कोसी की धारा में विलीन हुए दर्जनों घर

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सुपौल : कोसी नदी की ऊफनती जलधारा ने एकबार फिर लोगों को सकते में डाल दिया है. बाढ़ व कटाव की कहर से जिले भर के कई पंचायतों में तबाही की स्थिति बनी हुई है. कोसी की तेज कटाव ने एक सौ से ज्यादा घर कोसी की धारा में विलीन हो चुका है. जिला प्रशासन […]

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सुपौल : कोसी नदी की ऊफनती जलधारा ने एकबार फिर लोगों को सकते में डाल दिया है. बाढ़ व कटाव की कहर से जिले भर के कई पंचायतों में तबाही की स्थिति बनी हुई है. कोसी की तेज कटाव ने एक सौ से ज्यादा घर कोसी की धारा में विलीन हो चुका है. जिला प्रशासन के आदेश के बावजूद स्थानीय अधिकारियों द्वारा सरकारी स्तर पर पीड़ित परिवारों की सुधि नहीं ली जा रही है. जिस कारण सैंकड़ों लोग खुले आसमान में बाल-बच्चे, मवेशी व अनाज लेकर रहने पर विवश हैं. आवाजाही की सुविधा नहीं रहने के कारण कई परिवारों का सब कुछ नदी में विलीन हो गया. बावजूद इसके स्थानीय प्रशासन द्वारा समुचित तरीके से सरकारी नाव की व्यवस्था नहीं करायी जा सकी है.

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जनप्रतिनिधियों ने लिया जायजा : पीड़ित परिवारों की सूचना पर बुधवार को भाजपा नेता मिथिलेश यादव व राजद नेता अभिषेक बबलू ने कटाव स्थल का जायजा लिया. जायजा के उपरांत जनप्रतिनिधियों ने बताया कि सरकार द्वारा कोसी की समस्या से लोगों को निजात दिलाने के नाम पर अरबों रुपये उड़ाये जाते हैं. लेकिन कोसी वासियों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है. उन्होंने बताया कि मरौना प्रखंड के घोघररिया पंचायत में खोखनाहा महादलित टोला में 60-70 घर, किसनपुर प्रखंड के दुबियाही गांव में 15-20 घर नदी में विलीन हो चुका है. सामाजिक कार्यकर्ता इंद्रजीत कुमार ने जिला प्रशासन से मांग किया है कि बाढ़ की समस्या से जूझ रहे महादलित लोगों को खाने के लिए तत्काल शिविर की व्यवस्था करायी जाये. उनलोगों को समुचित सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है.
ऊंचे स्थान की तलाश कर रहे पीड़ित
स्थानीय प्रशासन बरत रहा उदासीनता
पीड़ित परिवारों ने बताया कि नदी की कटाव की सूचना पर दो दिन पूर्व स्थानीय मुखिया के साथ अंचलाधिकारी भी पहुंचे. साथ ही वस्तुस्थिति देखने के उपरांत बैरंग वापस लौट गये. अंचलाधिकारी के आगमन पर पीड़ित परिवारों ने सोचा की अब उनलोगों के लिए समुचित व्यवस्था उपलब्ध करा दी जायेगी. लेकिन अंचलाधिकारी व पंचायत के मुखिया द्वारा इस दिशा में किसी प्रकार का पहल नहीं किया जा रहा है. जिस कारण स्थानीय लोगों में आक्रोश की स्थिति बनी हुई है. बताया कि अंचलाधिकारी के देर से आने के कारण मौके पर उपस्थित पीड़ित परिवारों द्वारा अंचल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी किया गया.
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