पुरातन व्यवस्था को नष्ट करने का हुआ प्रयास

Published by : DEEPAK MISHRA Updated At : 27 Jul 2025 9:57 PM

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विद्या भारती बिहार द्वारा आयोजित पांच दिवसीय क्षेत्रीय पूर्णकालिक कार्यकर्ता अभ्यास वर्ग का शुभारंभ रविवार को महावीरी सरस्वती विद्या मंदिर विजयहाता में दीप प्रज्वलन के साथ हुआ. इस वर्ग में उत्तर बिहार, दक्षिण बिहार और झारखंड प्रांत के विद्या भारती विद्यालयों के 50 पूर्णकालिक एवं प्रवासी कार्यकर्ता भाग ले रहे हैं.

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प्रतिनिधि सीवान. विद्या भारती बिहार द्वारा आयोजित पांच दिवसीय क्षेत्रीय पूर्णकालिक कार्यकर्ता अभ्यास वर्ग का शुभारंभ रविवार को महावीरी सरस्वती विद्या मंदिर विजयहाता में दीप प्रज्वलन के साथ हुआ. इस वर्ग में उत्तर बिहार, दक्षिण बिहार और झारखंड प्रांत के विद्या भारती विद्यालयों के 50 पूर्णकालिक एवं प्रवासी कार्यकर्ता भाग ले रहे हैं. उद्घाटन समारोह में विद्या भारती के अखिल भारतीय मंत्री ब्रह्माजी राव, क्षेत्रीय संगठन मंत्री ख्यालीराम, क्षेत्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. शरद चौधरी, महावीरी विजयहाता के सचिव ओमप्रकाश दूबे और विद्या भारती झारखंड के प्रदेश मंत्री डॉ. ब्रजेश कुमार ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की. संचालन उत्तर बिहार प्रांत के सचिव रामलाल सिंह ने किया. अतिथियों का परिचय दक्षिण बिहार प्रांत के सचिव प्रदीप कुमार कुशवाहा ने कराया. झारखंड प्रांत के सचिव नकुल कुमार शर्मा ने पांच दिवसीय अभ्यास वर्ग के कार्यक्रमों की जानकारी दी. क्षेत्रीय संगठन मंत्री ख्यालीराम ने अभ्यास वर्ग का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए कहा कि यह कार्यकर्ताओं की क्षमता और उत्साह को बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें सही दिशा प्रदान करता है. विकास और शैक्षणिक विषयों पर गहन चर्चा से कार्यकर्ता नए अनुभव और विचार प्राप्त करते हैं. विद्या भारती के अखिल भारतीय मंत्री ब्रह्माजी राव ने कहा कि अभ्यास वर्ग संगठन को दिशा देने में सहायक हैं. प्रत्येक कार्यकर्ता को संगठन के विकास के लिए स्वयं की कार्ययोजना बनानी चाहिए और अन्य कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित कर उसे लागू करना चाहिए. विद्या भारती मॉडल स्कूलों के निर्माण, शोध कार्य, वंचित वर्ग को शिक्षा और संस्कार प्रदान कर राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली के विकास में योगदान दे रहा है. उन्होंने बताया कि भारतीय शिक्षा का लक्ष्य सर्वांगीण विकास रहा है. प्राचीन काल में गुरुकुलों में राजा की संतानें भी पढ़ती थीं, लेकिन अंग्रेजी शासन में शिक्षा की पुरातन व्यवस्था को नष्ट करने का प्रयास हुआ. स्वतंत्रता के बाद भी राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली के विकास में सार्थक प्रयासों की कमी रही. विद्या भारती इस स्वरूप को गढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. इस अवसर पर क्षेत्रीय मीडिया समन्वयक नवीन सिंह परमार, प्रधानाचार्य शम्भू शरण तिवारी, ओमप्रकाश सिंह, पारस नाथ सिंह, कौशलेंद्र प्रताप, डॉ. दिनेश कुमार, शिवेंद्र विनोद कुशवाहा, अरविंद कुमार, राजीव कुमार, डॉ. गणेश दत्त पाठक, डॉ. शैलेश कुमार राम, सिम्मी दीदी, सुमन कुमारी, सुजीत कुमार, अमन कुमार कुशवाहा सहित सिवान जिले के विभिन्न विद्या भारती विद्यालयों के कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित थे.

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