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अस्पतालों में नर्सिंग छात्रों के भरोसे होता है इलाज

Updated at : 20 Apr 2025 9:56 PM (IST)
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अस्पतालों में नर्सिंग छात्रों के भरोसे होता है इलाज

रकारी स्वास्थ्य इंतजाम में सुधार के तमाम सरकारी दावों के बावजूद ग्रामीण अस्पतालों में बेहतर इलाज नहीं मिलने से मरीज प्राइवेट चिकित्सकों के यहां इलाज कराने को मजबूर हो रहे हैं.प्रभात खबर की टीम ने रविवार को जिले के अस्पतालों को पड़ताल की तो यह बात सामने आयी की नर्सिंग छात्रों के भरोसे इलाज हो रहा है

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प्रतिनिधि,सीवान. सरकारी स्वास्थ्य इंतजाम में सुधार के तमाम सरकारी दावों के बावजूद ग्रामीण अस्पतालों में बेहतर इलाज नहीं मिलने से मरीज प्राइवेट चिकित्सकों के यहां इलाज कराने को मजबूर हो रहे हैं.प्रभात खबर की टीम ने रविवार को जिले के अस्पतालों को पड़ताल की तो यह बात सामने आयी की नर्सिंग छात्रों के भरोसे इलाज हो रहा है. फोर्थ ग्रेड कर्मचारी इंजेक्शन लगाते नजर आये.ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों में इलाज के बेहतर इंतजाम नहीं मिलने से तकरीबन सौ मीटर की दूरी पर ही प्राइवेट चिकित्सकों के यहां मरीजों की बड़ी संख्या नजर आयी. सदर अस्पताल के एसएनसीयू का एसी खराब होने से कमरे का तापमान 33 डिग्री इमरजेंसी वार्ड में प्रशिक्षित डॉक्टर और स्टाफ नर्सों की कमी के चलते गंभीर मरीजों का इलाज नर्सिंग छात्रों के भरोसे चल रहा था. हैरानी की बात यह है कि इस दौरान चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी इंजेक्शन देने जैसे कार्य भी कर रहे थे..शहर के खुरमाबाद निवासी डायरिया की शिकायत होने पर अपने 12 साल के बच्चे अमित को दिखाने के लिए आई थी.डॉक्टर द्वारा मरीज को देखकर दवा लिख दी गई थी.ललिता देवी काउंटर से दवा लाकर स्टॉफ नर्स से स्लाइन एवं इंजेक्शन लगाने का अनुरोध कर रही थी.लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा था.पूछने पर बताया कि उसके बच्चे की तबीयत बहुत खराब है.कोई इंजेक्शन नहीं लगा रहा है.पूछने पर स्टॉफ नर्स ने बताया कि बच्चे को वह इंट्रा कैथ नहीं लगा सकती.बाद में जीएनएम द्वारा इंट्रा कैथ लगाया गया.स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि नर्सिंग छात्र बिना लाइसेंस के इलाज नहीं कर सकते, और फोर्थ ग्रेड कर्मचारियों द्वारा इंजेक्शन लगाना पूरी तरह से गैरकानूनी है.टीम जब सदर अस्पताल के एसएनसीयू में पहुंची तो आउट वार्ड में तीन बच्चे एवं इन वार्ड में एक भी बच्चे नहीं थे.कमरे का तापमान 33 डिग्री होने से बच्चों,परिजनों के साथ स्वास्थ्यकर्मी भी परेशान थे. सदर अस्पताल के अधीक्षक डॉ अनिल कुमार सिंह ने कहा कि मेरे द्वारा कई बार कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि नर्सिंग छात्रों एवं फोर्थ ग्रेड कर्मचारियों से मरीजों को इंजेक्शन नहीं लगवाया जाए.मेरे द्वारा इस संबंध में जांच कर करवाई की जाएगी.एसएनसीयू का एसी खराब होने की जानकारी नहीं है.लेकिन उसे जल्द ठीक करा दिया जाएगा. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, हसनपुरा नगर पंचायत हसनपुरा के विभिन्न निजी क्लिनिकों में मरीजों की भीड़ देखने को मिली तो दूसरी तरफ हसनपुरा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक मरीजों का आने का प्रतीक्षा कर रहे थे.इमरजेंसी में होमियोपैथिक चिकित्सक इस्तेयाक अहमद मरीजों को आने की प्रतीक्षा करते नजर आए. उन्होंने बताया कि रात्रि में तीन महिलाओं का प्रसव हुआ.जहां सुबह में सभी को डिस्चार्ज कर दिया गया. स्थानीय लोगों का कहना है कि दंत चिकित्सक, होमियोपैथिक व यूनानी के डॉक्टर ओपीडी चलाते हैं. डेंटल और एक्स-रे का लाभ नहीं मिलने से निजी क्लिनिकों पर जाने को विवश हैं. इस मामले में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अभय कुमार ने बताया कि एक्स-रे मशीन का कीट जलने से मशीन बंद है, दंत चिकित्सक है, लेकिन एसिस्टेंट को नहीं रहने से इसका लाभ मरीजों को नहीं मिल रहा है, अन्य एमबीबीएस चिकित्सक, महिला चिकित्सक, ड्रेसर और जीएनएम की जिले से मांग की गयी है

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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DEEPAK MISHRA

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