बांग्ला सावन शुरू, सुलतानगंज से देवघर के लिए उमड़ी कांवरियों की भीड़, 70 किलो की कांवर बनी आकर्षण

सुलतानगंज में आस्था का सैलाब, 70 किलो का कांवर बना आकर्षण
बांग्ला और नेपाली सावन के शुरू होते ही सुलतानगंज में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है. हजारों शिवभक्तों ने गंगा स्नान कर बाबा अजगैबीनाथ का जलाभिषेक किया और देवघर के लिए काँवर यात्रा शुरू कर दी है. 70 किलो की विशेष कांवर आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.
सुलतानगंज(भागलपुर) से शुंभाकर की रिपोर्ट
Sultanganj Shravani Mela 2026: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले की औपचारिक शुरुआत में अभी 11 दिन बाकी हैं, लेकिन सुलतानगंज स्थित बाबा अजगैबीनाथ धाम में आस्था का सैलाब अभी से उमड़ने लगा है. बांग्ला और नेपाली सावन शुरू होने के साथ ही शनिवार को हजारों शिवभक्त उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान कर बाबा अजगैबीनाथ का जलाभिषेक करने पहुंचे. इसके बाद श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगाजल भरकर "हर हर महादेव" और "बोल बम" के जयघोष के बीच पैदल और वाहनों से बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर की यात्रा शुरू की.
श्रावणी मेले से पहले बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या ने साफ संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में सुलतानगंज से देवघर तक कांवर यात्रा अपने चरम पर पहुंचने वाली है.
बांग्ला और नेपाली सावन के साथ बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या
स्थानीय पुरोहितों और कांवरियों के अनुसार, हर साल की तरह इस बार भी बांग्ला और नेपाली पंचांग के अनुसार सावन शुरू होते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु सुलतानगंज पहुंचने लगे हैं.
सुबह से देर रात तक उत्तरवाहिनी गंगा घाट और बाबा अजगैबीनाथ मंदिर परिसर "बोल बम" के नारों से गूंजता रहा. श्रद्धालुओं ने पहले गंगा स्नान किया, फिर बाबा का जलाभिषेक कर पवित्र गंगाजल अपने कांवर में भरकर देवघर के लिए प्रस्थान किया.
Sultanganj Kanwar Yatra 2026: बढ़ती भीड़ के बीच व्यवस्थाओं पर भी उठे सवाल
श्रद्धालुओं ने गंगा घाट और कच्चे कांवरिया पथ पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं होने पर चिंता जताई. उनका कहना है कि रात और तड़के सुबह अंधेरे में गंगा स्नान करने तथा जल लेकर यात्रा शुरू करने में परेशानी होती है.
हालांकि जिला प्रशासन का कहना है कि श्रावणी मेले की तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं. गंगा घाटों की सफाई, कच्चे कांवरिया पथ का समतलीकरण और अन्य जरूरी कार्य लगातार किए जा रहे हैं. प्रशासन का दावा है कि मेले के औपचारिक उद्घाटन से पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएंगी.
एक हाथ से दंड प्रणाम करते हुए बाबाधाम की ओर निकले 75 वर्षीय शिवभक्त
श्रावणी मेले से पहले सुलतानगंज में आस्था की एक ऐसी तस्वीर भी सामने आई, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया.
दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के गोपालपुर गांव निवासी 75 वर्षीय सोमन राय जन्म से दिव्यांग हैं. उनके एक हाथ में केवल एक उंगली ही काम करती है. इसके बावजूद उन्होंने उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरकर दंड प्रणाम करते हुए बाबा बैद्यनाथ धाम जाने का संकल्प लिया है.
सोमन राय का कहना है कि यह यात्रा उनके लिए किसी चुनौती से अधिक श्रद्धा का विषय है. उन्हें विश्वास है कि बाबा भोलेनाथ स्वयं उन्हें अपने धाम तक पहुंचाएंगे. उनका कहना है कि यात्रा के दौरान उन्हें किसी प्रकार की परेशानी महसूस नहीं होती.
पश्चिम बंगाल से पहुंचे शिवभक्त, 70 किलो की कांवर बनी आकर्षण
बांग्ला सावन शुरू होने के साथ पश्चिम बंगाल से भी बड़ी संख्या में शिवभक्त सुलतानगंज पहुंचने लगे हैं.
कोलकाता के हावड़ा से आए 15 श्रद्धालुओं का एक जत्था विशेष आकर्षण का केंद्र रहा. दल के सदस्य बिट्टू मंडल ने बताया कि उनकी टीम उत्तरवाहिनी गंगा से जल लेकर पैदल बाबा बैद्यनाथ धाम जाएगी. इस जत्थे के पास 50-50 किलो वजन की तीन विशेष कांवर हैं, जिन्हें सभी श्रद्धालु बारी-बारी से अपने कंधों पर उठाकर यात्रा करेंगे.
इसी तरह हावड़ा और हुगली से आए आठ श्रद्धालुओं का एक अन्य दल करीब 70 किलो वजन की आकर्षक कांवर लेकर देवघर के लिए रवाना हुआ. इस दल में दो महिला श्रद्धालु भी शामिल हैं.
श्रद्धालुओं दीपांकर, कुणाल, सुजय और राघव ने बताया कि उनकी यात्रा किसी मन्नत के लिए नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है. उनका लक्ष्य बांग्ला सावन की पहली सोमवारी पर बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करना है.
आने वाले दिनों में और बढ़ेगी भीड़
श्रावणी मेले की शुरुआत में अभी कुछ दिन बाकी हैं, लेकिन बांग्ला और नेपाली सावन के कारण सुलतानगंज में श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है. प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बढ़ती भीड़ के बीच सुरक्षा, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और कांवरिया पथ पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना होगा.
यदि समय रहते सभी तैयारियां पूरी हो जाती हैं तो लाखों श्रद्धालुओं की यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुगम और सुरक्षित हो सकेगी.
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लेखक के बारे में
By प्रत्युष प्रशांत
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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