बड़ी रेल लाइन की ट्रेन देखने को तरस रही निगाहें

Published at :07 Feb 2018 5:29 AM (IST)
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बड़ी रेल लाइन की ट्रेन देखने को तरस रही निगाहें

बड़ी रेल लाइन की ट्रेन देखने को तरस रही निगाहें अमान परिवर्तन. 25 दिसंबर 2016 से सहरसा-थरबिटिया के बीच बंद है ट्रेनों का परिचालन वर्ष 2003 में हुआ था रेल महासेतु एवं अमान परिवर्तन का शिलान्यास मार्च 2017 तक था सहरसा से बरूआरी तक ट्रेन चलाने का लक्ष्य अमान परिवर्तन नहीं होने से लोगों में […]

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बड़ी रेल लाइन की ट्रेन देखने को तरस रही निगाहें

अमान परिवर्तन. 25 दिसंबर 2016 से सहरसा-थरबिटिया के बीच बंद है ट्रेनों का परिचालन
वर्ष 2003 में हुआ था रेल महासेतु एवं अमान परिवर्तन का शिलान्यास
मार्च 2017 तक था सहरसा से बरूआरी तक ट्रेन चलाने का लक्ष्य
अमान परिवर्तन नहीं होने से लोगों में है असंतोष
सुपौल : पूर्व मध्य रेलवे के फारबिसगंज-सहरसा रेलखंड के बीच अमान परिवर्तन का कार्य मंथर गति से चल रहा है. रेल प्रशासन की उदासीन रवैये के कारण धीमी गति से हो रहे अमान परिवर्तन कार्य को लेकर स्थानीय लोगों का धैर्य अब टूटने लगा है. अमान परिवर्तन के बाबत कई वृद्ध प्रबुद्धों का कहना है कि बचपन से उनकी दिल्ली तमन्ना रही थी कि काश इस क्षेत्र के लोगों को बड़ी रेल लाइन की सुविधा उपलब्ध होती, साथ ही उक्त रेल लाइन पर ट्रेनों की सीटी बजती. लेकिन अमान परिवर्तन कार्य के काफी समय बीत जाने के बाद भी अब तक उनलोगों का सपना पूरा नहीं हो पाया है. सहरसा-बरूआरी के बीच कार्य प्रारंभ होने के एक वर्ष से अधिक का समय बीतने के बावजूद केवल 15 किलोमीटर का अमान परिवर्तन कार्य तकरीबन पूरा हो चुका है.
लेकिन जब तक इस रेलखंड में बड़ी रेल लाइन के ट्रेनों की सीटी नहीं गूंजती रेल मंत्रालय के सारे दावे बेकार साबित हो रहे हैं. लोगों ने बताया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के द्वारा बड़ी रेल लाइन की घोषणा के बाद से ही इस क्षेत्र में बड़ी लाइन पर ट्रेनों की सीटी सुनने का इंतजार लोगों के जेहन में है. यहां तक कि लोग सहरसा-फारबिसगंज के बीच अमान परिवर्तन के दौरान सहरसा से सुपौल के बीच बड़ी रेल लाइन कार्य शुरू होने के बाद अब सहरसा से गढ़बरूआरी के बीच पहले चरण के कार्य पूरा होने को लेकर आशा की टकटकी लगाये हुए हैं.
लोगों में है असंतोष
स्थानीय जयवीर झा, प्रतापेंद्र सिंह, सुरेश्वर सिंह, राघवेंद्र सिंह, सुखदेव झा, गणेश चंद्र वर्मा, गजेंद्र सिंह, सुरेश प्रसाद सिंह, संजय कुमार वर्मा, प्रो सुरेंद्र झा सहित अन्य ने बताया कि उक्त रेलखंड के अमान परिवर्तन की घोषणा से पूर्व सहरसा से थरबिटिया तक छोटी लाइन पर रेल का परिचालन हो रहा था. लेकिन हैरान करने वाली बात तो यह है कि करीब 37 किलोमीटर सहरसा-थरबिटिया के रेलखंड की दूरी में अमान परिवर्तन कार्य को तीन भागों में बांट दिया गया. साथ ही कार्य अविलंब पूर्ण करायी जा सके इसे लेकर चरणबद्ध तरीके से कार्य की रूपरेखा तैयार की गयी.
