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31 फीसदी आरा मशीनों के पास लाइसेंस नहीं

Updated at : 04 Apr 2025 9:50 PM (IST)
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31 फीसदी आरा मशीनों के पास लाइसेंस नहीं

जिले में जितने भी आरा मशीन संचालित हैं, उसमें से तकरीबन 31 फीसदी के पास लाइसेंस नहीं है. इससे जहां सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है वहीं पेड़ों की अंधाधुंध कटाई भी हो रही है. मात्र एक प्रतिशत वन क्षेत्र से आच्छादित इस जिले में जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड स्तर व कस्बाई इलाके में लगभग डेढ़ सौ से अधिक आरा मशीन व लकड़ी टालों का खुलेआम संचालन हो रहा है. लेकिन उनमेें से सिर्फ 103 के पास ही लाइसेंस है.

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प्रतिनिधि, सीवान. जिले में जितने भी आरा मशीन संचालित हैं, उसमें से तकरीबन 31 फीसदी के पास लाइसेंस नहीं है. इससे जहां सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है वहीं पेड़ों की अंधाधुंध कटाई भी हो रही है. मात्र एक प्रतिशत वन क्षेत्र से आच्छादित इस जिले में जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड स्तर व कस्बाई इलाके में लगभग डेढ़ सौ से अधिक आरा मशीन व लकड़ी टालों का खुलेआम संचालन हो रहा है. लेकिन उनमेें से सिर्फ 103 के पास ही लाइसेंस है. निर्बाध तरीके से हो रहे लकड़ी के अवैध व्यवसाय के पीछे वन विभाग को मेहरबान होना बताया जा रहा है. हालांकि इस अवैध कारोबार को रोकने के लिए वन विभाग के साथ-साथ स्थानीय अंचल अधिकारियों एवं थाना को भी संयुक्त रूप से जिम्मेवार माना जा सकता है. लेकिन बेरोकटोक चल रहे इस धंधे से जिम्मेवार अधिकारी भी जानबूझ कर अनजान बने हैं. वन विभाग से लेकर प्रशासन पर भी पर्यावरण की गंभीरता को ले सवाल उठ रहे हैं. लकड़ी के अवैध धंधे का है नेटवर्क जानकारी के अनुसार अवैध आरा मशीन के संचालन में एक नेटवर्क काम करता है. पहली कड़ी में मजदूर किस्म के लोग होते हैं, जो पेड़ों की कटाई करते हैं. वही दूसरी कड़ी में शामिल लोग लकड़ी की ढुलाई कर आरा मशीन तक पहुंचाते हैं. इस दौरान स्थानीय थाना पुलिस को लकड़ी की गाड़ी पार करने के लिए शुल्क भी देना पड़ता है. बाद में आरा मशीन पर लकड़ी पहुंचने के बाद उसकी चिराई होती है. 103 आरा मशीनों को ही जिले में मिला है लाइसेंस वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में 103 आरा मशीन ही लाइसेंसधारी हैं. जिनको विभागीय मानदंड के अनुसार कारोबार करने के अनुमति दी गई है. लेकिन जिला मुख्यालय का शहर से लेकर विभिन्न प्रखंड मुख्यालय के बाजारों में कुल मिलाकर लगभग डेढ़ सौ से अधिक की संख्या में आरा मशीन व लकड़ी टाल संचालित हो रहे हैं. इन आरा मशीन पर हरे पेड़ों की कटाई कर लाई गई लकड़ी को खुलेआम चिराई हो रही हैं. अन्य जगहों की बात क्या करें, बीते महीने गांधी मैदान के समीप हरे पेड़ों को काटा गया. साथ ही साथ शहर से सटे मुफस्सिल, महादेवा ओपी, सराय ओपी थाना क्षेत्रों में भी कई हरे पेड़ काटकर गायब कर दिए गये. प्राप्त जानकारी के मुताबिक जिले में आरा मशीनों की भरमार हैं. कोई चौक चौराहा पर तो कोई गवहीं क्षेत्र में आरा मशीन का संचालन हो रहा है. जब जांच होती है तो आरा मशीन संचालक अपना अपना मशीन बंद कर फरार हो जाते हैं. आरा मशीन संचालकों से मिली जानकारी के मुताबिक कई ऐसे आरा मशीन है जो एक लाइसेंस पर दो दो जगह चलाते हैं. बोले पदाधिकारी- जिले में 103 आरा मशीन को लाइसेंस हैं. अवैध आरा मशीनों के विरुद्ध अभियान चलाकर सीज किया जाता है. आरा मशीनों के विरुद्ध छापेमारी भी चल रही हैं. मेघा यादव , डीएफओ,वन विभाग सीवान

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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