टिकट के दावेदार बड़े नेताओं के दरबार में लगा रहे हाजिरी
Published by : DEEPAK MISHRA Updated At : 08 Oct 2025 10:05 PM
निर्वाचन आयोग द्वारा विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही टिकट के दावेदार सक्रिय हो गए है.टिकट की पैरवी के लिए वे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मिलने लगे हैं और अपने-अपने राजनीतिक दलों के मुख्यालयों पर डेरा जमाए हुए है.एनडीए,महागठबंधन व जनसुराज समेत अन्य पार्टियों में टिकट के दावेदार क्षेत्र को छोड़कर राजधानी में अपना समय बिता रहे है.
प्रतिनिधि,सीवान. निर्वाचन आयोग द्वारा विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही टिकट के दावेदार सक्रिय हो गए है.टिकट की पैरवी के लिए वे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मिलने लगे हैं और अपने-अपने राजनीतिक दलों के मुख्यालयों पर डेरा जमाए हुए है.एनडीए,महागठबंधन व जनसुराज समेत अन्य पार्टियों में टिकट के दावेदार क्षेत्र को छोड़कर राजधानी में अपना समय बिता रहे है. जानकारी के मुताबिक एनडीए व महागठबंधन में टिकट के लिए लॉबिंग भी चल रही है.जिन विधानसभा क्षेत्रों से वर्तमान में पार्टी के विधायक प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, वहां टिकट के नए दावेदारों की संख्या कम है.वही जिन विधानसभा क्षेत्रों में वर्तमान में कोई विधायक नहीं है, वे टिकट चाहने वालों के लिए सबसे ज़्यादा चर्चित क्षेत्र बने हुए है. ऐसे विधानसभा क्षेत्रों से पूर्व विधायक और कई पार्टी कार्यकर्ता टिकट पाने के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा रहे है.पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ,जदयू ,कांग्रेस व राजद की जीती सीटों पर भी इस बार पार्टी के कई दावेदार है.इनमें कई तो काफी मजबूत और प्रभावी दावेदार है. इसके कारण विधायकों की नींद उड़ी हुई है. उन्हें आशंका है कि इनके कारण इस बार उनकी टिकट ही न कहीं कट जाए. इसके बाद बड़े नेताओं के पास उनकी दौड़ शुरू हो गयी है. उनका प्रयास है कि किसी सूरत में उनकी टिकट न कटे. जदयू ने पिछले विधानसभा चुनाव में जीरादेई,बड़हरिया,रघुनाथपुर व महराजगंज सीट पर पर उम्मीदवार उतारे थे.उसे किसी सीट पर सफलता नही मिली.भाजपा ने दरौंदा, सीवान सदर ,गोरेयाकोठी व दरौली सीट पर उम्मीदवार उतारी थी.इनमें दरौंदा व गोरेयाकोठी पर जीत मिली थी.वही भाकपा माले को जीरादेई व दरौली सीट पर सफलता मिली.राजद को सीवान सदर व बड़हरिया सीट से जीत मिली थी.जबकि महराजगंज सीट कॉंग्रेस की झोली में गयी थी. कुछ सीटें तो ऐसी हैं जहां आधे दर्जन से अधिक मजबूत दावेदार है. इन सबने न केवल अपनी दावेदारी ठोकी है, बल्कि सामाजिक समीकरण के आधार पर खुद को सबसे अच्छा उम्मीदवार बताया है.इनमें से कई नाम ऐसे हैं जिन्होंने पिछली बार संबंधित विधायकों की जीत के लिए काम किया था और उसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी. यही विधायकों के लिए समस्या है. जिनके बूते जीते, अब वे ही टिकट के लिए ताल ठोक रहे है. कुछ लोगों की दावेदारी को बड़े नेताओं का संरक्षण भी मिल रहा है. लिहाजा, विधायक परेशान है. उन्हें आशंका है कि इससे उनकी उम्मीदवारी प्रभावित न हो जाए और वे बेटिकट न हो जाएं. इसीलिए पार्टी के बड़े नेताओं के यहां पहुंचने लगे है.
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