लेकिन संबंधित कार्य एजेंसी द्वारा मंथर गति से कार्य को अंजाम दिये जाने के कारण अमान परिवर्तन का कार्य पूर्ण नहीं किया जा सका है. जिस कारण इस क्षेत्र के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. बताया कि रेल प्रशासन द्वारा पहले चरण के अमान परिवर्तन कार्य के तहत गढ़बरूआरी से सहरसा मात्र 15 किलोमीटर रेलखंड का निर्माण निर्धारित किया गया. लेकिन एक वर्ष से अधिक का समय बीतने के बाद भी अभी भी कार्य अधर में लटका हुआ है. वहीं रेल विभाग द्वारा स्थानीय लोगों की संतुष्टि के लिये सहरसा से फारबिसगंज बीच जहां-तहां कार्य को शुरू कर दिया गया.
लेकिन स्थिति को देख ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आगामी पांच वर्षों में भी कार्य पूर्ण नहीं हो पायेगा. हालांकि रेल सूत्रों की मानें तो उक्त रेलखंड पर कार्य में लगे एजेंसी को अमान परिवर्तन के दौरान कहीं-कहीं पुलिया का निर्माण, बारिश व कड़ाके की शीतलहर के साथ-साथ कई समस्याओं का सामना करना पड़ा है. लोगों को उम्मीद है कि पहले चरण का कार्य मार्च 2018 तक पूर्ण हो जायेगा. अब देखना है कि लोगों की उम्मीदों पर किस हद तक रेल मंत्रालय खड़ा उतर पाता है.
25 दिसंबर 2016 को हुआ था मेगा ब्लॉक
सूत्रों की मानें तो सहरसा से गढ़बरूआरी तक पहले चरण के तहत 25 दिसंबर 2016 से ही मेगा ब्लॉक कर कार्य शुरू किया गया. वहीं सरकार द्वारा यातायात के मद्देनजर वैकल्पिक व्यवस्था नहीं किये जाने के कारण क्षेत्र के लोगों को प्रमंडलीय मुख्यालय सहरसा तक आवाजाही में आर्थिक दोहन का भी शिकार होना पड़ रहा है.
ग्रामीणों के मुताबिक इस रेलखंड पर जब से ट्रेनें बंद हुई है, इस दौरान गढ़बरूआरी, बरैल, जगतपुर, सिमरा, कैंप टोला, सोनक, कजरा, एकमा, कटैया, मोहनिया, गंगापट्टी, कठमासी, लौकहा सहित अन्य गांवों के लोगों को काफी दूरी तय कर परसरमा स्थित एनएच 327 ई के सहारे सहरसा जाने के लिये निजी बस की सेवा लेनी पड़ रही है. जिसके कारण लोगों को दोहरी मार का शिकार होना पड़ रहा है.
सहरसा से गढ़बरूआरी के बीच पहले चरण का अमान परिवर्तन कार्य इसी वित्तीय वर्ष में ही पूरा कर लेने की उम्मीद है. सीआरएस के निरीक्षण के बाद हरी झंडी मिलते ही मार्च 2018 के भीतर ही बड़ी रेल लाइन पर ट्रेनों का परिचालन शुरू कर दिया जायेगा.
आरके जैन, मंडल रेल प्रबंधक, पूर्व मध्य रेलवे
लोकसभा चुनाव में बन सकता है मुद्दा
गौरतलब है कि लोकसभा का चुनाव अगले वर्ष 2019 में होना तय है. इस बीच वर्ष 2003 में अमान परिवर्तन के शिलान्यास के बाद से लोगों की केंद्र सरकार के इस महत्वाकांक्षी योजना पर नजरें टिकी है. करीब 15 साल बीत जाने के बाद भी अमान परिवर्तन पूरा नहीं होने से लोगों में असंतोष व्याप्त है. आम जनमानस में इस बात को लेकर भी चर्चा का बाजार गर्म है कि केंद्र सरकार के रेल मंत्रालय द्वारा लोकसभा चुनाव तक सहरसा-फारबिसगंज एवं सरायगढ़-सकरी के बीच बड़ी रेल लाइन निर्माण का काम पूर्ण कर लिया जायेगा. ताकि इसे चुनाव में उपलब्धि के रूप में लोगों के बीच सत्ताधारी दल द्वारा भुनाया जा सके.
लेकिन इसके उलट आलम यह भी है कि अगर लोकसभा चुनाव तक रेलवे विभाग की यह योजना पूर्ण नहीं हुई तो राजनेताओं को चुनाव के वक्त जनता में व्याप्त असंतोष व उनके आक्रोश का शिकार बनना पड़ेगा. इसको लेकर आसपास के लोगों के बीच आक्रोश व्याप्त है.
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