सीवान: बड़हरिया बाजार में नहीं है सार्वजनिक शौचालय, जर्जर सुलभ शौचालय से बढ़ी परेशानी

जर्जर पड़ा प्रखंड कार्यालय के पास का जर्जर सुलभ शौचालय
बड़हरिया प्रखंड मुख्यालय में सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति बेहद चिंताजनक है. पुराने सुलभ शौचालय जर्जर होकर कभी भी गिर सकते हैं, जबकि अन्य इमारतें भी ध्वस्त हो चुकी हैं. इससे लोगों को, खासकर महिलाओं और छात्राओं को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है.
Siwan News: बड़हरिया प्रखंड मुख्यालय के पुराने कार्यालय परिसर में 90 के दशक में निर्मित सुलभ शौचालय अब पूरी तरह जर्जर हो चुका है और कभी भी धराशायी हो सकता है.
पिछले कई वर्षों से इसकी टंकी ध्वस्त हो चुकी है, जबकि सभी स्लैब टूट गए हैं. जर्जर स्थिति के कारण यह शौचालय खतरे को आमंत्रण दे रहा है.
जिला परिषद की जमीन पर बना शौचालय भी हो चुका ध्वस्त
बड़हरिया बाजार के थाना चौक के समीप जिला परिषद की जमीन में बना शौचालय भी पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है. स्थिति ऐसी है कि लोगों ने वहां जाना तक छोड़ दिया है.
वर्ष 2002 में इस जमीन पर दुकानों के निर्माण के बाद शौचालय के लिए पर्याप्त जगह भी नहीं बची.
वर्षों से उठ रही है सार्वजनिक शौचालय की मांग
बड़हरिया बाजार में सार्वजनिक शौचालय निर्माण की मांग लंबे समय से होती रही है. सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने कई बार आंदोलन भी किया.
प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की ओर से भी आश्वासन दिए जाते रहे, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद आज तक बाजार को एक बेहतर सार्वजनिक शौचालय नहीं मिल सका है.
महिलाओं और छात्राओं को सबसे ज्यादा परेशानी
बाजार में शौचालय की सुविधा नहीं होने का सबसे अधिक असर महिलाओं, युवतियों और छात्राओं पर पड़ रहा है.
पुरुष तो किसी तरह सड़क किनारे या खेतों में जाकर अपनी जरूरत पूरी कर लेते हैं, लेकिन महिलाओं के लिए यह स्थिति बेहद असहज और परेशानी भरी हो जाती है.
खुले में शौच को मजबूर लोग
देशभर में खुले में शौच से मुक्ति को लेकर अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन बड़हरिया प्रखंड मुख्यालय में ही लोग शौचालय के अभाव में खेतों और सड़क किनारे जाने को मजबूर हैं.
ग्रामीणों का कहना है कि जिस कार्यालय से खुले में शौच मुक्ति अभियान का संचालन होता है, वहीं शौचालय की समस्या गंभीर बनी हुई है.
देखरेख करने वाली महिला ने बताई समस्या
सुलभ शौचालय की देखरेख करने वाली मीना देवी ने बताया कि वर्ष 1992 में निर्माण के बाद आज तक इसकी मरम्मत के लिए कोई राशि उपलब्ध नहीं कराई गई.
उन्होंने बताया कि चापाकल खराब होने या स्लैब टूटने पर खुद के पैसे से मरम्मत करानी पड़ती है. यहां तक कि उन्होंने 12 हजार रुपये खर्च कर टंकी की सफाई भी कराई थी.
नगर पंचायत बनने के बाद भी नहीं बदली स्थिति
बड़हरिया को नगर पंचायत का दर्जा मिलने के बाद लोगों में उम्मीद जगी थी कि अब प्रखंड मुख्यालय में सार्वजनिक शौचालय की सुविधा उपलब्ध होगी, लेकिन अभी तक यह उम्मीद पूरी होती नहीं दिख रही है.
विधायक ने विधानसभा में उठाया मुद्दा
स्थानीय विधायक इंद्रदेव सिंह पटेल ने विधानसभा में प्रखंड मुख्यालय में सार्वजनिक सुलभ शौचालय निर्माण का मुद्दा उठाया है.
उन्होंने तारांकित प्रश्न के माध्यम से कहा कि नगर पंचायत सह प्रखंड मुख्यालय बड़हरिया में प्रतिदिन हजारों लोग विभिन्न कार्यों से पहुंचते हैं, जिनमें ग्रामीण महिलाओं की संख्या भी काफी अधिक होती है.
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक शौचालय नहीं होने के कारण महिलाओं को खुले में शौच के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे उन्हें असहज और शर्मिंदगी महसूस करनी पड़ती है.
विधायक ने कहा कि सार्वजनिक शौचालय निर्माण होने से खुले में शौच की समस्या दूर होगी और महिलाओं में आत्मसम्मान की भावना मजबूत होगी.
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