ठंड का कहर जारी, सूर्य की तपिश पर भारी पड़ा पछुआ हवा का दबाव

Published at :12 Jan 2018 6:11 AM (IST)
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ठंड का कहर जारी, सूर्य की तपिश पर भारी पड़ा पछुआ हवा का दबाव

सुपौल : एक पखवारा से लगातार शीतलहर का प्रकोप आम जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है. एक तरफ जहां लोग ठंड के कारण घर से बाहर निकलना मुश्किल प्रतीत होता है. वहीं इसका व्यापक असर रोजमर्रा के आवश्यकताओं पर भी पड़ रहा है. गुरुवार को भी ठंड का कहर पूर्व की तरह ही […]

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सुपौल : एक पखवारा से लगातार शीतलहर का प्रकोप आम जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है. एक तरफ जहां लोग ठंड के कारण घर से बाहर निकलना मुश्किल प्रतीत होता है. वहीं इसका व्यापक असर रोजमर्रा के आवश्यकताओं पर भी पड़ रहा है. गुरुवार को भी ठंड का कहर पूर्व की तरह ही कायम रहा. हालांकि थोड़ी देर के लिये ही सही सूर्यदेव के दर्शन हुए. पछुआ हवा का तेज झोंका सूर्य की लालिमा पर ग्रहण लगाती नजर आयी. लोगों को ठंड का एहसास कराती रही. पिछले दिनों से लगातार पछुआ हवा ने ठंड को और गति देने का काम किया है. गुरुवार को पछुआ हवा का झोंका कुछ अधिक ही असर देखने को मिला.

पिछले दिनों जहां पछुआ हवा की रफ्तार 7.5 किलोमीटर प्रति घंटा की औसत रफ्तार थी. वहीं गुरुवार को हवा की गति करीब 9.5 किलोमीटर प्रतिघंटा दर्ज की गयी. यही कारण है कि सूर्य उगने के बाद भी ठंड का एहसास कम नहीं हुआ. हवा की वजह से कनकनी के कारण लोगों की जिंदगी इन दिनों ठहर सी गयी है.
लगातार बढ़ रही ठंड के कारण लोग अब इससे निजात पाने के लिये त्राहिमाम कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि यही आलम रहा तो लोगों को इसका भारी खामियाजा उठाना पड़ेगा. हालांकि चौक-चौराहों पर प्रशासन के द्वारा कहीं-कहीं अलाव की व्यवस्था देखे जा रहे हैं. लेकिन आबादी के हिसाब से यह अलाव ऊंट के मुंह में जीरा का ही काम कर रहा है. सबसे खराब स्थिति दैनिक मजदूरों की है. जिसे रोजीरोटी के लिये हर रोज देहारी पर काम करना पड़ता है. ऐसे में शीतलहर की कनकनी उन मजदूरों की जिंदगी पर पहाड़ तोड़ रहा है. लेकिन क्या करें पापी पेट का सवाल है. ठंड हो या गर्मी काम तो करना ही पड़ेगा. ग्रामीण क्षेत्रों में भी ठंड ने लोगों को काफी परेशान कर रखा है. खेतीबाड़ी से लेकर मवेशी पालन भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. चारा के लिये भी किसानों को भटकना पड़ रहा है. ठंड से मवेशियों के बचाव के लिये पशुपालकों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है. किसानों का कहना है कि कुछ दिनों तक ठंड का यही हाल रहा तो इससे पशुओं पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है.
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