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डेढ़ माह बाद भी नहीं लग सका पीपा पुल

Updated at : 10 Jan 2025 9:42 PM (IST)
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डेढ़ माह बाद भी नहीं लग सका पीपा पुल

दरौली प्रखंड मुख्यालय स्थित पंच मंदिरा घाट पर बनने वाला पीपा पुल 45 दिन बाद भी नहीं लगाया जा सका है. नतीजतन सैकड़ों लोग आज भी जान जोखिम में डालकर नाव से यात्रा कर रहे हैं. लोगों की माने तो सरयू नदी पर एक से 15 नवंबर तक पीपा पुल लगाया जाता था.

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संवाददाता. दरौली/गुठनी. दरौली प्रखंड मुख्यालय स्थित पंच मंदिरा घाट पर बनने वाला पीपा पुल 45 दिन बाद भी नहीं लगाया जा सका है. नतीजतन सैकड़ों लोग आज भी जान जोखिम में डालकर नाव से यात्रा कर रहे हैं. लोगों की माने तो सरयू नदी पर एक से 15 नवंबर तक पीपा पुल लगाया जाता था. जिससे ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में होने वाले वैवाहिक कार्यक्रम में लोगों को काफी फायदा होता था. वहीं यात्रा की असुविधा से लोगों को सैकड़ों किलोमीटर का आराम मिल जाता था. जिससे पैसे व समय की बचत से मध्यम वर्गीय परिवार राहत की सांस लेता था. लेकिन, विभागीय उदासीनता, अधिकारियों की लापरवाही, बिचौलियों की गड़बड़ी व नाविकों की मनमानी से आम आदमी को काफी परेशानी हो रही है. जिले के करीब आधा दर्जन प्रखंड के लोगों के लिए पीपा पुल यातायात का सुगम साधन है. इसके नहीं चालू होने से लोग परेशान हैं. पंचमंदिरा घाट पर नाव में क्षमता से ज्यादा सवारियां भरी होती हैं. खासतौर से सुबह के समय जब दूध व सब्जी वालों के अलावा यूपी में जाने वाले लोगों का समय होता है. ये लोग सुबह सात से नौ बजे तक खरीद, सिकंदरपुर, बलिया, बक्सर जाने के लिए निकलते हैं. इस बीच नाव पर काफी ज्यादा भीड़ होती है. एक समय में करीब 25 से 30 सवारियां बैठाये जाने का नियम है, लेकिन इसमें 70 से 100 लोगों को बैठाया जाता है. इसके अलावा साइकिल, बाइक व लोगों का सामान अलग से होता है. इस स्थिति में दुर्घटना की आशंका रहती है. दोनों राज्यों के बीच पारिवारिक रिश्ते होते हैं मजबूत दरौली में पीपा पुल के निर्माण से यूपी के बलिया जिले के सिकंदरपुर, बांसडीह, मनियर समेत मऊ, गाजीपुर, बनारस जिले के लोग बिहार के दरौली, मैरवा, नौतन, गोपालगंज, गुठनी, रघुनाथपुर, आंदर, अंसाव, हुसैनगंज और हसनपुरा में अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के यहां आने में सहूलियत मिलेगी. व्यावसायिक दृष्टिकोण से भी काफी आसानी हो जाएगी. मिली जानकारी के अनुसार यूपी सरकार द्वारा वर्ष 2007 से लगातार नवंबर महीने में पीपा पुल लगती है. 15 जून से पहले इसे खोल दिया जाता है. पुरानी नाव से किया जाता है नदी का सफर दरौली के पंचमंदिरा घाट से यूपी के खरीद तक नाव का सफर होता है, लेकिन नाव पुरानी होने के कारण इनमें धीरे-धीरे पानी भर जाता है. इस हालत में दुर्घटना की आशंका रहती है. नाव में ज्यादा वजन रहने के कारण नाव चालक हर पांच मिनट में पानी खाली करता है. बावजूद स्थानीय प्रशासन की नजर इस कुव्यवस्था के खिलाफ नहीं गई. समय व पैसे की बचत के लिए पीपा पुल का लेते हैं सहारा दरौली प्रखंड व यूपी के खरीद के बीच पीपा पुल चालू हो जाने से यात्रियों व किसानो को पैसे की बचत होती है. वहीं पीपा पुल के परिचालन से दरौली से बलिया जिले की दूरी महज डेढ़ घंटे में पूरी हो जाती है. साथ ही बनारस की दूरी पीपा पुल पार कर जाने से 50 किलोमीटर कम हो जाती है. विभाग के एसडीओ मो. इब्राहिम ने बताया कि पीपा पुल का निर्माण लगभग 75 फीसदी तक कर दिया गया है. इस पर जल्द ही सरकार द्वारा यातायात बहाल कर दिया जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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