'प्लीज सर, मेरा नाम जुड़वा दीजिए सर...' जब DEO ऑफिस में फूट-फूटकर रोने लगी छात्रा, जानिए पूरा मामला

Updated at : 08 Jan 2024 10:52 PM (IST)
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'प्लीज सर, मेरा नाम जुड़वा दीजिए सर...' जब DEO ऑफिस में फूट-फूटकर रोने लगी छात्रा, जानिए पूरा मामला

भागलपुर जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय में सोमवार को इंटरस्तरीय स्कूल सजौर फतेहपुर की 12वीं कक्षा की छात्रा शबनम फूट-फूट कर रो रही थी. सेंटअप होने के बाद विद्यालय से नाम कट जाने के कारण उसे इंटर की परीक्षा देने से वंचित कर दिया गया है

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प्लीज सर, मेरा नाम जुड़वा दीजिए सर…मैं परीक्षा नहीं दे पाऊंगी सर. 12वीं कक्षा की छात्रा शबनम भागलपुर जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय में सोमवार को यह कह कर फूट-फूट कर रो रही थी. दरअसल, इंटर स्तरीय स्कूल सजौर फतेहपुर की छात्रा शबनम का सेंटअप होने के बाद विद्यालय से नाम काट दिया गया. इस कारण उसे बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) द्वारा आयोजित वार्षिक इंटर की परीक्षा देने से वंचित कर दिया गया है. 10 तारीख से शुरू हो रही 12वीं की प्रायोगिक परीक्षा के लिए जब शबनम का एडमिट कार्ड नहीं आया तो अपना नाम जुड़वाए के लिए अपनी मां के साथ डीईओ कार्यालय पहुंची थी.

छात्रा ने DPO और DEO से लगाई री-एडमिशन की गुहार

शबनम ने डीपीओ नितेश कुमार और डीइओ संजय कुमार के पास जाकर री-एडमिशन की गुहार लगायी, बेटी को फूट-फूट कर रोता देख मां सोनी देवी भी अपने आंसू नहीं रोक पाई. लेकिन इसके बाद भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी. डीइओ संजय कुमार ने बताया कि 10 फरवरी से इंटर की प्रायोगिक विषय की परीक्षा होने वाली है, ऐसी स्थिति में नाम कटने की रिपोर्ट प्रधानाध्यापक के स्तर से बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को भेज दी गयी है. वर्तमान में छात्रा का री-एडमिशन संभव नहीं है.

क्या है मामला

चंदरपुर सजौर निवासी नंदलाल साह और सोनी देवी की पुत्री शबनम करीब एक वर्ष से बीमार रहती है. बीमारी के बावजूद उसने नियमित क्लास करते हुए इंटर की सेंटअप परीक्षा दी. शबनम की मां सोनी देवी ने बताया कि परीक्षा के बाद शबनम की हालत अत्यधिक खराब हो गयी और वह कुछ दिन स्कूल नहीं जा सकी. जब वह शनिवार को स्कूल गयी तो बताया गया कि उसका नाम कट गया है. अब जिला शिक्षा विभाग के कार्यालय जा कर उसे री-एडमिशन की स्वीकृति लेनी होगी.

नहीं मिली री-एडमिशन की स्वीकृति

शबनम अपनी मां के साथ शिक्षा विभाग कार्यालय पहुंची लेकिन यहां पर पदाधिकारियों ने उसे री-एडमिशन की स्वीकृति नहीं दी. वहां से कहा गया कि अब बोर्ड स्तर से ही इस पर विचार किया जा सकता है. हमारे स्तर से इस पर कुछ कर पाना असंभव है. सोनी देवी ने बताया कि बड़ी मुश्किल से वह बेटी को पढ़ा रही है लेकिन उसका भविष्य अधर में चला गया. मायूस हो कर मां-बेटी घर के लिए रवाना हुई.

255 छात्र – छात्राओं का काटा गया है नाम

विद्यालय नहीं आने या सेंटअप परीक्षा नहीं देने के कारण जिले में करीब 255 छात्र-छात्राओं का नाम काटा गया है. अब ऐसे छात्र-छात्राएं फरवरी में होने वाली इंटर की परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे. डीइओ ने बताया कि ऐसे छात्र – छात्राओं के लिए अप्रैल में वार्षिक परीक्षा संभावित है.

75 प्रतिशत उपस्थिति है जरूरी

इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार ने बताया कि बिहार बोर्ड की ओर से सख्त आदेश जारी किया गया है कि जिन बच्चों की उपस्थिति 75 प्रतिशत नहीं हुई है या लगातार स्कूल से अनुपस्थित हैं, उन्हें बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं किया जाए. भले ही वह सेंटअप परीक्षा में शामिल हुआ हो, अगर वह अनुपस्थित है तो उसका नाम काटकर बोर्ड को सूचित करें

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