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वरदान साबित हो रहा है मॉडल टीकाकरण कॉर्नर

Updated at : 30 Apr 2025 9:03 PM (IST)
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वरदान साबित हो रहा है मॉडल टीकाकरण कॉर्नर

सदर अस्पताल सहित जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रतिदिन प्रशिक्षित नर्स और एएनएम के द्वारा टीकाकरण किया जा रहा है. सिविल सर्जन डॉ श्रीनिवास प्रसाद ने बताया कि चेचक, खसरा, पोलियो, हैजा सहित कई अन्य जानलेवा बीमारियों के प्रभाव से आज हम खुद को पूरी तरह महफूज हैं.

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प्रतिनिधि,सीवान. सदर अस्पताल सहित जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रतिदिन प्रशिक्षित नर्स और एएनएम के द्वारा टीकाकरण किया जा रहा है. सिविल सर्जन डॉ श्रीनिवास प्रसाद ने बताया कि चेचक, खसरा, पोलियो, हैजा सहित कई अन्य जानलेवा बीमारियों के प्रभाव से आज हम खुद को पूरी तरह महफूज हैं.गर्भवती माताएं और उनके होने वाले शिशुओं को कई प्रकार की गंभीर बीमारियों के प्रभाव से मुक्त रखने में आज रोगरोधी टीकाकरण का महत्वपूर्ण योगदान है. सिविल सर्जन ने बताया कि विभिन्न प्रकार के टीकों की स्वीकार्यता को बढ़ाते हुए शत प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य को पूरा कर इसकी उपयोगिता के संबंध में लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से 24 से 30 अप्रैल तक प्रत्येक वर्ष विश्व स्तर पर टीकाकरण सप्ताह आयोजित किया जाता है. गंभीर बीमारियों के प्रभाव से सुरक्षित रखने में टीकाकरण का महत्वपूर्ण योगदान जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अरविंद कुमार ने बताया कि सदर अस्पताल परिसर स्थित मॉडल टीकाकरण कॉर्नर में अत्याधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण, स्वच्छ और शांत वातारण में गर्भवती महिलाएं और नवजात शिशुओं को प्रशिक्षित नर्स द्वारा टीकाकृत किया जाता है. इसके अलावा जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में संक्रमण मुक्त टीकाकरण का बेहतर इंतज़ाम किया गया है. ताकि बच्चों को संपूर्ण टीकाकरण कराने के बाद 12 तरह की बीमारियों से बचाया जा सके. सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सभी प्रकार की टीके प्रशिक्षित और अनुभवी स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा पूरी तरह से निःशुल्क दिया जाता हैं. बच्चों को विभिन्न बीमारियों से लड़ने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में टीकाकरण कारगर साबित हो रहा है. टीकाकरण को लेकर सरकारी चिकित्सा संस्थान बेहतर विकल्प यूनिसेफ के एसएमसी कामरान अहमद ने बताया कि नवजात शिशुओं को जन्म के बाद बीसीजी, ओरल पोलियो और हेपेटाइटस बी का टीका लगाया जाता है। वहीं जब बच्चे 06 सप्ताह की उम्र के होते हैं, तो उन्हें डीपीटी- 1, आइपीवी- 1, ओपीवी- 1, रोटावायरस- 1, न्यूमोकॉकल कॉन्जुगेट टीकाकरण किया जाता है। लेकिन 10 सप्ताह पूरे होने के बाद डीपीटी- 2, ओपीवी- 2 व रोटावायरस- 2 दिया जाता है। जबकि 14 सप्ताह के बाद डीपीटी- 3, ओपीवी- 3, रोटावायरस- 3, आइपीवी- 2 और पीसीवी- 2 दिया जाता है. वहीं 09 से 12 महीने के अंदर जेई – 1, आईपीवी का तीसरा टीका साथ ही विटामिन ए की पहली खुराक दी जाती है. खसरा और रुबेला- 1 दिया जाता है.इसी तरह 16 से 24 माह पर खसरा- 2, डीपीटी बूस्टर- 1, ओपीवी बूस्टर दिया जाता है। पांच से छह साल पर डीपीटी बूस्टर- 2 टीके लगाए जाते है. दस तथा 16 वर्ष के बाद टेटनस एंड एडल्ट डिप्थीरिया टीकाकरण दिया जाता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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DEEPAK MISHRA

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DEEPAK MISHRA is a contributor at Prabhat Khabar.

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