रों से माहौल भक्तिमय होता जा रहा है. माल गोदाम सहित अन्य मंदिरों की भव्य सजावट की जा रही है. बड़ी दुर्गा स्थान निराला नगर के पंडित वेदाचार्य चिरंजीव मिश्र ने बताया कि शुक्रवार को षष्ठी पूजा के अवसर पर सुबह 06 बजे विल्वाभि मंत्रणम होगा एवं विल्व वृक्ष का पूजन किया जायेगा.
जिसके बाद भोग व आरती की जायेगी. शनिवार की सुबह महास्नान के बाद पत्रिका प्रवेश एवं महासप्तमी पूजन व देवी का प्राण प्रतिष्ठा विधि-विधान के साथ किया जायेगा. पुष्पांजलि के बाद प्रधान छाग परीक्षा व बलि परीक्षा की जायेगी. सप्तमी को भक्तों के दर्शन के लिये मंदिरों का पट खोल दिया जायेगा.
आज होगी माता कात्यायनी की पूजा :
नवरात्र के अवसर पर श्रद्धालुओं ने गुरुवार को माता स्कंदमाता की पूजा अर्चना की. सुबह से श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचने लगे. शुक्रवार को माता कात्यायनी की पूजा की जायेगी. आचार्य पंडित धर्मेंद्रनाथ मिश्र ने बताया कि भगवती कात्यायनी की भक्ति व उपासना से साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चारों फलों की प्राप्ति होती है.
साथ ही रोग, शोक, संताप, भय आदि सर्वथा विनिष्ट हो जाते हैं. इनका उपासक निरंतर इनके सानिध्य में रहकर परम शांति, सुख व ऐश्वर्य का अधिकारी बन जाता है.
मां कात्यायनी के भक्त इस लोक में स्थित रहकर अलौलिक तेज और प्रभाव से युक्त हो जाता है. आचार्य ने बताया कि माता कात्यानी की आराधना के दौरान साधक को अपना चित्त आज्ञा चक्र में स्थिर करके साधना करनी चाहिए. इसकी उपासना से आज्ञा चक्र स्वतः जागृत हो जाती है.
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