Skin Care Tips: ठंड के मौसम में स्किन का ऐसे रखें बेहतर ध्यान, भूलकर भी नहीं करें ये काम
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 08 Jan 2023 8:36 AM
ठंड के कारण विभिन्न तरह की अचानक हो जानेवाली बीमारी की चपेट में अब लोग आने लगे हैं. इन्हीं में से एक है बेल्स पाल्सी. इसमें चेहरे का एक हिस्सा अचानक अनियंत्रित हो जाता है. आंखों की पुतलियां नियंत्रण में नहीं रह जाती हैं.
ठंड का मौसम है. तापमान में काफी गिरावट दर्ज की जा रही है. बर्फीली हवाओं के कारण अधिक देर तक बाहर रहना मुश्किल हो रहा है. इस स्थिति में विभिन्न तरह की अचानक हो जानेवाली बीमारी की चपेट में लोग आ रहे हैं. इन्हीं में से एक है बेल्स पाल्सी. इसमें चेहरे का एक हिस्सा अचानक अनियंत्रित हो जाता है. आंखों की पुतलियां नियंत्रण में नहीं रह जाती हैं. होठ टेढ़े होने लगते हैं. इसे चेहरे का लकवा भी कहते हैं. यह सीमित समय के लिए होता है और फिर ठीक हो जाता है. ऐसी स्थिति में मरीज के साथ-साथ उनके परिजन भी हड़बड़ा जाते हैं. ऐसी स्थिति हो, तो हड़बड़ाने की जरूरत नहीं है, बल्कि सावधानी बरतें. चिकित्सक से सलाह लें. वैसे भी ठंड के दिनों में सुबह उठते ही चेहरे पर सीधे पानी का छींटा नहीं मारना चाहिए. हाई बीपी के मरीजों को ठंड में अधिक सावधानी बरतना चाहिए. भागलपुर के मशहूर कंसल्टेंट ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ सनातन कुमार ने शनिवार को प्रभात खबर कार्यालय में यह जानकारी दी.
डॉ कुमार ने बताया कि ह्यूमन पेपीलोमा वायरस-एचपीबी वायरस से मुख कैंसर होता है. इसका प्रसेंटेज कम होता है. यह दो से तीन प्रतिशत लोगों में पाया जाता है. गुटखा, पान व तंबाकू सेवन करने से कैंसर होने की आशंका काफी बढ़ जाती है. सबसे जरूरी है गुटखा व नशीले पदार्थ का सेवन करना छोड़ दें.
कैंसर क्रोनिक एरिटेशन से भी हो सकता है. दांत से गाल व जीभ का बार-बार काटना या कृत्रिम दांत ठीक से नहीं लगने के कारण होता है. मुंह के अंदर छाला, सफेद दाग, लाल दाग व काला दाग आने पर सचेत हो जायें. उन्होंने बताया कि कोई छाला यदि लंबे समय अर्थात 10 दिन से अधिक दिनों तक रहे, तो उसके लिए चिकित्सक से संपर्क जरूर करें. मसूढ़े में सूजन होना, लंबे समय से खून आना या दांत का हीलना भी मुख्य लक्षण है.
डॉ सनातन कुमार ने बताया कि जन्मजात कटे होठ या फटा तालू की सर्जरी को लेकर लोगों में कई तरह की भ्रांति है. इसे दूर करने की जरूरत है. इसका सफल इलाज संभव है. यदि कोई बच्चा इस तरह पैदा होता है, तो तत्काल मैक्सिलोफेशियल सर्जन को दिखाना चाहिए, ताकि वैसे बच्चे का का कम से कम उम्र में ही इलाज हो सके. इससे बोलने की समस्या समय रहते दूर की जा सकती है. इसमें नौ माह से पहले होठ व तालू का प्राइमरी ऑपरेशन हो जाना चाहिए. इससे परिणाम बेहतर आता है.
डॉ कुमार ने बताया कि ओरल एंड क्रेनिया मैक्सिलोफेशियल सर्जरी डेंटल व मेडिकल साइंस का मिश्रण है. इस विभाग से सिर, चेहरा, जबड़ा, मुख व दांत से संबंधित रोग का इलाज व शल्य क्रिया की जाती है. एक्सीडेंट से चेहरे पर हुई समस्या भी इस सर्जरी से दूर हो सकती है. सिर की हड्डी टूट जाना, चेहरे की हड्डी टूट जाना या सॉफ्ट टिश्यू इंज्यूरी होने पर सर्जरी से समाधान संभव है.
उन्होंने बताया कि बिना कैप या दांत के सहारे एक दांत को टूटे दांत की जगह फिक्स कराने में 25 हजार रुपये तक खर्च आता है, जबकि पूरा दांत फिक्स कराने में चार लाख रुपये तक खर्च आता है. इसे जबड़े में कस दिया जाता है.
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