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सदर अस्पताल में डॉक्टरों के ड्यूटी रोस्टर को लेकर विवाद

Updated at : 12 Jun 2024 9:43 PM (IST)
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सदर अस्पताल में डॉक्टरों के ड्यूटी रोस्टर को लेकर विवाद

जिलाधिकारी मुकुल कुमार गुप्ता के हस्तक्षेप के बाद भी सदर अस्पताल के डॉक्टरों के ड्यूटी रोस्टर विवाद खत्म नहीं हुआ है. आट जून को डीएम के सदर अस्पताल के निरीक्षण के बाद सिविल सर्जन डॉ अनिल कुमार भट्ट, प्रभारी अधीक्षक डॉ मोहम्मद इसराइल एवं डीपीएम विशाल कुमार सिंह ने तुरंत डॉक्टरों को बुलाकर उनकी सहमति के अनुसार ड्यूटी रोस्टर बनाने का प्रयास किया गया. लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका.

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सीवान. जिलाधिकारी मुकुल कुमार गुप्ता के हस्तक्षेप के बाद भी सदर अस्पताल के डॉक्टरों के ड्यूटी रोस्टर विवाद खत्म नहीं हुआ है. आट जून को डीएम के सदर अस्पताल के निरीक्षण के बाद सिविल सर्जन डॉ अनिल कुमार भट्ट, प्रभारी अधीक्षक डॉ मोहम्मद इसराइल एवं डीपीएम विशाल कुमार सिंह ने तुरंत डॉक्टरों को बुलाकर उनकी सहमति के अनुसार ड्यूटी रोस्टर बनाने का प्रयास किया गया. लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका. सभी डॉक्टरों की शिकायत है कि ड्यूटी रोस्टर बनाने के पहले किसी डॉक्टर से उसकी सहमति नहीं ली जाती है. आरोप है की प्रभारी अधीक्षक एक जूनियर डॉक्टर से ड्यूटी रोस्टर बनवा कर उस पर हस्ताक्षर कर जारी कर देते है.ड्यूटी रोस्टर का मुख्य विवाद पीडियाट्रिशियन डॉक्टरों से है. जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद सदर अस्पताल के दोनों पीडियाट्रिशियन डॉक्टरों को ड्यूटी रोस्टर का विवाद खत्म करने के लिए आठ जून को ही बुलाया गया. पीडियाट्रिशियन डॉक्टरों का कहना था कि ओपीडी के साथ-साथ एसएनसीयू में भी उनकी ड्यूटी लगनी चाहिए. जबकि प्रभारी अधीक्षक डॉ. मोहम्मद इसराइल पीडियाट्रिशियन डॉक्टरों की एसएनसीयू में ड्यूटी नहीं देना चाहते हैं. पीडियाट्रिशियन डॉक्टरों ने प्रभारी अधीक्षक से कहा की अगर विभाग का निर्देश है की एमबीबीएस डॉक्टर ही एसएनसीयू में ड्यूटी करेगा, पीडियाट्रिशियन डॉक्टर नहीं तो इस संबंध में विभाग का कोई भी पत्र दिखा दीजिए. प्रभारी अधीक्षक के एसएनसीयू में पीडियाट्रिशियन डॉक्टरों की ड्यूटी नहीं देने पर अड़ जाने के कारण ड्यूटी रोस्टर विवाद खत्म नहीं हो रहा है. आपात कक्ष से मेल नर्सिंग स्टॉफ के हटाए जाने से परेशानियां बढ़ी- सदर अस्पताल के आपात कक्ष से इंचार्ज को छोड़कर सभी मेल नर्सिंग स्टॉफ की ड्यूटी प्रभारी अधीक्षक द्वारा हटा दी गई है. मरीजों के इलाज के लिए प्रत्येक शिफ्ट में तीन फीमेल नर्सिंग स्टॉफ के साथ दो चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है. सदर अस्पताल का आपात कक्ष में मरीजों की हमेशा भीड़ रहती है. भीड़ को नियंत्रित करने या भीड़ में मरीजों का इलाज करने के लिए मेल नर्सिंग स्टॉफ का होना जरूरी होता है. अस्पताल प्रशासन द्वारा अनुभवी मेल नर्सिंग स्टॉफ की ड्यूटी ओपीडी एवम दवा वितरण काउंटर पर लगा दी गई है. इंटर्नशिप करने वाले आयुष चिकित्सक ही करते मरीजों का इलाज सदर अस्पताल में लगभग 20 आयुष चिकित्सक 6 माह का इंटर्नशिप कर रहें हैं. प्रत्येक शिफ्ट में दो आयुष चिकित्सकों की रखा गया है जो ड्यूटी करने वाले डॉक्टरों के साथ सीखेंगे. लेकिन ऐसा प्रायः देखा जा रहा है की इंटर्न शीप करने वाले डॉक्टर ही मरीजों का इलाज कर देते है. मरीजों को देखने के साथ साथ आयुष चिकित्सक सभी सरकारी रजिस्टरों में मरीजों का का डाटा इंट्री भी करते है. कभी कभी तो ऐसा भी देखने को मिलता है की डॉक्टर नहीं हैं तथा आयुष चिकित्सक ही मरीजों का इलाज करते हैं. क्या कहते हैं जिम्मेदार जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन सर को नया ड्यूटी रोस्टर बनाने को कहा है. अभी तक कोई नया ड्यूटी रोस्टर सिविल सर्जन सर द्वारा बनाकर मुझे लागू करने के लिए नहीं दी गई है. नया ड्यूटी रोस्टर मिलते ही उसे लागू किया जायेगा. डॉ मो. इसराइल, प्रभारी अधीक्षक, सदर अस्पताल, सीवान

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