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चलंत मेडिकल टीम कर रही है टीबी मरीजों की जांच

Updated at : 16 Dec 2024 9:34 PM (IST)
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चलंत मेडिकल टीम कर रही है टीबी मरीजों की जांच

जिले में 100 दिवसीय सघन टीबी अभियान के तहत जिले के जीरादेई प्रखंड के तितरा पंचायत के तितरा बंगरा गांव शिविर में लोगों के स्वास्थ्य की जांच की जांच की गई. पोर्टेबल एक्सरे मशीन द्वारा लोगों की जांच की गई.

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संवाददाता, सीवान. जिले में 100 दिवसीय सघन टीबी अभियान के तहत जिले के जीरादेई प्रखंड के तितरा पंचायत के तितरा बंगरा गांव शिविर में लोगों के स्वास्थ्य की जांच की जांच की गई. पोर्टेबल एक्सरे मशीन द्वारा लोगों की जांच की गई.

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अरुण कुमार ने बताया कि स्थानीय गांव में स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित कर उच्च रक्तचाप, मधुमेह और टीबी अभियान की शत-प्रतिशत सफलता के लिए पोर्टेबल मशीन से एक्सरे किया गया. क्योंकि एक्स-रे मशीन की तुलना में बहुत ही कम रेडिएशन की आशंका अल्ट्रा पोर्टेबल एक्सरे मशीन में होती हैं. यह सहज और सुगमता पूर्वक इस्तेमाल होने वाली एक्स-रे मशीन है. क्योंकि इसको बैग पैक की तरह आसानी से ऑपरेटर के द्वारा इस्तेमाल किया जा सकता है. वहीं यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सहायता से बहुत ही जल्द परिणाम सामने आ जाता है. हालांकि इसके संचालन के लिए भी विभाग से लाइसेंस लेना पड़ता है.

जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. अनिल कुमार सिंह ने बताया कि सीवान सहित राज्य के अन्य दस जिलों के 3378 आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के माध्यम से लगभग 2.3 लाख टीबी मरीजों के परिवार के सदस्यों का स्क्रीनिंग एवं जांच की कराई जा रही है. इसके अलावा विगत पांच वर्षों में टीबी का उपचार करा चुके रोगियों, एचआईवी मरीजों तथा मधुमेह के मरीजों की जांच की जायेगी. 10 जिलों के 13 कारागृह में रह रहे लगभग 13 हजार से अधिक बंदियों की भी जांच कराई जाएगी. इसके लिए ट्रू नेट मशीन, सीबी नेट एवं माइक्रोस्कोपी सेंटर की व्यवस्था की गयी है.

42 प्रतिशत टीबी मरीजों की पहचान एक्सरे के द्वारा ही है संभव

वर्ल्ड विजन इंडिया के सी – 19 कार्यक्रम के जिला समन्वयक पंकज कुमार सिन्हा ने बताया कि लगभग 42 प्रतिशत टीबी मरीजों की पहचान एक्सरे मशीन के द्वारा ही संभव हो जाता है. लेकिन टीबी उन्मूलन अभियान तभी संभव होगा जब अधिक से अधिक संदिग्ध मरीजों की जांच सुनिश्चित किया जाएगा. सबसे अहम बात यह है कि पोर्टेबल एक्स- रे मशीन सिस्टम का उपयोग अक्सर उन रोगियों की छाती की रेडियोग्राफी करने के लिए किया जाता है जिन्हें रेडियोलॉजी विभाग में नहीं ले जाया जा सकता है.इस अवसर पर बीएचएम अरविंद राय, सिफार के डीपीसी धर्मेंद्र रस्तोगी, सामुदायिक कार्यकर्ता सुनील कुमार, एक्सरे टेक्नीशियन प्रतुल कुमार, एसटीएस जितेंद्र कुमार, सीएचओ अमरजीत कुशवाहा, एएनएम रंजना कुमारी, फार्मासिस्ट नरेंद्र कुमार, आशा फेसिलेटर अंजू देवी और मीरा देवी उपस्थित थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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