सदर प्रखंड के चौघारा में 12 दिवसीय लोक देवता महोत्सव का हो रहा आयोजन
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 27 Oct 2024 10:03 PM
लोक देवताओं का एक मंच पर जीवन गाथा का प्रस्तुतिकरण अपने आप में है अनोखा- डाॅ एनके यादव
लोक देवताओं का एक मंच पर जीवन गाथा का प्रस्तुतिकरण अपने आप में है अनोखा- डाॅ एनके यादव – सोनाय महाराज केवट जाति के है सुप्रसिद्ध लोक देवता, समाज के लिए हैं प्रेरणाश्रोत – डॉ अमन कुमार सुपौल. सदर प्रखंड अंतर्गत चौघारा में आयोजित 12 दिवसीय लोक देवता महोत्सव में शनिवार को कोसी स्नातक क्षेत्र के विधान पार्षद डॉ एनके यादव का फूल माला व अंगवस्त्र से सम्मानित किया गया. महोत्सव को संबोधित करते हुए डॉ यादव ने कहा कि बिहार में पहली बार लोक देवता महोत्सव देखने को मिल रहा है. महोत्सव के माध्यम से कई लोक देवताओं का एक मंच पर जीवन गाथा का प्रस्तुतिकरण अपने आप में अनोखा व अद्भूत है. मुझे भी इस पावन धरती को नमन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. महोत्सव में मंच पर प्रस्तुत झांकी, गीत व नृत्य का जिक्र करते हुए लोरिक विचार मंच के प्रदेश संयोजक डॉ अमन कुमार ने कहा कि सोनाय महाराज केवट जाति के सुप्रसिद्ध लोक देवता हैं. वे समाज के लिए प्रेरणाश्रोत हैं. जिनके भगता खेलने के समय उनके सेवक द्वारा उनका गीत गाया जाता है. सोनाय महाराज का जन्म 12वीं शताब्दी में मधेपुरा जिला अंतर्गत बेलारी ग्राम में हुआ था. इनके पिता वायसी मड़र थे. उनके प्रिय मित्र यदुवंशी लोक देव खेदन महाराज थे. मोरंग की लड़ाई में खेदन महाराज ने सोनाय महाराज की सहायता की थी. सोनाय महाराज की एक प्रसंग का जिक्र करते हुए डॉ अमन कुमार ने कहा कि एक बार दरभंगा राज दरबार में राजा के हाथ से उनका पालतू बाज छूट कर उड़ गया. उसे पकड़ने के अनेक प्रयत्न किए गए. लेकिन सफलता नहीं मिली. सोनाय की कृपा से राजा का बाज वापस हुआ. ऐसी देवी शक्ति के कारण राजा ने उनको मुंह मांगा दान मांगने को कहा तब सोनाय ने अपने केवट जाति के कल्याण के लिए राजा के कृपा का वचन मांगा. राजा ने स्वीकार करते हुए उस दिन से केवट जाति के लिए विशेष ध्यान देने लगे. उनके गांव बेलारी में सोनाय महाराज के गहवर बनाये गये और गहवर के खर्च के लिए राजा की ओर से जागीर दी गई. जिसकी मालगूजारी अभी तक नहीं लगती है. भौन टेकठी, कटैया, अमहा, अंदौली, पथरा, बैंगहा, बेलारी, हरदी आदि गांव में सोनाय महाराज के प्रसिद्ध गहवर है. इन गांव में पूर्व जमींदारों तथा राजाओं द्वारा जो जागीर दी गई थी. वह आज भी है. महोत्सव में ईं बद्री यादव, भगवान दत्त यादव, गणेश यादव, शंभू यादव, कृष्ण कुमार, नरेश राम, फुलेंद्र यादव, मोहन यादव, नागो साह, परमेश्वरी यादव, जमलेश्वरी यादव, बेचन साह, लूसो शर्मा, शशि मंडल, सुधीर यादव, सत्यनारायण यादव, अशोक यादव, सतीश कुमार, सिकेन्द्र यादव, ललित यादव, रामचन्द्र साह, सुखसेन यादव आदि का सहयोग सराहनीय है.
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